ग्राउंड रिपोर्ट / अलवर, सीकर, झुंझुनूं करीबी मुकाबले में फंसीं, चूरू में मोदी फैक्टर हावी



प्रचार में कांग्रेस प्रत्याशी श्रवण कुमार विधानसभा चुनाव में हार की दुहाई दे इस बार जिताने की अपील कर रहेे हैं। इस बीच कई बार वोटरों के घर ही भोजन भी हो जाता है। प्रचार में कांग्रेस प्रत्याशी श्रवण कुमार विधानसभा चुनाव में हार की दुहाई दे इस बार जिताने की अपील कर रहेे हैं। इस बीच कई बार वोटरों के घर ही भोजन भी हो जाता है।
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प्रचार में कांग्रेस प्रत्याशी श्रवण कुमार विधानसभा चुनाव में हार की दुहाई दे इस बार जिताने की अपील कर रहेे हैं। इस बीच कई बार वोटरों के घर ही भोजन भी हो जाता है।प्रचार में कांग्रेस प्रत्याशी श्रवण कुमार विधानसभा चुनाव में हार की दुहाई दे इस बार जिताने की अपील कर रहेे हैं। इस बीच कई बार वोटरों के घर ही भोजन भी हो जाता है।

  • इन चारों लोकसभा सीटों पर 6 मई को मतदान होना है
  • भाजपा के लिए भितरघात को रोकना बड़ी चुनौती

Dainik Bhaskar

May 01, 2019, 10:48 PM IST

जयपुर संभाग की अलवर, सीकर और झुंझुनूं तीनों लोकसभा सीटें कड़े मुकाबले में फंसी दिख रही हैं। वहीं बीकानेर संभाग की चूरू सीट पर भी कड़ी टक्कर है। इन चारों लोकसभा सीटों पर 6 मई को मतदान है।

 

अलवर : जितेंद्र सिंह Vs बाबा बालकनाथ

 

भाजपा-कांग्रेस 3-3 विस सीटों पर मजबूत, 2 फंसीं

 

जमीनी हकीकत : 2009 में कांग्रेस के जितेंद्र सिंह चुनाव जीते थे तब यहां चुनाव यादव बनाम गैर यादव बन गया था, इस कारण सीट आसानी से निकली थी। इस बार भाजपा प्रत्याशी बाबा बालकनाथ, यादव जाति से हैं और मोदी समर्थक भी पूरी ताकत से जुटें हैं। कांग्रेस विकास पर बात कर रही है तो भाजपा देश की सुरक्षा पर।

 

किसका पलड़ा भारी : बहरोड और मुंडावर में भाजपा की एकतरफा बड़ी जीत हो सकती है। किशनगढ़बास में भी भाजपा आगे रह सकती है तो राजगढ़ व अलवर ग्रामीण में कांग्रेस अच्छी बढ़त ले सकती है। तिजारा में भी आगे रह सकती है। रामगढ़ और अलवर शहर कड़े मुकाबले पर खड़े हैं। 

 

जीत का फॉर्मूला : कांग्रेस विकास और पढ़ा लिखा प्रतिनिधि होने का प्रचार कर रही है, अगर ये बात लोगों के गले उतरी तो जीत सकते हैं। वहीं, भाजपा लगातार विकास के साथ-साथ देश की सुरक्षा की भी बात कर रही है। यह फैक्टर आम लोगों को भा रहा है, अगर यह नहीं बदला तो भाजपा प्रत्याशी संसद में जा सकता है।

 

सीकर : सुमेधानंद Vs सुभाष महरिया

 

4 विस सीटों पर भाजपा और 3 जगह कांग्रेस ताकतवर है

 

जमीनी हकीकत : मुद्दे और वादों पर कोई चर्चा नहीं हो रही है। खास बात यह है कि विकास का मुद्दा लगभग खत्म हो गया है, जबकि सीकर में छोटी-छोटी समस्याओं पर बड़े आंदोलन होते रहे हैं। लेकिन इस बार यहां दोनों दलों ने जातिगत समीकरणों को अपने पक्ष में बनाने के लिए ताकत लगा रखी है।

 

