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किस्सा:जब को-स्टार डायलॉग्स भूलने के चलते नहीं कर पा रहा था शूटिंग, चार घंटे इंतजार करने के बाद गुस्से में सेट छोड़कर चले गए थे अमरीश पुरी

2 महीने पहले
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अमरीश पुरी के पोते वर्धन पुरी ने अपने दादा से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से एक इंटरव्यू में शेयर किए हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने ये किस्से अपने दादा के दोस्तों से सुने हैं।

वर्धन ने कहा कि एक बार सतीश कौशिक ने उन्हें बताया था, 'एक फिल्म की शूटिंग के दौरान एक एक्टर अपनी लाइन्स ठीक से याद नहीं कर पा रहा था। दादू (अमरीश पुरी) का उस दिन केवल 15 मिनट का सीन था और वह पूरी तरह से तैयार थे लेकिन वो को-एक्टर अपना सीन पूरा नहीं कर पा रहा था। दादू को इस वजह से पूरे चार घंटे तक अपने सीन के लिए इंतजार करना पड़ा। इस दौरान उन्हें जमकर गुस्सा आया और वह बेहद अपसेट हुए क्योंकि असिस्टेंट्स के पास भी उनके लिए कोई जवाब नहीं था फिर गुस्से में वह सेट छोड़कर चले गए।इसके बाद सतीश जी ने दादू को पूरी बात समझाई और उनका गुस्सा शांत करवाया। इसके बाद दादू ने सेट पर आकर अपने हिस्से की शूटिंग की।'

स्क्रीनटेस्ट में फेल हुए तो करने लगे इंश्योरेंस कंपनी में काम

अमरीश पुरी के दो बड़े भाई मदन पुरी और चमन पुरी पहले ही एक्टिंग की दुनिया में मुकाम बना चुके थे। हालांकि, अमरीश के लिए सफर आसान नहीं रहा। कहा जाता है कि वे पहले स्क्रीन टेस्ट में फेल हो गए थे। इसके बाद वे इम्प्लॉइज स्टेट इंश्योरेंस कॉरपोरेशन में काम करने लगे।

मराठी फिल्म में किया था पहला रोल

कम ही लोग जानते होंगे कि अमरीश पुरी ने फ़िल्मी करियर की शुरुआत मराठी सिनेमा से की थी। 1967 में आई मराठी फिल्म 'शंततु! कोर्ट चालू आहे' में करियर का पहला रोल किया था। इस फिल्म में अमरीश ने एक अंधे का किरदार प्ले किया था, जो रेलवे कंपार्टमेंट में गाने गाता रहता है।

39 साल की उम्र में मिला बॉलीवुड में रोल

अमरीश पुरी को बॉलीवुड में पहला रोल 39 साल की उम्र में मिला था। सुनील दत्त और वहीदा रहमान स्टारर फिल्म 'रेशमा और शेरा' में उन्होंने रहमत खान नाम के शख्स का रोल प्ले किया था।

'कच्ची सड़क' थी आखिरी फिल्म

अमरीश ने 1967 से 2005 के बीच 400 से ज्यादा फिल्मों में काम किया था। 2006 में (उनके निधन के बाद) रिलीज हुई 'कच्ची सड़क' उनकी आखिरी फिल्म थी। अमरीश पुरी ने बॉलीवुड के अलावा कन्नड़, मराठी, पंजाबी, मलयालम, तेलुगु, तमिल फिल्मों में भी काम किया। अमरीश पुरी को हैट का पैशन था। उनके कलेक्शन में 200 से ज्यादा देसी-विदेशी हैट थी।

इन फिल्मों में किया काम

'रेशमा और शेरा' (1971), 'जानी दुश्मन' (1979), कुर्बानी (1980), 'आक्रोश' (1980), 'नसीब' (1981), 'विधाता' (1982), 'शक्ति' (1982), 'हीरो' (1983), 'कुली' (1983), 'मेरी जंग' (1985), 'नगीना' (1986), 'मिस्टर इंडिया' (1987), 'वारिस' (1988), 'घायल' (1990), 'सौदागर' (1991), 'विश्वात्मा' (1992), 'करन-अर्जुन' (1995), 'गदर' (2001), 'नायक' (2001), 'ऐतराज' (2004), 'हलचल' (2004) सहित 400 फिल्मों में काम किया।

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