ग्राउंड रिपोर्ट / बंगाल में राजनीतिक हिंसा से वोटर नाराज, गुस्सा बदल सकता है स्थिति

राजेश माली

राजेश माली

May 17, 2019, 05:14 PM IST



Ground Report From West Bengal Lok Sabha Seat: Voters angry over WB violence, can impact election results
X
Ground Report From West Bengal Lok Sabha Seat: Voters angry over WB violence, can impact election results

  • जाधवपुर, डायमंड हार्बर, मथुरापुर, जयनगर की स्थिति, यहां 19 मई को 9 सीट पर वोटिंग
  • इस चुनाव में भगवान श्रीराम के बाद अब महान समाज सुधारक ईश्वरचंद्र विद्यासागर की भी एंट्री

पश्चिम बंगाल के चुनाव में भगवान श्रीराम के बाद अब महान समाज सुधारक ईश्वरचंद्र विद्यासागर की एंट्री हो गई है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो के दौरान हुई हिंसा में उनकी प्रतिमा टूट गई थी। तृणमूल कांग्रेस इसे मुद्दा बना रही है, क्योंकि बंगाल के लोगों की भावनाओं से जुड़ा मामला है। आखिरी चरण के चुनाव में ममता-मोदी से ज्यादा चर्चा हिंसा की है। लोगों को लग रहा है कि इससे बदनामी बंगाल की हो रही है और वे अपना गुस्सा वोट के जरिए निकाल सकते हैं। यह गुस्सा किसके खिलाफ होगा? यही सवाल यहां चर्चा में है। 19 मई को प. बंगाल की 9 सीटों पर चुनाव होगा जिसमें ममता बनर्जी की पुरानी सीट जाधवपुर के साथ ही डायमंड हार्बर, मथुरापुर व जयनगर भी है।


राज्य में विपक्ष के लिए कोई जगह नहीं छोड़ने की जिद के कारण ही ममता कहीं कोई रिस्क नहीं ले रहीं। उन्होंने जाधवपुर में मौजूदा सांसद की बजाय बांग्ला फिल्मों की अभिनेत्री 30 वर्षीय मिमी चक्रवर्ती पर भरोसा किया। इसकी दो वजह है- भाजपा प्रत्याशी अनुपम हाजरा और सीपीआई (एम) के बक्शी रंजन भट्टाचार्य। 37 साल के अनुपम 2014 का लोकसभा चुनाव बोलपुर से तृणमूल के टिकट पर जीते थे। 68 वर्षीय भट्टाचार्य जाने-माने वकील हैं और कोलकाता के मेयर रह चुके हैं। त्रिकोणीय मुकाबले में तृणमूल का वोट बिखरे नहीं, इसलिए ममता ने सितारा छवि का सहारा लिया। उनका दांव सफल होता दिख रहा है।

 

महिला वोटरों में मिमी की ज्यादा चर्चा है। विश्व भारती विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रहे अनुपम को राजनीति में मुकुल राॅय लेकर आए थे जो कभी ममता के खास हुआ करते थे और तृणमूल में नंबर 2 थे। वे भाजपा में आए तो अनुपम भी आ गए। अनुपम को अब भी तृणमूल के अपने पुराने संपर्कों पर भरोसा है। रोड शो में पसीने में तरबतर अनुपम कहते हैं ‘मोदीजी का नाम तो है ही, चूंकि मैं तृणमूल में रहा हूं तो वे लोग भी मेरे साथ हैं जो ममता और उनके भतीजे से खुश नहीं हैं।’ वहीं मिमी के लिए दीदी ही सब कुछ हैं। वे ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री बनाने के नाम पर वोट मांग रही हैं। रंजन भट्टाचार्य खुद की छवि के साथ ही सीपीआई (एम) के मजबूत वोट बैंक पर भरोसा कर रहे हैं। क्षेत्र में 32% मुस्लिम वोटर हैं जिन्हें तृणमूल अपना मान कर चल रही है।

 

ममता बनर्जी ने जाधवपुर से 1984 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर सीपीआई(एम) के कद्दावर नेता सोमनाथ चटर्जी को हराया था। डायमंड हार्बर में ममता बनर्जी के नाम के कारण अभिषेक बनर्जी की स्थिति मजबूत है। ममता के भतीजे अभिषेक 2014 में यहीं से सांसद चुने गए थे। यहां 37% मुस्लिम वोटर हैं जिन पर तृणमूल के साथ सीपीआई(एम) की भी नजर है। सीपीएम के डॉ. फुआद हलीम ने मुस्लिम वोटों में सेंध लगाई तो नुकसान अभिषेक को हो सकता है। डॉ. हलीम के पिता हाशिम अब्दुल हलीम 29 साल तक पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर रहे, जो एक रिकाॅर्ड है। यहां भी त्रिकोणीय मुकाबला है। भाजपा के नीलांजन राॅय मैदान में हैं।


मथुरापुर में तृणमूल के चौधरी मोहन जाटुआ का लगातार तीसरा चुनाव है। आईपीएस अफसर रहे जाटुआ पिछले दो चुनाव यहीं से जीते थे। मथुरापुर साउथ 24 परगना जिले में आता है। यह वही जिला है जहां लेफ्ट को अपने लंबे शासनकाल में पहला झटका लगा था जब तृणमूल ने जिला परिषद के चुनाव में जीत दर्ज की थी। अब यह क्षेत्र तृणमूल का मजबूत गढ़ बन गया है। जाटुआ का मुकाबला भाजपा के श्यामप्रसाद हलधर से है। रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) का गढ़ रहे जयनगर में तृणमूल प्रत्याशी प्रतिमा मंडल को इस बार आरएसपी के सुभाष नास्कर के साथ भाजपा के डॉ. अशोक कंडारे से चुनौती मिल रही है। 1980 से लेकर 2004 तक यहां आरएसपी का कब्जा रहा। जयनगर क्षेत्र में आरएसएस की सक्रियता है, लेकिन पार्टी का नेटवर्क कमजोर है। यहां 37% मुस्लिम वोटर निर्णायक हैं, जो तृणमूल की जीत आसान बना सकते हैं।

 

बंगाल दो खेमों में बंटा

 

ईश्वरचंद्र विद्यासागर की प्रतिमा तोड़े जाने की घटना को ममता ने बंगाल का अपमान बताया है। राजनीतिक विश्लेषक प्रो. बिमल शंकर नंदा कहते हैं नि:संदेह इस घटना की लोगों में चर्चा है, लेकिन इससे भी ज्यादा चर्चा चुनावी हिंसा की है जो सारी हदें पार कर चुकी है। एक सामान्य बंगाली को भी लगता है कि इससे पूरे बंगाल की छवि खराब हो रही है। वह गुस्से में है, यह गुस्सा किसके खिलाफ जाएगा, कहना मुश्किल है। इस हिंसा ने पहली बार लोगों को भी दो खेमों में बांट दिया।


2014 : सभी चारों सीटों पर तृणमूल कांग्रेस जीती थी।

 

23 मई को देखिए सबसे तेज चुनाव नतीजे भास्कर APP पर 

COMMENT

किस पार्टी को मिलेंगी कितनी सीटें? अंदाज़ा लगाएँ और इनाम जीतें

  • पार्टी
  • 2019
  • 2014
336
60
147
  • Total
  • 0/543
  • 543
कॉन्टेस्ट में पार्टिसिपेट करने के लिए अपनी डिटेल्स भरें

पार्टिसिपेट करने के लिए धन्यवाद

Total count should be

543