ग्रांउड रिपोर्ट / आधी कोयलानगरी में दिल्ली से भी अधिक रहता है प्रदूषण

Half of Koyalanagri has more pollution than Delhi
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Half of Koyalanagri has more pollution than Delhi

  • बेरमो - भाजपा और कांग्रेस में ही रहा है मुकाबला आजसू और भाकपा वर्चस्व तोड़ने का करेंगी प्रयास

Dainik Bhaskar

Dec 05, 2019, 12:10 AM IST

सुभाष चंद्र ठाकुर । बेरमो . कोयला नगरी के नाम से विख्यात बेरमो विधानसभा क्षेत्र का आधा हिस्सा दिल्ली से भी अधिक प्रदूषित है। ट्रांसपोर्टिंग से कोयला का गर्द उड़ने और सड़कों पर धूल जमी रहने से लोगों का जीना मुहाल है। लोगों की आयु घट रही है। आंख, हृदय, पेट व फेफड़े की बीमारियां खतरनाक स्टेज पर  पहुंच चुकी हैं। उद्योग धंधे स्थापित करने के लिए दो दर्जन कोयला खदान, दामोदर नदी व अन्य जोरिया का पानी, दो बिजली कारखाने, पर्याप्त जमीन व मानव ऊर्जा तो हैं, फिर भी उद्योग धंधों का अपेक्षित विकास नहीं हो सका।

जलापूर्ति की सुविधा के लिए पानी टंकियों और पाइपलाइन बिछाने का कार्य तेजी से जारी हैं। नदियों पर पुल बनाकर गांवों को शहर से जोड़ने का काम हुअा। चुनावी मुद्दों की बात करें तो 1985 के आधार पर स्थानीय नीति, गैर मजरुआ जमीन का लगान नहीं कटना, पिछड़ा आरक्षण प्रमुख हंै। भाजपा प्रत्याशी योगेश्वर महतो बाटुल और कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र प्रसाद सिंह में कांटे की टक्कर है। आजसू के काशीनाथ सिंह व भाकपा के आफताब आलम मुद्दों को हवा देकर बाजी पलटने के प्रयास में हैं।

दम तोड़ रहीं कोयला खदानें

कई कोयला खदानें बंद हो गईं तो कुछ बंदी की कगार पर हैं। कोयला मंत्री के आश्वासन के बावजूद नई कोयला खदानें नहीं खुल रही हैं। कोयला आधारित लोकल सेल लगभग बंद है। इसी तरह सिंचाई के साधन का अभाव है।

चिंता...आंख, पेट, हृदय रोग से पीड़ित हैं लोग

1 शिक्षा : शिक्षा के प्रति जागरुकता है, लेकिन इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज अादि का अभाव रहने से विद्यार्थियों को अन्य शहरों में जाकर पढ़ाई करनी पड़ती है।

2 पेयजल : पेयजल पहुंचाने का कार्य तेजी से जारी है, लेकिन कब तक काम पूरा होगा, समय तय नहीं है। बेरमो की दूसरी छोर पर सिंचाई के साधन मौजूद नहीं है।

3 रोजगार : योजना लाने से सिर्फ बड़े ठेकेदारों को ही रोजगार मिल रहा है। छोटे ठेकेदार सहित डीओ धारक, ट्रक मालिक, लदनी मजदूर बेरोजगार हो गए हैं।  

4 जिले की मांग : रामगढ़ से ज्यादा क्षेत्रफल, पर 10 सालों से जिला बनाने की मांग अब तक पूरी नहीं। लोगों का मानना है कि जिला बनने से विकास स्वत: होने लगता।

3 चुनावों का सक्सेस रेट

2014 : रयोगेश्वर महतो बाटुल, भाजपा- 80,440, राजेंद्र प्रसाद सिंह, कांग्रेस- 67,829 2009 : राजेंद्र प्रसाद सिंह, कांग्रेस-47,744, योगेश्वर महतो बाटुल, भाजपा- 41,133, 2005 : योगेश्वर महतो बाटुल, भाजपा-47,569, राजेंद्र प्रसाद सिंह, कांग्रेस-38,108

वोटर्स बोले... वोटकटवों को पहचानती है जनता
 जनता स्थानीय मुद्दे देख रही है। खड़े ट्रक, बंद होती माइंस मुद्दे प्रभावित  करेंगे। वोटकटवाें को जनता पहचानती है। - अनुरागी सुनील, समाजसेवी

 सरकारी योजनाएं घरों व बैंक खाते तक पहुंच रही हैं। इसका व्यापक असर जनता के दिलो-दिमाग पर है।  - नेमचंद महतो, व्यवसायी, फुसरो

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