एनडीए की बैठक / मोदी की सांसदों को नसीहत- बड़बोलेपन से बचें, इससे हमारी परेशानी बढ़ती है



NDA Meeting: Narendra Modi at Parliament advice newly Elected NDA Mps
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NDA Meeting: Narendra Modi at Parliament advice newly Elected NDA Mps

  • एनडीए की बैठक में मोदी ने कहा- कुछ लोग जब तक राष्ट्र के नाम संदेश नहीं देते, उन्हें चैन नहीं पड़ता
  • मोदी ने नए सांसदों से कहा- देश को वीआईपी कल्चर से नफरत है, इससे बचें

May 25, 2019, 10:16 PM IST

नई दिल्ली. संसद के सेंट्रल हॉल में शनिवार को एनडीए की बैठक के दौरान नरेंद्र मोदी ने नवनिर्वाचित सांसदों को नसीहत दी। मोदी ने कहा कि सांसद बड़बोलेपन से बचें, क्योंकि इससे हमारी परेशानी बढ़ती है। उन्होंने कहा कि वीआईपी कल्चर से भी बचें, क्योंकि देश को इससे नफरत है। 


मोदी की सांसदों को नसीहतें

 

"सेवाभाव प्रबल करें, सत्ताभाव को मिटाएं"
मोदी ने सांसदों से कहा- भारत का लोकतंत्र और मतदाता लगातार समझदार हो रहे हैं। सत्ता और सत्ता का रुतबा भारत के मतदाता को कभी प्रभावित नहीं कर पाया। मतदाता को सत्ताभाव को स्वीकार नहीं करता है, कभी नहीं पचा पाता है। जनता ने हमें सेवाभाव के कारण ही स्वीकार किया है। सत्ताभाव से अलिप्त रहने के लिए हमें प्रयास करना होगा। जितना प्रबल सेवाभाव होगा, सत्ताभाव सिमटता जाएगा। 

 

"जनता की आशाओं के अनुसार खुद को ढालें"
उन्होंने कहा- 2019 के चुनाव ने दिलों को जोड़ने का काम किया है। ये चुनाव सामाजिक एकता का आंदोलन बन गया। समता भी, ममता भी। समता और ममता से चुनाव को नई ऊंचाई मिलीं। हम इसके साक्षी हैं। रचयिता हैं, इसका दावा नहीं करते। साक्षी भाव से इन चीजों को देखेंगे और समझेंगे तो जन सामान्य की आशा-अपेक्षाओं के अनुसार हम अपने जीवन को ढाल पाएंगे।

 

"छपास और दिखास से बचें और दूसरों को भी बचाएं"
"बड़बोलापन होता है। टीवी के सामने कुछ भी बोल देते हैं। कुछ लोग सुबह उठकर जब तक राष्ट्र के नाम संदेश नहीं देते हैं, उन्हें चैन नहीं पड़ता। मीडिया को भी पता होता है कि 6 नमूने हैं। इनके गेट के सामने पहुंच जाओ कुछ ना कुछ बोलेंगे ही। आपको इससे बचना चाहिए। अटल-आडवाणी कहते थे कि छपास और दिखास से बचना चाहिए। खुद को भी बचा सकते हैं और दूसरों को भी बचा सकते हैं। आप सोचेंगे कि देश देखेगा। भ्रम में ना रहें, शुरू में ये खींचता है और बाद में हम इसके शिकार हो जाते हैं। हम जितना इन चीजों से बच सकते हैं, बचें।'

 

"अपनी वाणी, व्यवहार और वर्तनी को संभालें"
मोदी ने कहा- कभी-कभी लोग ऑफ द रिकॉर्ड बात करने आते हैं। ऐसा कुछ नहीं होता है। पता नहीं किसके पास कौन सा इंस्ट्रूमेंट हो। आप इन सब चीजों से बचें। एक बहुत बड़ा वर्ग है, जिसे 70 साल किसी और ने पाला है। ये हमें क्यों स्वीकार करेंगे? उनका तो कारोबार है। हमें संभलना होगा। वाणी, व्यवहार, वर्तनी से हमें संभलना होगा।

 

