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चुनाव एनालिसिस 2021:तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन के संकेत, DMK का पलड़ा भारी नजर आ रहा; AIADMK को भाजपा से गठबंधन का भी नुकसान

चेन्नई5 दिन पहलेलेखक: सुनील बघेल
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तमिलनाडु की दो दलीय राजनीति में हार-जीत मुख्य रूप से मुफ्त गिफ्ट (घोषणा पत्र में), केंद्र का विरोध, स्टारडम, जातीय समीकरण और 'कैश फॉर वोट' जैसे पांच पैमानों से तय होती रही है। इस बार भी तस्वीर अलग नहीं है। इन पांच पैमानों में से शुरुआती दो, केंद्र का विरोध और फ्री गिफ्ट (घोषणा पत्र) के पैमाने पर DMK स्पष्ट रूप से आगे है, लेकिन स्टारडम के मामले में दोनों की स्थिति एक जैसी है।

जातीय समीकरण में AIADMK भले कुछ आगे नजर आ रही हो, लेकिन अंतिम परिणाम को लेकर विश्लेषक असमंजस में हैं। पांचवें पैमाने कैश फॉर वोट के मामले में जरूर अन्नाद्रमुक को स्पष्ट बढ़त है। राज्य के सभी चार भागों में से पश्चिमी तमिलनाडु में 2016 के मुकाबले अन्नाद्रमुक को ज्यादा नुकसान तो नहीं होगा, लेकिन बाकी इलाकों में वह अपने पिछले बार के प्रदर्शन के मुकाबले थोड़ा कमजोर दिख रही है। कुल मिलाकर देखें तो स्पष्ट इशारा सत्ता परिवर्तन का है।

तमिलनाडु में वोट प्रतिशत हमेशा अच्छा रहा है। 2011 में मतदान 8% बढ़कर करीब 78.5% हुआ और जयललिता सरकार बनी, लेकिन 2016 में 3.5% गिर कर 75% रह जाने के बावजूद सत्ता नहीं बदली। यह जरूर महत्वपूर्ण है कि दोनों दलों के बीच हार-जीत का अंतर सिर्फ 1% मत से तय हुआ था। इस बार भी मतदान 3% घटकर 72% रह गया है। इसे AIADMK कैडर की उदासीनता के रूप में देखा जा रहा है।

मंगलवार को वोटिंग से पहले करुणानिधि की तस्वीर के सामने हाथ जोड़े स्टालिन। स्टालिन इस बार DMK की तरफ से मुख्यमंत्री पद की दावेदारी पेश कर रहे हैं।
मंगलवार को वोटिंग से पहले करुणानिधि की तस्वीर के सामने हाथ जोड़े स्टालिन। स्टालिन इस बार DMK की तरफ से मुख्यमंत्री पद की दावेदारी पेश कर रहे हैं।

लेकिन, अपेक्षाकृत कम इनकंबेंसी के बावजूद यह किसके पक्ष में जा रहा है, कुछ कहा नहीं जा सकता। राजनीतिक विश्लेषक जरूर इस बात पर एकमत हैं कि अन्नाद्रमुक को भाजपा से गठबंधन का खामियाजा भी भुगतना पड़ रहा है। पश्चिमी तमिलनाडु की 57 सीटों की बात करें तो वहां AIADMK को फिर बढ़त मिल सकती है। मध्य तमिलनाडु में भी नुकसान सीमित है। उत्तर और दक्षिण तमिलनाडु नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसमें DMK के साथ जा रहे लगभग 15% क्रिश्चियन और ईसाई वोट का भी हाथ है।

पांच पैमानों पर क्या है स्थिति?

  • केंद्र का विरोध

जयललिता हो या करुणानिधि, केंद्र और हिंदी विरोध इनकी राजनीति का भी केंद्र रहा है। यही कारण है कि लोकसभा में यहां के चुनाव परिणाम, अक्सर बाकी राज्यों से उलट होते हैं। अडाणी बंदरगाह, कावेरी डेल्टा हाइड्रोकार्बन प्रोजेक्ट, स्टरलाइट कॉपर प्लांट का विरोध हो या कन्याकुमारी के पास प्रस्तावित बंदरगाह और कुडनकुलम न्यूक्लियर पॉवर प्रोजेक्ट का विरोध। इन सब प्रोजेक्ट के विरोध को हवा देकर DMK मौजूदा EPS सरकार को केंद्र की कठपुतली साबित करने में काफी हद तक सफल रही है। हिंदी विरोध के मामले में भी यही स्थिति है।

