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बंगाल चुनाव 2021:BJP-TMC के दावों के बीच अब ये बात भी जोर पकड़ रही है कि कहीं बंगाल के नतीजे त्रिशंकु तो नहीं होंगे

कोलकाता21 दिन पहलेलेखक: अमरेंद्र कुमार
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बंगाल में हर चरण के साथ चुनावी माहौल और भी ज्यादा गर्म होता जा रहा है। कौन जीतेगा, किसकी सरकार बनेगी...इसका आकलन न तो अभी चुनावी गुणा-गणित के एक्सपर्ट कर पा रहे हैं और न ही चुनावी अटकलबाज। आजादी के बाद से कांग्रेस, लेफ्ट फ्रंट और पिछले 10 साल से तृणमूल को सत्ता देने वाले बंगाल की गलियों में अब एक चर्चा यह भी जोर पकड़ रही है कि नतीजे कहीं त्रिशंकु विधानसभा न बना दें। इस चर्चा का आधार यह माना जा रहा है कि बाकी के चार चरणों की सीटों पर जहां TMC को मजबूत माना जा रहा था, वहां भी अधिकतर सीटों पर भाजपा कांटे की टक्कर दे रही है। ऐसे में सूत बराबर का फर्क भी दलों को सत्ता के जादुई आंकड़े से दूर कर सकता है। ऐसा हुआ तो असल राजनीतिक उठापटक चुनाव के बाद ही देखने को मिलेगी।

दोस्ती-दुश्मनी चुनाव नतीजों के बाद ही तय होगी

ऐसा भी नहीं है कि इस स्थिति से राजनीतिक दल अनजान हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद चुनावी भाषण में लोगों से अपील कर चुकी हैं कि वे ज्यादा से ज्यादा मतदान करें क्योंकि तृणमूल की सीटें 200 से कम रहीं (पिछली बार तृणमूल को 211 सीटें मिली थीं) तो भाजपा जोड़-तोड़कर सरकार बना लेगी। उनका इशारा मध्य प्रदेश में सत्ता परिवर्तन और महाराष्ट्र में चुनाव बाद के राजनीतिक ड्रामे की ओर है। मगर तृणमूल खुद भी जोड़तोड़ से परहेज नहीं करेगी। TMC छोड़ भाजपा में जाने वालों को ममता भले खुले मंच से कोस रही हों, लेकिन पार्टी के मैनेजरों की कतार अब कहने लगी है कि दोस्ती-दुश्मनी चुनाव नतीजों के बाद ही तय होगी।

पश्चिम बंगाल में अभी चुनाव के चार चरण बाकी हैं। हालांकि इन चरणों में तस्वीर पिछले चरणों की तुलना में कुछ अलग हो सकती है। एक तरफ TMC चौथे चरण के मतदान के दिन फायरिंग में चार लोगों की बूथ पर मौत का फायदा उठाने में जुटी है। वहीं दूसरी तरफ इस घटना के बहाने मुस्लिम वोटों में आ रहे बिखराव को वह फिर एकजुट करने की कोशिश में भी है। लेकिन उसकी इस कोशिश का एक दूसरा पहलू ये भी है कि इससे होने वाले ध्रुवीकरण का फायदा भाजपा को मिल जाए।

अब कोरोना की चिंता लोगों को सताने लगी है

पहले दो चरणों में मतदान 80% से ऊपर रहा तो तीसरे और चौथे चरण में भी मतदान 75% के ऊपर गया। मगर अब शेष 4 चरणों में मतदान प्रतिशत कम रहने की आशंका है। राज्य में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और इसका असर लोगों की दिनचर्या पर दिखने लगा है। कोलकाता के रेसकोर्स, पार्क स्ट्रीट और हॉर्टिकल्चर मैदान जैसे इलाकों में सुबह-शाम वॉक करने वालों की संख्या अब नगण्य हो गई है। छठे-सातवें चरण तक अगर संक्रमण की रफ्तार बढ़ी तो लोगों का मतदान के लिए घर से निकलना मुश्किल ही होगा।

हालांकि लोगों का मतदान के लिए न निकलना फॉल्स वोटिंग बढ़ा सकता है। इसमें जिसका बाहुबल चल गया, वह आगे निकल सकता है। यहां चुनाव कराने आए एक पर्यवेक्षक की टिप्पणी भी माहौल के आकलन के लिए काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि यहां तो बंगाल पुलिस TMC के लिए काम कर रही है और केंद्रीय अर्ध सैनिक बल लगता है कि भाजपा के लिए काम कर रहा है।

आखिरकार मन की बात बाहर आ ही जाती है

माहौल की ये अनिश्चितता आम लोगों से बातचीत में भी झलकती है। आपको हर इलाके में भाजपा और तृणमूल दोनों के समर्थक मिल जाएंगे। हालांकि पहली बातचीत में कोई भी तृणमूल के खिलाफ कुछ नहीं बोलता, लेकिन बातें लंबी खिंचे तो मन की बात बाहर आ जाती है। बैरकपुर विधानसभा क्षेत्र के नोना चंद्रपुकुर के 65 वर्षीय गौतम चंद्र कहते हैं- 50 साल की राजनीति में यहां आम लोगों को कुछ नहीं मिला। TMC को टक्कर दे रही भाजपा को भी एक बार परख ही लेना चाहिए। जबकि इसी क्षेत्र के गांधी घाट के समीप रह रहे गोपाल साहू कहते हैं कि गरीबों का ध्यान रखने वाली ममता बनर्जी को सत्ता में लौटना चाहिए।

कोलकाता के बड़ानगर की नेताजी कॉलोनी में रहने वाले आशीष सेनगुप्ता का कहना है कि लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के खिलाफ कोई चेहरा नहीं था, इसीलिए पूरे देश की तरह बंगाल में भी उन्हें समर्थन मिला। मगर विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी के खिलाफ कोई चेहरा नहीं है, इसलिए वह भारी पड़ रही हैं।

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