कर्नाटक से ग्राउंड रिपोर्ट / चिकमंगलूर और धारवाड़ में लिंगायत निर्णायक हैं, नाराज़ भी, भाजपा से छिटक सकता है पारंपरिक वोट



धारवाड़ में ईदगाह का मुद्दा सबसे बड़ा है। मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में है। धारवाड़ में ईदगाह का मुद्दा सबसे बड़ा है। मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में है।
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धारवाड़ में ईदगाह का मुद्दा सबसे बड़ा है। मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में है।धारवाड़ में ईदगाह का मुद्दा सबसे बड़ा है। मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में है।

  • ‘महाराष्ट्र कर्नाटक’ : मराठी बनाम कन्नड़,  सिर्फ बेलगाम में विरोध के तौर पर सौ लोग चुनाव में उतरेंगे
  • ‘कारावाली कर्नाटक’ : इन 3 सीटों पर हिंदू-मुस्लिम का फैक्टर, सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मुद्दों पर खींचे जाएंगे वोट

Dainik Bhaskar

Apr 16, 2019, 03:38 AM IST

रेशमा की तेज होती टापों के बीच हाशिम...आदिलशाह के समय बने घरों की ओर इशारा करते हुए कहते हैं- आज भी वैसा गारा नहीं बन पाया है, जो घरों को इतना मजबूती से जोड़ सके। राजनीति भी ऐसी ही है। कौमी एकता का गारा हर बार चुनाव आते-आते चटक जाता है। तीसरी तक पढ़े लेकिन हिंदी, कन्नड़, मराठी और अंग्रेजी में बात करने वाले हाशिम बातों-बातों में महाराष्ट्र कर्नाटक का सियासी सच कह देते हैं। वोट किसे देंगे? सवाल पर हाशिम अपनी घोड़ी रेशमा पर हाथ फेरते हुए बोले-जो हमारा ध्यान रखेगा, हम उसका ध्यान रखेंगे।

 

हाशिम की ही बात को आगे बढ़ाते हुए द हिन्दू के राजनीतिक संपादक ऋषि बहादुर कहते हैं- महाराष्ट्र कर्नाटक पहले कांग्रेस का गढ़ था। बाबरी मस्जिद घटना के बाद धारवाड़ के ईदगाह मैदान ने पूरी राजनीति पलट दी। ढाई दशक पहले भाजपा नेताओं के यहां झंडा फहराने के बाद भाजपा ने दस्तक देना शुरू किया। धारवाड़ से महाराष्ट्र कर्नाटक क्षेत्र की पहली सीट जीतने की दस्तक देने वाली भाजपा ने एक दशक के अंदर पूरे क्षेत्र में दबदबा बना लिया। 


चिकोड़ी को कांग्रेस का गढ़ माना है। यहां किसानों के गन्ने के कम दामों का मामला हर बार चुनावी मुद्दा बनता है। यहां से पिछली बार कांग्रेस के टिकट से पीबी हक्केरी चुनाव जीते थे। इन्हें फिर से टिकट दिया गया है। यहां का लिंगायत भाजपा से धर्म की मान्यता न मिलने से थोड़ा नाराज है। इसलिए कांग्रेस फिर से जीत सकती है। भाजपा ने यहां अन्ना साहेब जोल्ली को टिकट काे दिया है। राजनीतिक विश्लेषक आर उप्पार कहते है- यहां कन्नड़ और मराठी का मुद्दा बना हुआ है। चिकोड़ी को अलग जिला बनाने की मांग चल रही है सो अलग। 


 बेलगाम महाराष्ट्र से लगा इलाका है। यहां भाजपा ने फिर से मौजूदा सांसद सुरेश अंगड़ी को टिकट दिया है। ये भाजपा के टिकट से तीन बार सांसद चुने गए है। ये कर्नाटक के पूर्व मंत्री वीएस कोजलगी के रिश्तेदार हैं। यहां महाराष्ट्र और कर्नाटक की सीमा का मामला मुख्य मुद्दा है। यहां मराठी समुदाय के लोग चाहते हैं कि इसे महाराष्ट्र में शामिल किया जाए। मुद्दा तीन दशक पुराना है। मुद्दे की गंभीरता इसी से समझ सकते हैं कि यहां महाराष्ट्र एकीकरण समिति ने 1996 में 452 लोगों को चुनाव में खड़ा किया था। इस बार भी समिति 100 से ज्यादा लोगों को खड़ा करने जा रही है। यहां मराठी समुदाय का वोट भाजपा से जुड़ा माना जाता है। इसलिए यहां से भाजपा की अच्छी संभावनाएं हैं। 


बागलकोट में पिछली बार भाजपा ने पीसी गड्‌डीगोडर को टिकट दिया था और ये जीते भी थे। इस बार पार्टी ने फिर भरोसा जताया है। यहां 70% वोट लिंगायत हैं। कांग्रेस ने भी लिंगायत...वीना विजयांनद काे उतारा हैै। जो एक मात्र महिला उम्मीदवार हैं, जिन्हें कांग्रेस ने टिकट दिया है। 


बीजापुर में पिछली बार भाजपा से रमेश चंदप्पा सांसद चुने गए थे। इस बार भी भाजपा से इन्हें ही टिकट मिला है। पिछले चार चुनाव से भाजपा यहां कब्जा जमाए हुए है। इस बार मुकाबला कड़ा हो सकता है क्योंकि केन्द्र में मंत्री होने के कारण ये अपने क्षेत्र से कटे रहे हैं। यहां 40% दलित, 40% लिंगायत और 20% अल्पसंख्यक हैं। पिछली बार दलित और मुस्लिम वोट जेडीएस और कांग्रेस में बंट गए थे। इस बार दोनों साथ हैं, तो उनकी उम्मीदें भी बढ़ी हुई हैं।  


