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दक्षिण तमिलनाडु से रिपोर्ट:यहां 'थेवर' के तेवर तय करेंगे किसकी होगी सरकार, BJP के चलते अल्पसंख्यक बना रहे AIADMK से दूरी, शशिकला के मंदिर दर्शन से बढ़ी NDA की चिंता

कन्याकुमारी5 दिन पहलेलेखक: सुनील बघेल
मौजूदा मुख्यमंत्री ईपीएस को कठपुतली सीएम बताने वाला यह विज्ञापन पूरे प्रदेश में खूब वायरल हो रहा है।

दक्षिण तमिलनाडु में हमेशा से दबंग समझी जाने वाली 'थेवर' जाति का दबदबा रहा है। ये गाउंदर, वन्नियार और देवेंद्र कुला वेल्लालार के परंपरागत प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। थेवर परंपरागत रूप से अन्नाद्रमुक के वोटर रहे हैं, लेकिन इसी जाति की शशिकला के पार्टी से बाहर होने और भतीजे दिनाकरण द्वारा अपनी पार्टी बना लेने से वोट बैंक टूटता नजर आ रहा है। यही नहीं वन्नियारों को 10.5% आरक्षण देने का फैसला भी अन्नाद्रमुक के लिए बूमरैंग साबित हो रहा है। 40 सालों से अन्नाद्रमुक के बड़े समर्थक रहे दक्षिण तमिलनाडु में पार्टी को 2016 में भी 58 में से 32 सीटें मिली थीं, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में तो सफाया हुआ ही, इस बार जीत का आंकड़ा 20 पार करना भी मुश्किल नजर आ रहा है।

दक्षिण तमिलनाडु में मदुरै, तेनी, शिवकाशी, तूतीकोरिन, विरुधुनगर, तिरुनेलवेली जैसे जिले आते हैं। ईपीएस सरकार ने वन्नियार को आरक्षण देकर अपनी खुद की सीट भी बचाई और पश्चिम तमिलनाडु में भी खुद को मजबूत किया, लेकिन दक्षिण तमिलनाडु सहित दूसरे हिस्सों में दूसरी अति पिछड़ी जातियों (एमबीसी) के तेवर सरकार के खिलाफ नजर आ रहे हैं। पॉलीटिकल एनालिस्ट उद्धव कहते हैं "यह फैसला अन्नाद्रमुक के लिए बूमरैंग साबित होगा"।

कुछ ऐसे ही हालात देवेंद्र कुला वेल्लालार को लेकर केंद्र के फैसले से बन रहे हैं। इससे थेवर भी नाराज हैं और लगभग 60 लाख आबादी वाली इस जाति का एक बड़ा तबका भी। दरअसल पूरा श्रेय केंद्र द्वारा लेने के कारण देवेंद्र कुला के बड़े नेता कृष्णास्वामी अप्रासंगिक महसूस करने लगे हैं। अब NDA गठबंधन से अलग होकर 60 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। कृष्णा स्वामी कहते हैं कि SC होने की अपमानजनक पहचान को छोड़ना चाहते हैं।

थेवर कम्युनिटी से ताल्लुक रखने वालीं शशिकला इन दिनों मंदिरों का दौरा कर रही हैं। हाल ही में वे रामनाथस्वामी मंदिर गई थीं।
थेवर कम्युनिटी से ताल्लुक रखने वालीं शशिकला इन दिनों मंदिरों का दौरा कर रही हैं। हाल ही में वे रामनाथस्वामी मंदिर गई थीं।

इसके अलावा इलाके में खासे लोकप्रिय अभिनेता विजयकांत ने भी अन्नाद्रमुक का साथ छोड़ दिनाकरन का हाथ थाम लिया है। कांग्रेस के लीगल प्रकोष्ठ के प्रमुख सैयद हारून कहते हैं, "साउथ में नाडार भी हैं, जातियों में बंटे क्रिश्चियन, मुस्लिम आबादी भी अच्छी-खासी है। यह दोनों पार्टियों को वोट देते रहे हैं। भाजपा गठबंधन से हिंदू तो साथ नहीं आए, लेकिन यह वोटर अन्नाद्रमुक से दूर जरूर हो गया है।" अन्नाद्रमुक को, मदुरै क्षेत्र में स्टालिन के बड़े भाई अलागिरी के बगावती तेवर से बहुत उम्मीद थी, लेकिन चुनाव आते ही उनकी चुप्पी DMK के लिए मददगार साबित हो रही है। स्थानीय माइकल कहते हैं कि हम लोग इसे सामान्य पारिवारिक झगड़े से ज्यादा कुछ नहीं मानते। देखिएगा मुख्यमंत्री तो 'थलाइवा' (स्टालिन) ही बनेंगे।

