ग्राउंड रिपोर्ट / यूपी में 30 सीटों पर त्रिकोणीय संघर्ष, बंगाल-ओडिशा भाजपा की नई उम्मीद



भोपाल के एक हाेटल में भारत यात्रियों के साथ सवाल-जवाब करते हुए गणमान्य नागरिक। भोपाल के एक हाेटल में भारत यात्रियों के साथ सवाल-जवाब करते हुए गणमान्य नागरिक।
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भोपाल के एक हाेटल में भारत यात्रियों के साथ सवाल-जवाब करते हुए गणमान्य नागरिक।भोपाल के एक हाेटल में भारत यात्रियों के साथ सवाल-जवाब करते हुए गणमान्य नागरिक।

  • 533 सीटों का गणित समझाने के बाद आज भारतयात्रियों से प्रश्न : कौन जीतेगा 2019?
  • प्रबुद्धजनों के सबसे ज्यादा सवाल- रोजगार, रफाल, किसान, ध्रुवीकरण, कश्मीर और पुलवामा जैसे मुद्दों पर

Dainik Bhaskar

May 18, 2019, 03:20 AM IST

भोपाल. 17वीं लोकसभा के लिए हो रहे चुनाव के बीच देश का रुझान जानने के लिए दैनिक भास्कर ने ‘भारत यात्रा’ शुरू की थी। 10 रिपोर्टरों ने देश के उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम कोनों से 21,855 किमी से अधिक की यात्रा की और देश की 533 सीटों का हाल जाना। वहां उन्होंने क्या देखा?, क्या महसूस किया?, कहां किस की हवा चल रही है? कौन से मुद्दे काम कर रहे हैं? गठबंधन का समीकरण क्या है और कौन भारी पड़ रहा है?

 

इन्हीं सवालों का जवाब देने के लिए दैनिक भास्कर ने भोपाल में भारत यात्रियों के संग विमर्श कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में जाने-माने लोगों ने हिस्सा लिया। ढाई घंटे तक चले कार्यक्रम के दाैरान सभागार में माैजूद लोगों में आम चुनाव को लेकर काफी जिज्ञासा देखी गई। जानिए भारत यात्रियों से लोगों ने क्या-क्या सवाल किए। पढ़िए देश का मिज़ाज भारतयात्रियों की जुबानी

 

उत्तर प्रदेश (धर्मेन्द्र सिंह भदाैरिया)

 

कांग्रेस की सिर्फ लोकसभा नहीं, 2022 की विधानसभा पर नजर : जैसे-जैसे चुनावी चरण निपटे, वाेट ट्रांसफर का ट्रेंड भी दिखा। प्रियंका के आने से कांग्रेस कार्यकर्ता उत्साहित हैं। करीब 30 से अधिक सीटाें पर कांग्रेस ने समीकरण त्रिकाेणीय बना दिए हैं। बनारस में माेदी ही सबसे बड़ा मुद्दा है। रामपुर में मुस्लिम वोटर्स ज्यादा हैं। भाजपा के पास मजबूत उम्मीदवार नहीं था ताे जयाप्रदा काे उतारना पड़ा। आजम खान का पलड़ा भारी रह सकता है। कांग्रेस उत्तरप्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में है। 

 

उत्तर (उपमिता वाजपेयी)

 

पुलवामा बड़ा मुद्दा, लेकिन वहां 320 बूथों पर वोट ही नहीं पड़े : जिस पुलवामा आतंकी हमले के नाम पर देश का माहाैल बदल गया है। वहां 320 बूथाें पर एक भी वाेट नहीं पड़ा। घाटी और जम्मू का माहाैल हमेशा की तरह अलग नजर आया। जम्मू और कश्मीर दाेनाें जगह धारा 370 मुद्दा है, इस पर लाेग मुखर भी हैं। यही एक ऐसा बिंदु है जिस पर जम्मू और कश्मीर के लोगों की एक राय है। जम्मू काे रिफ्यूजी शहर कहते हैं। जिस कश्मीर की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर टिकी हुई है, वह अर्थव्यवस्था इस चुनाव में वहां काेई फैक्टर नहीं है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह काे चुनाैती मिल रही है। उनके लिए मुश्किलें कम नहीं हैं। राज्य में नई लीडरशिप डेवलप हो रही है। महबूबा ने अपने बेटे काे आगे किया है।

