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हुगली की 8 सीटों से ग्राउंड रिपोर्ट:अपने दुर्ग में ही कमजोर पड़ रही है TMC; धुव्रीकरण का मुद्दा गांवों तक पहुंचा, लोग दीदी से खुश तो हैं लेकिन करप्शन से नाराज

हुगली6 महीने पहलेलेखक: अक्षय बाजपेयी
6 अप्रैल को तीसरे चरण में हुगली-आरामबाग की आठ सीटों जंगीपाड़ा, हरिपाल, धनियाखाली, तारकेश्वर, पुरसुरा, आरामबाग, गोघाट और खानाकुल में वोटिंग होनी है।

बंगला निजेर मयेके छै' यानी 'बंगाल को अपनी बेटी ही चाहिए' का नारा टीएमसी के गढ़ रहे हुगली में ही फीका पड़ता दिख रहा है। 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले तक हुगली टीएमसी का गढ़ थी, लेकिन लोकसभा में बीजेपी ने न सिर्फ टीएमसी के इस दुर्ग को भेद दिया बल्कि हुगली लोकसभा सीट भी जीत ली और हुगली जिले में आने वाली आरामबाग लोकसभा सीट पर टीएमसी को कड़ी टक्कर दी। 6 अप्रैल को तीसरे चरण में हुगली-आरामबाग की आठ सीटों जंगीपाड़ा, हरिपाल, धनियाखाली, तारकेश्वर, पुरसुरा, आरामबाग, गोघाट और खानाकुल में वोटिंग होनी है।

इन सीटों पर बीजेपी के 'आशोल परिवर्तन' का अच्छा खासा असर नजर आ रहा है, क्योंकि ध्रुवीकरण गांवों तक पहुंच गया है। हुगली के सीनियर जर्नलिस्ट दीप्तिमान मुखर्जी के मुताबिक, हरिपाल, आरामबाग, तारकेश्वर और गोघाट सीट पर बीजेपी की जीत तय दिख रही है। बाकी की चार सीटों पर भी बीजेपी जीत सकती है, क्योंकि कहीं टीएमसी के स्थानीय संगठन में अंतर्कलह है तो कहीं पूरा संगठन ही बीजेपी में शामिल हो गया है। 2019 तक भी बीजेपी का इन जिलों में कोई मजबूत संगठन नहीं था, लेकिन उसके बाद टीएमसी और लेफ्ट के नेता बड़ी संख्या में बीजेपी में शामिल हुए और देखते ही देखते पार्टी जमीन पर मजबूत हो गई।

जहां मुस्लिम ज्यादा, वहां भी बीजेपी मजबूत

तस्वीर फुरफुरा शरीफ की है जहां मुस्लिम धर्मगुरु चर्चा कर रहे हैं। इलाके के मुस्लिम समुदाय के लोग यहां मार्गदर्शन के लिए आते हैं।
तस्वीर फुरफुरा शरीफ की है जहां मुस्लिम धर्मगुरु चर्चा कर रहे हैं। इलाके के मुस्लिम समुदाय के लोग यहां मार्गदर्शन के लिए आते हैं।

जिन सीटों पर मुस्लिम आबादी ज्यादा है, वहां भी बीजेपी मजबूत स्थिति में दिख रही है क्योंकि मुस्लिम वोट टीएमसी और संयुक्त मोर्चा के बीच बंटते दिख रहे हैं। बीजेपी हिंदुओं को सुरक्षित और मजबूत करने का नारा दे रही है इसलिए हिंदु वोट भगवा पार्टी के लिए लामबंद होते दिख रहे हैं। दो लाख साठ हजार वोटर्स वाली खानकुल सीट में करीब 54 हजार मुस्लिम मतदाता हैं। 2011 से ही ये टीएमसी के लिए एकतरफा वोट करते रहे हैं। टीएमसी ने यहां 2016 में इकबाल अहमद को उतारा था, लेकिन इस बार मुंशी नजबुल करीम को उम्मीदवार बनाया है।

बीजेपी की तरफ से सुशांत घोष मैदान में हैं। खानकुल के नीरज पांडे कहते हैं, हम डर और दहशत में जी रहे हैं क्योंकि यहां टीएमसी से जुड़े एक मुस्लिम कार्यकर्ता की मौत हो गई थी। टीएमसी ने इसका आरोप बीजेपी पर लगाया और 31 मार्च को जमकर तोड़फोड़ की। स्थानीय शैलेंद्र सिंह कहते हैं, खानकुल में जितने भी प्रधान हैं, सबने कोलकाता-बांकुड़ा में जमीनें खरीद लीं और बंदूक की दम पर वोटिंग करवाई। लेकिन इस बार बीजेपी यहां जीत जाएगी क्योंकि लोग बिना डरे वोटिंग कर पाएंगे। टीएमसी कार्यकर्ता हराधन कहते हैं, दीदी ने पुल-पुलिया बनाए हैं, इसलिए वहीं जीतेंगी।

