ग्राउंड रिपोर्ट / काशी में मोदी को छोड़कर बाकियों में नं-2 की होड़



ground report from uttar pradesh lok sabha seat including banaras
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ground report from uttar pradesh lok sabha seat including banaras

  • उत्तर प्रदेश में मोदी की एक सीट का चौतरफा असर
  • बनारस, चंदौली, गाजीपुर, मिर्जापुर, रॉबटर्सगंज की स्थिति, यहां 19 मई को 13 सीटों पर वोटिंग

धर्मेंद सिंह भदौरिया

धर्मेंद सिंह भदौरिया

May 17, 2019, 02:43 AM IST

याद का उल्टा होता है दया। भाजपा ने याद किया इसलिए हम नरेंद्र मोदी के 2014 में प्रस्तावक बने। पिछले पांच साल में काशी में लगातार लाइट रहने लगी है। सफाई हुई। सड़कें चौड़ी हुईं। गंगा भी पहले से निर्मल हुईंं। घाटों की सुंदरता बढ़ी। मोदी फिर आशीर्वाद लेने आएंगे तो अवश्य देंगे। काशी की तंग गलियों वाले छोटी गैबी स्थित मकान के छोटे कमरे में बैठे शास्त्रीय गायक और पद्म भूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र चुनाव की चर्चा करते हुए यह बात कहते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में मिश्र की बात से हर काेई इत्तेफाक रखता है। सातवें चरण के लिए वाराणसी के साथ ही मिर्जापुर, गाजीपुर, चंदौली, रॉबर्ट्सगंज में 19 मई को वोट डाले जाएंगे। 


बनारस में सपा ने 2017 में मेयर का चुनाव लड़ चुकी शालिनी यादव को टिकट दिया है। शालिनी की घोषणा के बाद अंतिम समय पर निर्दलीय उम्मीदवार तेजबहादुर यादव काे सपा ने उम्मीदवार घोषित किया। तेजबहादुर का पर्चा खारिज होने के बाद शालिनी ही अब सपा उम्मीदवार हैं। शालिनी को गठबंधन के जातीय समीकरण से चमत्कार की उम्मीद है। कांग्रेस ने 2014 में प्रत्याशी रहे अजय राय को फिर प्रत्याशी बनाया है। शुरुआत में प्रियंका गांधी के नाम की चर्चा के बाद अंतिम समय में राय के नाम की घोषणा हुई है। राय के समर्थन में प्रियंका गांधी ने रोड शो भी किया है।

 

अजय राय कहते हैं कि मोदी ने शहर को क्योटो बनाने की बात कही थी लेकिन टोटो (इलेक्ट्रॉनिक रिक्शा) बना दिया है। विश्वनाथ मंदिर से लगे मंदिरों को हटाया गया है। बनारस की पहचान गलियों को खत्म किया है। राय कहते हैं कि पिछली बार से कम से कम चार गुना अधिक वोट लाऊंगा। 2014 में राय को करीब 75 हजार वोट मिले थे। चंदौली में त्रिकोणीय संघर्ष है। इस सीट पर बनारस का असर भी दिखता है क्योंकि बनारस जिले की अजगरा और शिवपुर विधानसभा सीट इस लोकसभा क्षेत्र में आती हैं। मौजूदा सांसद और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्रनाथ पांडेय की अंतिम समय में उम्मीदवारी की घोषणा हुई।

 

पांडे़य का मुकाबला महागठबंधन की ओर से सपा प्रत्याशी संजय सिंह चौहान से है। संजय जनवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं लेकिन यहां सपा के चिन्ह पर चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस की ओर से यहां गठबंधन के तहत जन अधिकार पार्टी से बाबूराम कुशवाहा की पत्नी शिवकन्या कुशवाहा मैदान में हैं। चंदौली में कुशवाहा गठबंधन से ज्यादा भाजपा को नुकसान पहुंचाती दिख रही हैं। 1.1 लाख ब्राह्मण वोट वाली सीट पर पांडेय त्रिकोणीय संघर्ष करते दिख रहे हैं। वीर शहीदों की धरती गाजीपुर में नजदीकी मुकाबला विकास बनाम बाहुबल-जातिवाद में बदल गया है। यहां केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा अपने विकास कार्यों की दम पर सपा-बसपा गठबंधन के बाहुबली प्रत्याशी अफजाल अंसारी से कांटे के मुकाबले में दो-चार हो रहे हैं। 


मिर्जापुर में त्रिकोणीय मुकाबला है। यहां अपना दल एस की अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल चुनाव लड़ रही हैं। उन्हें कांग्रेस के ललितेशपति त्रिपाठी और सपा के राम चरित्र निषाद से चुनौती मिल रही है। निषाद मछलीनगर सीट से भाजपा सांसद थे, टिकट न मिलने पर वे पाला बदल सपा में आ गए। सपा ने भी उनके लिए अपना पूर्व घोषित प्रत्याशी राजेंद्र बिंद बदल दिया। ललितेशपति कांग्रेस के दिग्गज कमलापति त्रिपाठी के पौत्र हैं। अनुप्रिया को ब्राह्मण विरोधी छवि और राजभर वोटों पर पकड़ वाली सुहेलदेव समाज पार्टी के द्वारा मिर्जापुर में कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन की घोषणा की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

 

इसके साथ ही अनुप्रिया की मां कृष्णा पटेल और बहन पल्लवी पटेल कांग्रेस के पक्ष में प्रचार कर रहे हैं। त्रिकोणीय संघर्ष में 38 वर्षीय अनुप्रिया आगे दिखती हैं। रॉबर्ट्सगंज में अपना दल, सपा और कांग्रेस तीनों दलों के प्रत्याशी पड़ोसी मिर्जापुर जिले के हैं। 2014 में यहां से भाजपा के छोटेलाल जीते थे। इस बार यह सीट गठबंधन को दे दी गई। अपना दल (एस) ने 2009 में यहां से सांसद रहे सपा नेता पकौड़ी लाल को  टिकट दिया है। कांग्रेस ने भगवती प्रसाद चौधरी को टिकट दिया है। 1.25 लाख मुस्लिम और 2.5 लाख सवर्ण वोटर्स वाली सुरक्षित सीट पर पकौड़ी लाल फिलहाल मोदी मैजिक और अपना दल के वोट बैंक के भरोसे सबसे आगे दिखाई दे रहे हैं।

 

मोदी की जीत के अंतर पर चर्चा

 

काशी में चर्चा अब सिर्फ इस बात की है कि जीत का अंतर 2014 से कम होगा या ज्यादा। सपा और कांग्रेस में नंबर दो की होड़ है। दोनों उम्मीदवार भी अच्छे से लड़ने की बात करते हैं लेकिन जीतने का पक्का दावा उनकी बात में भी नहीं है। यहां कुल 25 उम्मीदवार मैदान में हैं। पूर्वांचल में जातीय गणित महत्वपूर्ण होने के बावजूद मोदी इससे बेअसर हैं। सपा-बसपा के अतिरिक्त भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियाें ने भी यहां की पांच सीट जीतने के लिए गठजोड़ किया है। 


2014: मिर्जापुर में अपना दल। बाकी सीटों पर भाजपा जीती। 

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