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दिल्ली चुनाव / आप, भाजपा और कांग्रेस दफ्तरों के करीब रोजी कमाने वालों की जुबानी सियासत के तीन अनुभव

Arvind Kejriwal Manoj Tiwari | Delhi Election Result AAP BJP Congress Party Head Office Latest Report Updates On Arvind Kejriwal Aam Aadmi Party (AAP) Office Bharatiya Janata Party (Head Office)
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Arvind Kejriwal Manoj Tiwari | Delhi Election Result AAP BJP Congress Party Head Office Latest Report Updates On Arvind Kejriwal Aam Aadmi Party (AAP) Office Bharatiya Janata Party (Head Office)

  • दिल्ली चुनाव के नतीजे आए तो आप के दफ्तर में जश्न, भाजपा के ऑफिस में मायूसी और कांग्रेस दफ्तर में सन्नाटा दिखा
  • इन दफ्तरों के आसपास कुछ ठेले वाले और चौकीदार मिले, इन्होंने बताया कि पहले यहां क्या माहौल होता था

शिव ठाकुर

शिव ठाकुर

Feb 12, 2020, 12:39 PM IST

नई दिल्ली. दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 के नतीजे सामने हैं। 70 में से 62 सीटें जीतकर आम आदमी पार्टी (आप) फिर सरकार बनाने जा रही है। 16 फरवरी को अरविंद केजरीवाल लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। भाजपा हाथ मलते रह गई। तमाम मशक्कत के बाद उसे 8 सीटें ही मिलीं। कांग्रेस शून्य पर थी और वहीं रही। बहरहाल, नतीजों की गहमागहमी के बीच हमने इन तीनों ही पार्टियों के दफ्तरों के करीब आजीविका कमाने वाले कुछ लोगों से बातचीत की। उनसे जानना चाहा कि चुनाव या नतीजों के पहले यहां कैसा माहौल रहता था। कार्यकर्ता क्या बातचीत करते थे। और सियासत के कौन से रंग उन्होंने यहां अनुभव किए। यहां पेश है एक रोचक रिपोर्ट।

एक महीने में जो हलचल आप के दफ्तर में हुई, वैसी पहले कांग्रेस ऑफिस में रहा करती थी...
अताउल अंसारी जिंदगी के करीब 55 बसंत देख चुके हैं। आप के दफ्तर के करीब एक बड़ी बिल्डिंग में 19 साल से चौकीदार हैं। बदलते सियासी मिजाज को नजदीक से देखा है। बड़े आत्मीय अंदाज में कहते हैं, “वक्त बदल गया है साहब। आज जो भीड़ आप के दफ्तर में दिख रही है न। वो कभी कांग्रेस के ऑफिस में हुआ करती थी। रोजाना हजारों कार्यकर्ताओं का मजमा लगता था। जहां केजरीवाल का ऑफिस है, वहां पहले कांग्रेस के एक नेता रहा करते थे। अब उन नेता की जगह केजरीवाल आ गए हैं। और कांग्रेस को आप ने जैसे हटा ही दिया है। कांग्रेस को अब कोई नहीं पूछता। आप के आने का सबसे बड़ा नुकसान कांग्रेस को ही तो हुआ।” 

भाजपा कार्यकर्ता जानते थे कि उनकी सरकार नहीं बनेगी...
श्रीलाल चंद को ठेले पर फल बेचते 40 साल गुजर गए। उनके फलों की तरह जुबान भी मीठी और रसीली है। भाजपा स्टेट ऑफिस से तकरीबन 100 मीटर दूर ठेला थामे श्रीलाल कुछ अंदरूनी कहानी बताते हैं। कहते हैं, “भाजपा कार्यकर्ता जानते थे कि उन्हें ज्यादा से ज्यादा 30 सीटें मिलेंगी। यहां वो अकसर बातचीत करते थे। उन्हें मालूम था कि उनकी सरकार नहीं बनेगी। लेकिन, इतनी करारी शिकस्त का अंदाजा तो किसी को नहीं था। पहले हमारे ठेले पर मनोज तिवारी भी आते थे। अब बड़ी जिम्मेदारी मिली तो नहीं आ पाते।” कुछ दूरी पर मुस्तफा जैकेट बेच रहे हैं। दिल्ली का मौसम अब भी सर्द है, नतीजे आए तो सियासत भी ठंडी होने लगी। मुस्तफा कहते हैं, “चुनाव में हार-जीत तो चलती रहती है। भाजपा वालों ने बहुत मेहनत की। लेकिन, नतीजे मायूस करने वाले हैं। कुछ कार्यकर्ता यहां रोज आते हैं। जरूरत पड़ने पर मेरी मदद भी करते हैं। अब बाहर के लोग यहां ज्यादा दिखते हैं।” 

शीला दीक्षित के बाद कांग्रेस दफ्तर बेरौनक हो गया
पंडित दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर आप के ठीक सामने कांग्रेस का दफ्तर। विनोद गुप्ता 9 साल से यहां नमकीन का ठेला लगा रहे हैं। नमकीन के चटपटे स्वाद की तरह उनकी स्मृतियां भी हैं। गुप्ता कहते हैं, “जब शीला दीक्षित थीं तो कांग्रेस ऑफिस में बहुत रौनक होती थी। खाने-पीने की व्यवस्था रहती थी। अब ये सब नहीं होता। रही सही कसर आप ने पूरी कर दी। अब तो यहां कभी कभार ही और बहुत कम लोग दिखाई देते हैं। कांग्रेस के वक्त महंगाई भी बहुत थी। केजरीवाल ने गरीबों के लिए काफी काम किया।” 

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