जंगीपाड़ा में त्रिकोणीय चुनाव, लेकिन टीएमसी मजबूत

जंगीपाड़ा विधानसभा में बीजेपी और टीएमसी के साथ ही संयुक्त मोर्चा भी टक्कर में दिख रहा है। बीजेपी ने यहां से देबजीत सरकार को उम्मीदवार बनाया है। देबजीत लोकसभा में भी बीजेपी के कैंडिडेट थे लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। जंगीपाड़ा मुस्लिम बहुल इलाका है। यहां 30 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम आबादी है। यहीं फुरफुरा शरीफ है, जिसके पीरजादा अब्बास सिद्दीकी ने आईएसएफ नाम की पार्टी बनाई है।

तस्वीर फुरफुरा शरीफ स्थित मजार की है। इसके पीरजादा अब्बास सिद्दीकी ने आईएसएफ नाम की पार्टी बनाई है।
तस्वीर फुरफुरा शरीफ स्थित मजार की है। इसके पीरजादा अब्बास सिद्दीकी ने आईएसएफ नाम की पार्टी बनाई है।

टीएमसी ने यहां से स्नेहासि चक्रवर्ती को उम्मीदवार बनाया है। यहां भी मुस्लिम वोट टीएमसी और आईएसएफ के बीच बंटते दिख रहे हैं। स्थानीय लोग दीदी के काम से खुश हैं, लेकिन लोकल लीडर्स के करप्शन से परेशान हैं। इसके बावजूद वे दीदी को सपोर्ट भी करते दिख रहे हैं। देवाशीष सिंघाराय कहते हैं, पहले की सरकार ने काटमनी बहुत ली। सौ दिन में काम नहीं मिला और अम्फान में भ्रष्टाचार किया इसलिए ये सीट बीजेपी जीतेगी।

आरामबाग से भीतरी-बाहरी बना मुद्दा

आरामबाग सीट में बीजेपी लोकसभा चुनाव में आगे थी। टीएमसी ने यहां से सुजाता मंडल को मैदान में उतारा है। वे बीजेपी सांसद सौमित्र खान की पत्नी थीं लेकिन उनके टीएमसी में शामिल होते ही सौमित्र ने उन्हें तलाक दे दिया। बीजेपी यहां भीतरी-बाहरी को मुद्दा बना रही है। बीजेपी कैंडिडेट मधुसूदन बाग कहते हैं, मैं आरामबाग का ही हूं, लेकिन सुजाता मंडल विष्णुपुर की हैं इसलिए लोग मुझे वोट देंगे। स्थानीय फिजुल इस्लाम कहते हैं, बीजेपी आई तो यहां हिंदु-मुस्लिम में दंगे होंगे। मीट पर भी पाबंदी लग जाएगी इसलिए यहां के लोग टीएमसी को ही जिताएंगे। वहीं संगीता शाहा कहती हैं, टीएमसी की दुर्नीति ही आरामबाग में आशोल परिवर्तन करेगी।

स्थानीय लोग दीदी के काम से खुश हैं लेकिन लोकल लीडर्स के करप्शन से परेशान हैं। वे कहते हैं कि यहां हर काम के लिए कमीशन देना पड़ता है।
स्थानीय लोग दीदी के काम से खुश हैं लेकिन लोकल लीडर्स के करप्शन से परेशान हैं। वे कहते हैं कि यहां हर काम के लिए कमीशन देना पड़ता है।

तारकेश्वर से बीजेपी ने राज्यसभा के पूर्व सांसद और पद्म भूषण स्वपन दासगुप्ता को कैंडिडेट बनाया है। तारकेश्वर कभी लेफ्ट का गढ़ हुआ करता था, लेकिन लेफ्ट के स्थानीय नेता बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। तारकेश्वर आरामबाग लोकसभा सीट में आता है। बीजेपी 2019 में आरामबाग लोकसभा सीट हारी थी लेकिन पार्टी ने तारकेश्वर और हरिपाल विधानसभा में लीड ली थी। यहां टीएमसी के कमजोर होने की दूसरी वजह पार्टी की अंतर्कलह है। धनियाखाली विधानसभा 2011 से यहां टीएमसी जीतती आ रही है।

टीएमसी ने इस बार भी अपने मौजूदा विधायक असीमा पात्रा को कैंडिडेट बनाया है लेकिन लोग उनसे खुश नहीं दिख रहे। स्थानीय लोगों का कहना है, वे समस्याएं हल नहीं करते। लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने इस सीट पर भी बढ़त बनाई थी। मुखर्जी के मुताबिक, पुरसुरा में टीएमसी के पूर्व विधायक अपनी पूरी फौज के साथ चुनाव के पहले ही बीजेपी में आ चुके हैं इसलिए यहां भगवा पार्टी का मजबूत संगठन खड़ा हो गया। कमोबेश यही हाल गोघाट में भी हैं। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि, इन सीटों पर 80 फीसदी से ज्यादा वोटिंग हुई तो बीजेपी को फायदा होना तय है। कम वोटिंग हुई तो टीएमसी अपनी जीत बरकरार रख पाएगी।

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