भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट / सपने से वोट खरीदते हैं नेता अनुमंडल इस बार भी मुद्दा

Leader subdivision buys votes with dreams
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Leader subdivision buys votes with dreams

  • महेशपुर }स्टीफन के सामने भाजपा केे मिस्त्री और झाविमो के शिवधन, आजसू के सुफल बदलेंगे समीकरण

Dainik Bhaskar

Dec 03, 2019, 05:37 AM IST

पाकुड़ सेे संतोष कुमार . महेशपुर अनुमंडल बनेगा...। यह वह सपना है, जिसे दिखा कर नेता हर चुनाव में वोट की फसल काट रहे हैं। जब चुनाव अाता है, महेशपुर को अनुमंडल बनाने की बात नेता करते हैं। लोग विश्वास कर वोट देते हैं, नेता विधायक बन उस विश्वास को तोड़ देते हैं। इसबार के चुनाव में भी हर दल के प्रत्याशी महेशपुर को अनुमंडल बनाने की घोषणा कर रहे हैं। महेशपुर विधानसभा क्षेत्र के खेतों तक पानी की सुविधा 20 साल पहले भी नहीं था अौर अाज भी नहीं। शिक्षा के लिए कॉलेज का अभाव है।

बांसलोई नदी से बेतहाशा बालू उठाव से नदी के अस्तित्व पर खतरा बन गया है। चुनाव की बात करें तो यहां की जनता का मूड बदलता रहता है। बात दलों की करें तो हर बार मुकाबला का केंद्र भाजपा ही होती है। पिछले तीन चुवानों पर नजर डालें तो इस सीट को दो बार झामुमो और एक बार झाविमो ने फतह किया है। वैसे झामुमो ने स्टीफन मरांडी पर फिर विश्वास किया है। वहीं भाजपा ने मिस्त्री सोरेन और झाविमो ने शिवधन हेंब्रम पर दांव खेला है। झामुमो छोड़ आजसू में गए सुफल मरांडी इस बार सेंधमारी कर बाजी इधर-उधर कर सकते हैं।

आदिवासी वोटर हैं निर्णायक

विधानसभा क्षेत्र में महेशपुर व पाकुड़िया दो प्रखंड हैं, जो बंगाल सीमा से सटे हैं। कुल वोटर 2 लाख, 16  हजार 18 हैं। 1 लाख 7 हजार 766 पुरुष व 1 लाख 8 हजार 252 महिला वोटर हैं। इस सीट पर आदिवासी वोटर निर्णायक होते हैं।

1 अनुमंडल: अनुमंडल का दर्जा दिलाना सबसे प्रमुख मुद्दा है। पाकुड़िया से पाकुड़ की अत्यधिक दूरी होने से यहां के लोगों को कुछ भी काम कराने में काफी परेशानी होती है।

2 सिंचाई :  कृषि प्रधान बहुल इलाका होने के बावजूद यहां सिंचाई की व्यवस्था नहीं है। अधिकतर किसान केवल धान की खेती पर ही निर्भर हैं।

3 शिक्षा :  महिला काॅलेज नहीं होने से छात्राओं को पढ़ाई के लिए दुमका या पाकुड़ जाना पड़ता है। ज्यादातर लड़कियां तो मैट्रिक-इंटर के बाद पढ़ाई छोड़ देती हैं।

4 स्वास्थ्य : महेशपुर, पाकुड़िया में स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं होने से लोग बंगाल जाकर इलाज कराते हंै। पाकुड़िया में 50 बेड का अस्पताल 10 साल में भी नहीं बन सका।

3 चुनावों का सक्सेस रेट : 2014 : स्टीफन मरांडी, जेएमएम-51886, देवीधन टूडू, भाजपा-45710, मिस्त्री सोरेन, जेवीएम-31276, 2009 : मिस्त्री सोरेन, जेवीएम-50746, देवीधन टूडू, भाजपा-28772, दुर्गा मरांडी, टीएमसी-15840, 2005 : सुफल मरांडी, जेएमएम-45520, देवीधन टूडू, भाजपा-32704

वोटर्स बोले...इस बार मुकाबला अच्छा होगा

  •  आज भी बुनियादी सुविधाएं नहीं है। करोड़ों का हेल्थ सेंटर अधूरा है। नेता केवल वादा करना जानते हैं। -किशोर कुमार, पाकुड़िया
  •  जीवन रेखा मानी जाने वाली बांसलोई का अस्तित्व खतरे में है। बालू उठाव पर किसी ने आवाज नहीं उठाई।   -भोला यादव, महेशपुर
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