  • मुफ्त गिफ्ट

कृषि और गोल्ड लोन माफी ने अन्नाद्रमुक को शुरुआती बढ़त दिलाई। राशन कार्ड धारी गृहिणी को हर महीने पैसा देने के मामले में दोनों दल लगभग बराबरी पर रहे, लेकिन DMK के घोषणापत्र में गैस सब्सिडी और पेट्रोल डीजल में ₹5 तक की कमी का वादा उसे स्पष्ट बढ़त दिलाता नजर आ रहा है। लोन माफी घोषणा को भी वह अपने दबाव में उठाया गया कदम स्थापित करने में काफी हद तक सफल रही है। सर्वे में भी DMK का घोषणा पत्र सबसे ज्यादा लोकप्रिय पाया गया।

मंगलवार को मतदान के बाद विक्ट्री साइन दिखाते मौजूदा CM EPS। उन्होंने सिलुवमपलायम के एक गांव में बने मतदान केंद्र में वोट डाला।
मंगलवार को मतदान के बाद विक्ट्री साइन दिखाते मौजूदा CM EPS। उन्होंने सिलुवमपलायम के एक गांव में बने मतदान केंद्र में वोट डाला।
  • स्टारडम

40 साल से सत्ता की दशा-दिशा तय करने करने वाले फिल्मी चेहरे इस बार परदे से नदारद हैं। जो हैं भी, उनके मतदाता की दीवानगी पर सवार होकर विधानसभा पहुंचने की संभावना लगभग शून्य है। रजनीकांत के पांव पीछे खींचने के बाद कमल हासन के पास बताने के लिए जीती हुई सीटें नहीं, सिर्फ हासिल वोटों का प्रतिशत होगा। अभिनेत्री खुशबू की बड़ी जीत सिर्फ इतनी कि उन्हें भाजपा से टिकट मिल गया। एक लोकप्रिय नाम विजयकांत भी हैं, जो AIADMK से अलग होकर अब दिनाकरण के साथ हैं यानी AIADMK को ही नुकसान पहुंचा रहे हैं। DMK के पास अभिनेता उदयनिधि स्टालिन हैं। पर वे वोट जुगाड़ने के बजाय, विपक्षी दलों द्वारा परिवारवाद का आरोप लगाने के ज्यादा काम आ रहे हैं।

  • जातीय समीकरण

तमिलनाडु में जातीय समीकरण, राजनीति का पर्यायवाची शब्द जैसा है। 3 जातियों वनियार, थेवर और गाउंदर राजनीतिक रूप से सबसे मजबूत हैं। DMK ने 39% तो AIADMK के 47% प्रत्याशी इन्हीं 3 जातियों के हैं। यानी यहां जातीय संतुलन मामला लगभग बराबर है। अन्नाद्रमुक ने वनियार को 10.5% आंतरिक आरक्षण और केंद्र ने अनुसूचित जाति, देवेंद्र कुला वेल्लालार को अलग मान्यता दी है। यह मुख्यमंत्री EPS की जाति गाउंदर के साथ, वोट का नया जातीय समीकरण बनाने की कोशिश थी। इसका पश्चिमी तमिलनाडु में असर तो दिखा, लेकिन लोग संतुष्ट नहीं नजर आए।

तमिलनाडु में एक सभा के दौरान PM मोदी। भाजपा ने इस बार दक्षिण में अपनी पूरी ताकत झोंकी है। पार्टी के सभी बड़े नेताओं ने यहां रैली की है।
तमिलनाडु में एक सभा के दौरान PM मोदी। भाजपा ने इस बार दक्षिण में अपनी पूरी ताकत झोंकी है। पार्टी के सभी बड़े नेताओं ने यहां रैली की है।

वहीं प्रदेश के दूसरे हिस्सों में यह प्रयोग थेवर, नाडार जैसी जातियों को नाराज भी कर गया। मतलब दांव उल्टा पड़ने के भी संकेत मिल रहे हैं। हालांकि यह प्रयोग किसके पक्ष में जाएगा, इसे लेकर राजनीतिक विश्लेषक असमंजस में हैं, क्योंकि DMK 10 साल से सत्ता के बाहर है और फिलहाल सिस्टम भी उसके साथ नहीं है। इसलिए इस पैमाने पर अन्नाद्रमुक को स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है।

  • कैश फॉर वोट

एक मौजूदा सांसद ऑफ द रिकॉर्ड कहते हैं कि यहां अधिकारी 5 करोड रुपए महीना और मंत्री 200-300 करोड़ रुपए महीने तक भी आसानी से कमा लेते हैं। इसी कमाई का एक हिस्सा कैश फॉर वोट में खर्च होता है। दोनों पार्टियों के लगभग 25% तो स्थाई वोट बैंक हैं। नेताओं की मानें तो यहां लगभग 15% वोट प्रत्याशियों द्वारा वोट के बदले दिए जाने वाले पैसे से तय होते हैं। चूंकि DMK 10 साल से सत्ता से बाहर है और सिस्टम भी हाथ में नहीं है, तो इस मामले में अन्नाद्रमुक बढ़त में है।

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