"अहंकार से जितना दूर रह सकते हैं रहें"
"हमारे भीतर का कार्यकर्ता जिंदा रहना चाहिए। थोड़ा सा भी अहंकार अपने आसपास से सबको दूर कर देता है। अहंकार को जितना दूर रख सकते हैं, रखना चाहिए। अभी तो हमें लगता है कि पार्टी ने जिता दिया, लोगों ने मेहनत की। कुछ समय बाद ये अहसास आ जात है कि ये तो मेरी ताकत थी, लोकप्रियता थी, मुझे तो जीतना ही था। ऐसा दिन भी आ जाएगा, इसमें देर नहीं लगती।"

 

"हम जो हैं, वो मोदी के कारण नहीं; जनता के कारण हैं"
उन्होंने कहा- हम अपनी हैसियत से जीतकर नहीं आते। हमें कोई वर्ग, जाति या समुदाय नहीं जिताता है। हमें सिर्फ और सिर्फ देश की जनता जिताती है। हम जो कुछ भी हैं, मोदी के कारण नहीं.. जनता-जनार्दन के कारण हैं। हमें जन-आदेश मिला है। हमें उस जन का सम्मान और उसके आदर्श का पालन करना है।"

 

"कोई कहे कि आपका नाम मंत्रियों की लिस्ट में है तो जांच करें"
"देश में बहुत ऐसे नरेंद्र मोदी पैदा हो गए हैं, जिन्होंने मंत्रिमंडल बना दिया है। अगर सबका टोटल करेंगे तो 40-50 ऐसे रह जाएंगे जो मंत्रियों की लिस्ट में नहीं आएंगे। मैं कहना चाहता हूं कि अखबार के पन्नों से ना मंत्री बनते हैं और ना जाते हैं। कृपा करके शपथ ग्रहण तक ऐसी बातों पर ना जाएं। फोन आ भी जाए तो जांच करें। बहुत सारे साथी जीते हैं, जिम्मेदारियां सभी को नहीं दी जा सकती हैं। मैं भी आपमें से एक हूं।'

 

"दिल्ली के "सेवाभावी' लोगों की सेवा से मुक्त रहिए"
मोदी ने कहा, "जो नए चुनकर आए हैं, उन्हें तुरंत इस बात का अहसास होगा कि अचानक लोग देखने लगे हैं। आपने दिल्ली में देखा होगा। अचानक ही स्टेशन पर गैंग आपको लेने आ जाता है। ये दिल्ली की एक दुनिया है। वह आते ही आपको इतना प्यार देंगे, सेवा करेंगे कि आप पंगु बन जाएंगे। 3-4 दिन में आपकी दोस्ती हो जाती है। एक-दो साल बाद आपको पता चलेगा कि ये खिलाड़ी है। ये जो सेवाभावी लोग आते हैं ना उनकी सेवा से मुक्त रहिए।"

 

"अपने क्षेत्र के लिए योग्य लोगों का चुनाव खुद करें, सलाह पर नहीं"
उन्होंने कहा- कोई आपको सलाह दे, या फिर पुराने सांसद ही कहें कि ये अच्छा आदमी है तो मत सुनना। कोई कहे कि ये अच्छा है, ये अच्छा काम भी करेगा तो उसे भी मत सुनना। अपने अपने क्षेत्रों के लिए योग्य लोगों का चुनाव खुद करिए। दिल्ली में ऐसी व्यवस्था है, जो अच्छे-अच्छे लोगों को बर्बाद कर सकती है। देश सुन रहा होगा, लेकिन मैं आपको बताना चाहता हूं। यह मेरी जिम्मेदारी है।

 

"वीआईपी कल्चर से जितना बच सकते हैं, बचें"
"वीआईपी कल्चर, देश को इससे नफरत है। ये चीजें कह रहा हूं। आपको अच्छा-बुरा लगेगा, मैं नहीं जानता। नियम से चलने में क्या परेशानी है? लाल बत्ती हटाना कोई बड़ी चीज नहीं थी, लेिकन लोगों ने कहा कि मोदी ने इसे उतार दिया। मनोहर पर्रिकरजी की पहचान ही यही थी, यह बहुत बड़ी ताकत थी। वीआईपी कल्चर से जितना बच सकते हैं, बचें।"

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