किसका पलड़ा भारी : पहले यह सीट कांग्रेस के लिए मजबूत मानी जा रही थी, पर अब दोनों दलों में कड़ा संघर्ष दिख रहा है। दांतारामगढ़, श्रीमाधोपुर, खंडेला, नीमकाथाना में भाजपा का पलड़ा थोड़ा भारी है। सीकर, चौमूं और लक्ष्मणगढ़ में कांग्रेस कुछ हद तक मजबूत है। धोद में माकपा निर्णायक साबित हो सकती है।

 

जीत का फॉर्मूला : भाजपा के सामने घर से वोटर को निकालने की बड़ी चुनौती है, क्योंकि सांसद का पार्टी कार्यकर्ताओं से जुड़ाव सीमित रहा है। उधर, कांग्रेस भितरघात को जितना रोक लेगी उसे उतना ही फायदा मिलेगा। जातिगत मतों और युवाओं को अपने पक्ष में करने की चुनौती से पार पा लिया तो स्थिति मजबूत हो सकती है।

 

झुंझुनूं : नरेंद्र खीचड़ Vs श्रवण कुमार

 

2-2 विस सीटों पर भाजपा व कांग्रेस मजबूत, 4 फंसीं

 

जमीनी हकीकत : जवानों-किसानों के लिए विख्यात इस इलाके में देशभक्ति और मोदी लहर के बीच जातिवाद और सहानुभूति का माहौल भी दिखाई दे रहा है। दोनों ही पार्टियों में भितरघात से मतदाता किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देने से बच रहा है। मुद्दे पर कोई बात नहीं हो रही है। यहां गहलोत व वसुंधरा राजे की प्रतिष्ठा दांव पर है।

 

किसका पलड़ा भारी : खेतड़ी और उदयपुरवाटी में कांग्रेस मजबूत दिख रही है। पिलानी और फतेहपुर में भाजपा अागे दिखती है। झुंझुनूं, सूरजगढ़, नवलगढ़ और मंडावा में दोनों पार्टियों में कांटे की टक्कर है। कांग्रेस पूरी ताकत से डोर टु डोर प्रचार में जुटी है। जबकि भाजपा जीत के प्रति आश्वस्त है, ज्यादा ताकत नहीं झोंक रही।

 

जीत का फॉर्मूला : यहां 3 फॉर्मूले काम करेंगे। पहला-दोनों दल बड़े स्तर पर भितरघात से निपटें। दूसरा-भाजपा को उदयपुवाटी, मंडावा व झुंझुनूं में जातिगत वोट हासिल करने होंगे। तीसरा- नवलगढ़ व झुंझुनूं विधायक को व्यक्तिगत वोट मिले तो कांग्रेस मजबूत होगी। फतेहपुर में ज्यादा वोटिंग फायदेमंद हो सकती है।

 

चूरू : राहुल कस्वा Vs रफीक मंडेलिया

 

5 सीटों पर भाजपा और 4 ही सीटों पर कांग्रेस आगे

 

जमीनी हकीकत : स्थानीय मुद्दे और विकास की बातें गायब हैं। भाजपा के राहुल कस्वा मोदी फैक्टर, हिंदुत्व व देशभक्ति की लहर बनाने में जुटे हैं। कांग्रेस के रफीक मंडेलिया सभी जातियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का नारा दे रहे हैं। यहां के पांचों विधायक मुख्यमंत्री की ‘मंत्री योजना’ से प्रभावित होकर तैयारी से जुटे हैं।

 

किसका पलड़ा भारी : नोहर, भादरा, तारानगर, सरदारशहर व सादुलपुर में भाजपा आगे दिखाई दे रही है। चूरू, रतनगढ़ व सुजानगढ़ में कांग्रेस मजबूत स्थिति में है। भाजपा को भितरघात का खतरा है। कांग्रेस में ऐसा खतरा नहीं दिख रहा। चूरू के वर्तमान विधायक राजेंद्र राठौड़ सहित चार पूर्व विधायक कस्वा के खिलाफ हैं।

 

जीत का फॉर्मूला : यदि भाजपा भितरघात रोकने में कामयाब रही तो स्थिति पक्ष में हाे सकती है। उधर, कांग्रेस के लिए परंपरागत वोट बैंक में सेंध रोकना बड़ी चुनौती रहेगी। मोदी लहर व जातिवाद के माहौल में जितने अधिक वोट तोड़ेगी फायदा होगा। साथ ही, यदि विधानसभा चुनाव जैसी वोटिंग हुई तो कड़ी टक्कर होगी।

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