अरुण गोविल का जन्मदिन:कभी चेन स्मोकर हुआ करते थे 'टीवी के राम', शूटिंग के दौरान फैन ने लगाई ऐसी डांट कि फिर कभी सिगरेट को हाथ नहीं लगाया

13 दिन पहले
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दूरदर्शन पर पहली बार रामायण का प्रसारण 25 जनवरी 1987 में शुरू हुआ और आखिरी एपिसोड 31 जुलाई 1988 को देखने को मिला था। सीरियल में अभिनेता अरुण गोविल ने राम का किरदार निभाया था और वे अब तक भगवान राम की छवि से बाहर नहीं निकल पाए हैं। शो के प्रसारण के 34 साल बाद भी गोविल को आज भी टीवी के राम के रूप में ही पहचाना जाता है। हालांकि वे एक्टर नहीं बनना चाहते थे, उनका सपना तो बिजनेसमैन बनने का था और इसी सपने के साथ वे मुंबई पहुंचे थे।

एक इंटरव्यू के दौरान खुद अरुण ने बताया था कि राम का किरदार निभाने के बाद लोग उन्हें असल में भगवान राम मानने लगे थे। वे जहां जाते थे लोग उन्हें देखकर हाथ जोड़ने लगते और उनके पैर छूने लगते थे। टीवी पर 'रामायण' सीरियल देखते समय लोग अगरबत्ती तक जलाने लगे थे। इतना ही उन्हें फिल्मों में भी इसी तरह के रोल ऑफर होने लगे थे, जिसकी वजह से उन्होंने एक्टिंग से दूरी बना ली थी।

राम नगर में जन्मे थे टीवी के राम
अरुण गोविल का जन्म 12 जनवरी, 1958 को राम नगर (मेरठ) उत्तर प्रदेश में हुआ था। जब वे मेरठ यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे, तब उन्होंने कुछ नाटकों में काम किया था। टीनएज लाइफ उनकी सहारनपुर में बीती। अरुण के पिता चाहते थे कि वे सरकारी नौकरी करें, लेकिन खुद अरुण ऐसा कुछ करना चाहते थे, जो हमेशा के लिए उनको यादगार बन जाए। इसी वजह से वे बिजनेस करने का सपना लेकर मुंबई आ गए और बाद एक्टिंग का रास्ता चुन लिया।

बड़े परदे पर पहला ब्रेक
अरुण को पॉपुलैरिटी भले ही छोटे परदे के राम बनने के बाद मिली, लेकिन उन्हें पहला ब्रेक 1977 में ताराचंद बडजात्या की फिल्म 'पहेली' में मिला। उसके बाद उन्होंने 'सावन को आने दो' (1979), 'सांच को आंच नहीं' (1979) और 'इतनी सी बात' (1981), 'हिम्मतवाला' (1983), 'दिलवाला' (1986), 'हथकड़ी' (1995) और 'लव कुश' (1997) जैसी कई बॉलीवुड फिल्मों में अहम भूमिका निभाई।

राम से पहले मिला विक्रमादित्य का किरदार
रामानंद सागर ने अरुण गोविल को सबसे पहले सीरियल 'विक्रम और बेताल' में राजा विक्रमादित्य का रोल दिया था। इसकी अपार सफलता के बाद 1987 में 'रामायण' में भगवान राम का रोल अरुण ने निभाया। इस रोल से वे इतने पॉपुलर हुए कि आज भी लोग उन्हें टीवी के राम कहकर ही बुलाते हैं। वैसे, अरुण ने 'लव कुश' (1989), 'कैसे कहूं' (2001), 'बुद्धा' (1996), 'अपराजिता', 'वो हुए न हमारे' और 'प्यार की कश्ती में' जैसे कई पॉपुलर टीवी सीरियल्स में काम किया है।

फैन की डांट के बाद छूटी सिगरेट

एक इंटरव्यू में अरुण गोविल ने खुलासा किया था कि एक बार वह एक तमिल बाइलिंगुअल फिल्म की शूटिंग कर रहे थे तभी शूटिंग के दौरान उन्हें सिगरेट की तलब लगी। उस वक्त वो चेन स्मोकर हुआ करते थे तो वो कोने में जाकर सिगरेट पीने लगे। एक शख्स किसी अन्य भाषा में उन्हें भला बुरा कहने लगा तभी उन्होंने पास खड़े दूसरे व्यक्ति से पूछा कि वो शख्स उन्हें क्या कह रहा है? तब उन्हें मालूम चला कि वो व्यक्ति उनका फैन था लेकिन उन्हें सिगरेट पीता देख उसे गुस्सा आ गया और वो बोला कि हम आपको भगवान मानते हैं और आप सिगरेट पी रहे हैं। इस घटना के बाद अरुण गोविल ने बताया कि उन्होंने कभी सिगरेट को हाथ नहीं लगाया।

अरुण का परिवार
अरुण अपने पिता की आठ संतानों (6 बेटे और दो बेटियां) में चौथे नंबर पर आते हैं। उनकी पत्नी का नाम श्रीलेखा गोविल है। अरुण और श्रीलेखा की दो संतानें हैं। बेटे का नाम अमल और बेटी का नाम सोनिका गोविल है।

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