धारवाड़ से भाजपा के प्रह्लाद वेंकटेश पिछली बार सांसद चुने गए थे। भाजपा ने इन्हें फिर टिकट दिया है। यहां हुबली ईदगाह मैदान का मुद्दा बना हुआ है। यहां सांप्रदायिकता बड़ा मुद्दा है। यहां लिंगायत 55%, मुस्लिम 25%, ओबीसी 10 प्रतिशत और दलित 10 फीसदी हैं। 1994 में भाजपा नेता उमा भारती के साथ सिकंदर बख्त ने ईदगाह मैदान में तिरंगा फहराया था। इसके बाद से अब तक ये सीट भाजपा के पास ही है। 


हावेरी इलायची के लिए जाना जाता है। पिछली बार भाजपा के शिवकुमार चनाबसप्पा सांसद चुने गए थे। इस बार फिर चुनाव लड़ रहे हैं। यहां महदाई वाटर प्रोजेक्ट का मुद्दा है। यहां कड़े मुकाबले के अासार हैं। भारत यात्रा के इस चरण में जब हम चिकमंगलूर पहुंचे तो एक विलक्षण नजारा दिखा। छह हजार फीट की ऊंचाई पर बाबा बुड़नगिरी की दरगाह और दत्तात्रेय पीठ। दोनों के बीच महज दो फीट का फासला।

 

चौंकाने वाली बात ये है कि ये बाबा बुड़न और दत्तात्रेय एक ही व्यक्ति के दो नाम हैं। 16वीं सदी में अरब से आए बाबा बुड़न सभी वर्गों में समान रूप से माने जाते थे। जब इनका देहांत हुआ तो मुस्लिमों ने दरगाह बना दी और हिन्दुओं ने खड़ायू स्थापित कर दी। बाबा बुड़नगिरी-दत्तात्रेयपीठ और भटकल का मुद्दा इतना प्रभावशाली है कि इन तीन सीटों के साथ-साथ पूरे कर्नाटक और पूरे दक्षिण भारत की सियासत को प्रभावित करता है। बाबा बुड़नगिरी का कर्नाटक में इसे दक्षिण अयोध्या कहा जाता है। इसका मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। 


उत्तर कन्नड में भाजपा के अनंतकुमार हेगड़े पांच बार सांसद चुने गए हैं। फिर से मैदान में हैं। ये धारवाड़ के ईदगाह मैदान में तिरंगा फहराने से उभरे थे। इस बार भी यहां जीत की संभावना है। यहां जेडीएस का अस्तित्व नहीं है। यहां जेडीएस का उम्मीदवार चुनाव लड़ रहा है, चूंकि चेहरा नया है। इसलिए अनंत की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।


उडूपी चिकमंगलूर कभी कांग्रेस का गढ़ था। 1978 में यही वो सीट थी, जहां से इंदिरा गांधी उपचुनाव में जीती थीं। यहां से येदियुरप्पा टीम की सक्रिय सदस्य शोभा करान्डलंजे भाजपा से मैदान में हैं। पिछली बार वे यहीं से सांसद चुनी गई थी। यहां प्रमोद माधवराज को जेडीएस से टिकट मिला है।  


दक्षिण कन्नड में 1991 से भाजपा का कब्जा है। संघ का काडर यहां मजबूत है भाजपा के नलिन कुमार लगातार दो बार इस सीट से सांसद चुने जा चुके हैं। इस बार भी मैदान में हैं। कांग्रेस ने युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष मिथुन राय को मैदान में उतारा है। 

 

ये तीन सबसे असरदार फैक्टर

 

गठबंधन की स्थिति

 

  • महाराष्ट्र कर्नाटका क्षेत्र में जेडीएस का असर बेहद कम है। कांग्रेस और जेडीएस साथ मिलकर लड़ रहे हैं। यहां मुख्य मुकाबले में भाजपा-कांग्रेस ही रहेंगे। वहीं कारावाली कर्नाटक (उत्तर कन्नड, दक्षिण कन्नड, उडुपी चिकमंगलूर) की बात करें तो यहां जेडीएस एक और कांग्रेस दो सीट पर लड़ रही है।

 

मुद्दे जो असर डालेंगे

 

  • सर्जिकल स्ट्राइक का यहां शोर है। लोगों में इसकी बहुत चर्चा है। कारावाली कर्नाटक में सिर्फ हिन्दुत्व ही मुद्दा है। दो दशक पुराना बाबा बुड़नगिरी दरगाह और दत्तात्रेय देवास्थान का मुद्दा अहम है। सर्जिकल स्ट्राइक का असर बहुत ज्यादा है।

 

जातीय गणित

 

  • महाराष्ट्र कर्नाटक क्षेत्र में लिंगायत फैक्टर काम करेगा। लिंगायत यूं भाजपा का वोट बैंक है। उधर, कारावली कर्नाटक में हिंदू-मुस्लिम वाला फैक्टर दिखता है। यहां हिन्दू वोट करीब 60% (लिंगायत 30%, वोक्कालिगा 5% और 25% ओबीसी)हैं। यहां अल्पसंख्यक 20% हैं।

 

2014 की स्थिति :  बेलगाम, बागलकोट, बीजापुर, धारवाड़, हावेरी, उत्तर कन्नड़, उडुपी चिकमंगलूर और दक्षिण कन्नड़ की सीटें भाजपा ने जीती थीं। सिर्फ चिकोड़ी सीट कांग्रेस के खाते में आई।

 

 

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