चुनावी किस्सा / गलत काम ना करना पड़े इसलिए ठुकरा दिया टिकट



Samajwadi leader Shiv Shankar Yadav returns the ticket
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Samajwadi leader Shiv Shankar Yadav returns the ticket

Dainik Bhaskar

Apr 16, 2019, 03:30 AM IST

नेता के टिकट न मिलने पर निष्ठा बदलना आम बात है। लेकिन एक नेता ऐसे भी हुए, जिन्होंने वोटरों द्वारा गलत काम का दबाव बनाने पर चुनाव लड़ने से ही इंकार कर दिया था। यह किस्सा है बिहार के समाजवादी नेता शिवशंकर यादव का। साल था  1977। यह वह दौर था जब जनता पार्टी की लहर थी। यादव संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से बिहार की खगड़िया सीट से 1971 में सांसद बने थे। लेकिन उनका सांसदी का अनुभव ‘अच्छा’ नहीं था। 1971 में पाकिस्तान से जंग जीतने के बाद इंदिरा गांधी लोकप्रियता की आंधी पर सवार थीं और उन्होंने विरोधी पार्टी के नेताओं की किस्मत में शिकस्त लिख दी थी। यादव इंदिरा की आंधी के बावजूद संसद पहुंचे थे, लिहाजा 1977 में उन्हें खगड़िया से मैदान संभालने का आदेश मिला। जनता पार्टी के टिकट पर जीत तय थी, बावजूद यादव ने चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया। उनका कहना था- न मैं टिकट लूंगा और न ही चुनाव लडूंगा। ऐसा सांसद होने का क्या मतलब, जब वोटर गलत कामों की पैरवी कराने आने लगें? मैं ऐसे कामों की पैरवी से इनकार करते-करते तंग आ चुका हूं। मेरी अंतरात्मा मुझे और आगे तंग होते रहने की इजाजत नहीं देती। शिवशंकर यादव इतने ईमानदार थे कि निधन हुआ तो उनके पास सात रुपए निकले थे।

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