थेवर कम्युनिटी की शशिकला का मंदिर दौरा

थेवर कम्युनिटी की शशिकला का पहले पार्टी से निष्कासन, फिर उनके संन्यास से भी थेवर अन्नाद्रमुक गठबंधन से दूर हुए हैं। पिछले 10 दिनों में वे दर्शन के लिए दक्षिण तमिलनाडु के कई मंदिरों में देखी गईं। इस दौरान एएमएमके कैडर के स्वागत ने, अन्नाद्रमुक के माथे पर चिंता की लकीरें डाल दी हैं। गौरतलब है कि अन्नाद्रमुक से अलग हुए एएमएमके प्रमुख दिनाकरण चेन्नई छोड़ दक्षिण के ही कोविलपट्टू से चुनाव लड़ रहे हैं।

MGR-जयललिता के मंदिर में मोदी-शाह

मदुरै में एम्स प्रोजेक्ट की देरी को DMK मुद्दा बना रही है। चुनाव प्रचार में प्रत्याशी शिलान्यास की ईंट दिखाकर उसे मोदी द्वारा किए गए शिलान्यास वाला एम्स कहते हैं।
मदुरै में एम्स प्रोजेक्ट की देरी को DMK मुद्दा बना रही है। चुनाव प्रचार में प्रत्याशी शिलान्यास की ईंट दिखाकर उसे मोदी द्वारा किए गए शिलान्यास वाला एम्स कहते हैं।

अन्नाद्रमुक के मंत्री उदय कुमार ने मदुरै से 50 किलोमीटर दूर थिरुमंगलम में जयललिता और MGR का भव्य मंदिर बनवाया है। 12 एकड़ में फैले इस मंदिर में 300 गायें भी हैं। इसी के मंडप में दूसरे नेताओं के साथ मोदी-शाह की फोटो भी लगी है और निर्मला सीतारमण की भी। इस पर विवाद के सुर भी उठने लगे हैं। विरोधी पार्टियां इसे ईपीएस सरकार की केंद्र से गुलामी के आरोप के रूप में, असरदार ढंग से इस्तेमाल कर रही हैं। हालांकि मंत्री उदय कुमार कहते हैं- इसमें कुछ भी गलत नहीं, भाजपा हमारी सहयोगी जो है।

मदुरै एम्स की ईंट से हो रहा प्रचार

मदुरै में एम्स प्रोजेक्ट में देरी को भी DMK बड़ा मुद्दा बना रही है। उदय निधि स्टालिन और दूसरे नेता प्रचार के दौरान अक्सर हाथ में एक ईंट लेकर, उसे एम्स की शिलान्यास की ईंट बताते दिख जाते हैं। एक कार्टून की भी बहुत चर्चा है। हालांकि व्यापार के सिलसिले में अक्सर मदुरै आने वाले विजय कुमार कहते हैं कि लोग इस प्रोजेक्ट से खुश और उत्साहित हैं, यह आम भावना है कि एम्स से मदुरै ही नहीं, दक्षिण तमिलनाडु की दशा और दिशा भी बदलेगी। आसपास के कई नए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स खुद इसकी गवाही दे रहे हैं।

DMK कैंडिडेट कर रहे PM से प्रचार की अपील

इस बार DMK के प्रत्याशी ट्विटर पर पोस्ट कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी उनके खिलाफ रैली करें। वे दावा कर रहे हैं कि इससे उनका वोट बढ़ेगा।
इस बार DMK के प्रत्याशी ट्विटर पर पोस्ट कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी उनके खिलाफ रैली करें। वे दावा कर रहे हैं कि इससे उनका वोट बढ़ेगा।

प्रधानमंत्री की मदुरै-कन्याकुमारी यात्रा के दौरान इस बार 'गो बैक मोदी' तो ट्रेंड नहीं हुआ, लेकिन DMK प्रत्याशियों की उनके क्षेत्र में आकर प्रचार करने के ट्वीट खूब चर्चा में रहे। शुरुआत कद्दावर मंत्री वेलुमनी के कोयंबटूर क्षेत्र के DMK प्रत्याशी ने की। उन्होंने PM से अपील की कि कृपया उनके क्षेत्र में विरोधी के लिए प्रचार करें, ताकि वह ज्यादा मतों से जीत सके।

इसके बाद सोशल मीडिया पर इस व्यंग्यात्मक अपील का सिलसिला-सा चल पड़ा। कन्याकुमारी के होटल व्यवसाई जना कुमार कहते हैं, "भले ही यह व्यंग में की गई अपील हो, लेकिन मैं जिस तरह लोगों की भावनाएं देखता हूं, उसके चलते यह कड़वी सच्चाई भी है।" बता दें कि भाजपा के दक्षिण में पहले सांसद पूर्व मंत्री राधाकृष्णन, कन्याकुमारी से ही थे। वे उपचुनाव में कांग्रेस के सामने नौवीं बार भाग्य आजमा रहे हैं।

दक्षिण से जीतने वाले 6 बार मुख्यमंत्री

MGR और जयललिता दक्षिण तमिलनाडु से तीन-तीन बार जीते। इस बार भी क्षेत्र से कई बड़े नेता-मंत्री का भविष्य दांव पर है। इसमें उपमुख्यमंत्री ओ पनीरसेलवम, मंत्री डिंडीगुल श्रीनिवासन, उदय कुमार, सुंदरम, दिनाकरण और कन्याकुमारी से भाजपा के राधाकृष्णन जैसे नाम शामिल हैं।

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