 

दक्षिण (अमित कुमार निरंजन)
 

जगन दक्षिण में नई ताकत,  राहुल का 30 सीटों पर असर : तमिलनाडु में स्टालिन, आंध्र में जगन का जलवा, राहुल के वायनाड जाने से कर्नाटक, केरल और आंध्र की 30 सीटों पर असर है। साउथ में वोटर का फेस वैल्यू पर फाेकस ज्यादा है। वहां लगे पाेस्टराें से इसका ट्रेंड जाहिर होता है। एआईएडीएमके के सामने नेता का संकट है, इसलिए उसके पाेस्टराें पर जयललिता की बड़ी फाेटाे नजर आई। डीएमके इस मामले में भारी दिखी। उसके पाेस्टराें पर स्टालिन छाए हुए हैं। दक्षिण के लाेगाें की साेच बिल्कुल अलग है। राष्ट्रवाद, एयर स्ट्राइक, सबरीमाला यहां मुद्दा ही नहीं है। आंध्र प्रदेश में जगन ने 10 हजार किमी की पैदल यात्रा करके लाेगाें काे रिझाया है। जगन यहां अन्य दलों पर भारी पड़ रहे हैं।

 

पूर्व (राजेश माली)

 

पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम पर टिकी है भाजपा की उम्मीद : पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम समेत पूर्वाेत्तर राज्य बंगाल में टीएमसी के किले में सेंध लगाना आसान नहीं है। लेफ्ट भी जब यहां सत्तारुढ़ था। तब भी हिंसा के बिना चुनाव निपटना संभव नहीं था। अभी भी ट्रेंड वही है। हर बूथ पर टीएमसी बेहद मजबूत दिखी। इसके बावजूद भाजपा काे सीटाें का फायदा नजर आ रहा है। वजह यह है कि उसके पास बंगाल में खाेने के लिए कुछ नहीं है। असम में रफाल, राष्ट्रवाद जैसे मुद्दाें का काेई असर नहीं। असम प्रदेश कांग्रेस के दफ्तर के बाहर रफाल का माॅडल लगा है। लेकिन वहां सिटीजन संशोधन बिल बड़ा मुद्दा है। रफाल को लेकर कांग्रेस ने राेड शाे भी किया, लेकिन वहां इसका काेई असर नहीं है।

 

पश्चिम (भंवर जांगिड़)

 

महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश में किसान कर्जमाफी और न्याय बड़ा मुद्दा: गुजराती जानते हैं माेदी कुछ भी कर सकते हैं। गुजरात में माेदी फैक्टर सबसे असरकारक है। मप्र के छिंदवाड़ा में माेदी से ज्यादा कमलनाथ की चर्चा है। बच्चे भी उन पर भराेसा करते हैं। मप्र की हाॅट सीट भाेपाल में साध्वी प्रज्ञा के लिए बाहरी इलाकाें से समर्थक आए थे। भाेपाल के एक लाॅ इंस्टीट्यूट में जाकर स्टूडेेंट्स से बात की ताे युवा वाेटर्स का मूड समझ में आया। इनमें से 50% मानते हैं कि माेदी फैक्टर प्रभावी है। महाराष्ट्र के विदर्भ और मराठवाड़ा में किसान पीड़ित हैं और मुखर भी। इस कारण भाजपा- शिवसेना काे नुकसान हाेता दिख रहा है। राजस्थान में मोदी के साथ-साथ अशोक गहलोत की भी इस चुनाव में परीक्षा है।

 

बिहार-झारखंड (शशिभूषण सिंह)

 

महागठबंधन का गणित बिगड़ा, तेलंगाना में केसीआर की चमक : बिहार में गठबंधन का गणित गड़बड़ाया हुआ है। नए प्रत्याशी होने से 10 सीटों पर उसका दावा कमजोर होता लग रहा है। बिहार में जाति बड़ा फैक्टर है। बेगूसराय में नेक टू नेक फाइट है, लेकिन वहां के मतदाताओं का कन्हैया कुमार से सीधा सवाल है- पहले अपनी जाति के 30 फीसदी वाेट लेकर आओ। तेलंगाना में बीजेपी की चर्चा नहीं है। केसीआर ने भाजपा के हिंदुत्व या राष्ट्रवाद जैसे मुद्दाें के लिए स्पेस तक नहीं छाेड़ा।

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