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63 साल के हुए टीवी के राम:राम के रोल के लिए रिजेक्ट कर दिए गए थे अरुण गोविल, लेकिन लुक टेस्ट में उनकी मुस्कान देख रामानंद सागर को बदलना पड़ा था अपना फैसला

5 दिन पहले
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90 के दशक में जब रामानंद सागर की रामायण शुरू हुई थी तो इसमें विभिन्न भगवानों का किरदार निभाने वाले कलाकार घर-घर में प्रसिद्ध हो गए थे। अरुण गोविल भी ऐसे ही कलाकारों में से एक हैं। अरुण गोविल ने रामानंद सागर की रामायण में राम का किरदार निभाया है। 12 जनवरी को अरुण गोविल 63 साल के हो गए हैं।

आज भी जब हम कहीं भगवान राम का नाम लेते हैं तो एक बार इस शख्स की तस्वीर जरूर में दिमाग में आ जाती है और इसका सीधा सा कारण छोटे पर्दे पर प्रसारित होने वाली रामायण है। पुरानी पीढ़ी के लोग तो इन्हें टीवी पर देखते ही हाथ जोड़ने लगते थे और सार्वजनिक जगह पर देखते ही पैर छूने लगते थे।

वैसे, अरुण पहले राम के किरदार के लिए रिजेक्ट कर दिए थे। वजह थी कि रामानंद सागर को उनकी स्मोकिंग की लत बिलकुल पसंद नहीं आई थी। उनका मानना था कि ऐसी बुरी आदतों वाले व्यक्ति को वह राम कैसे बना सकते हैं लेकिन अरुण ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वह इस आदत को छोड़ देंगे। तब भी बात नहीं बनी तो अरुण ने लुक टेस्ट में अपनी मुस्कान का इस्तेमाल किया जो कि काम कर गई और रामानंद सागर उन्हें राम के रोल में साइन करने के लिए मजबूर हो गए।

मेरठ में जन्मे थे टीवी के राम

अरुण गोविल का जन्म 12 जनवरी, 1958 को मेरठ, उत्तर प्रदेश में हुआ था। जब वे मेरठ यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे, तब उन्होंने कुछ नाटकों में काम किया था। टीनएज लाइफ उनकी सहारनपुर में बीती। अरुण के पिता चाहते थे कि वे सरकारी नौकरी करें, लेकिन खुद अरुण ऐसा कुछ करना चाहते थे, जो हमेशा के लिए उनको यादगार बन जाए। इसी वजह से वे बिजनेस करने का सपना लेकर मुंबई आ गए और बाद एक्टिंग का रास्ता चुन लिया।

बड़े परदे पर पहला ब्रेक

अरुण को पॉपुलैरिटी भले ही छोटे परदे के राम बनने के बाद मिली, लेकिन उन्हें पहला ब्रेक 1977 में ताराचंद बडजात्या की फिल्म 'पहेली' में मिला। उसके बाद उन्होंने 'सावन को आने दो' (1979), 'सांच को आंच नहीं' (1979) और 'इतनी सी बात' (1981), 'हिम्मतवाला' (1983), 'दिलवाला' (1986), 'हथकड़ी' (1995) और 'लव कुश' (1997) जैसी कई बॉलीवुड फिल्मों में अहम भूमिका निभाई।

राम से पहले मिला विक्रमादित्य का किरदार

रामानंद सागर ने अरुण गोविल को सबसे पहले सीरियल 'विक्रम और बेताल' में राजा विक्रमादित्य का रोल दिया था। इसकी अपार सफलता के बाद 1987 में 'रामायण' में भगवान राम का रोल अरुण ने निभाया। इस रोल से वे इतने पॉपुलर हुए कि आज भी लोग उन्हें टीवी के राम कहकर ही बुलाते हैं। वैसे, अरुण ने 'लव कुश' (1989), 'कैसे कहूं' (2001), 'बुद्धा' (1996), 'अपराजिता', 'वो हुए न हमारे' और 'प्यार की कश्ती में' जैसे कई पॉपुलर टीवी सीरियल्स में काम किया है।

अरुण का परिवार

अरुण अपने पिता की आठ संतानों (6 बेटे और दो बेटियां) में चौथे नंबर पर आते हैं। उनकी पत्नी का नाम श्रीलेखा गोविल है। अरुण और श्रीलेखा की दो संतानें हैं। बेटे का नाम अमल और बेटी का नाम सोनिका गोविल है।

कैसे की थी तैयारी

एक इंटरव्यू में जब अरुण से पूछा गया कि राम के किरदार को जीवंत करने के लिए उन्होंने किस तरह की तैयारी की? तो उन्होंने जवाब में कहा, "मैंने कोई फिल्म नहीं देखी। अपने घरों में उनकी जो तस्वीरें हैं, वही देखी थीं। उनके तमाम गुणों के आधार पर उनकी कल्पना की थी। शूटिंग से पूर्व हमने राम के लुक में फोटो निकाली थी, यह देखने के लिए कि हम कैसे दिखते हैं।"

'रामायण' के साइड इफेक्ट्स

एक इंटरव्यू में जब अरुण से पूछा गया था कि 'रामायण' के बाद लोग उन्हें राम मानने लगे थे तो क्या उन्हें इसकी वजह से किसी तरह की मुश्किल का सामना करना पड़ा था? जवाब में उन्होंने कहा, "'रामायण' के बाद मुझे कमर्शियल फिल्में मिलनी बंद हो गई थीं। हर बात के निगेटिव-पॉजिटिव पहलू होते हैं। 'रामायण' से मुझे जो कुछ मिला, वह शायद मैं कितनी भी फिल्में कर लेता, मुझे नहीं मिलता। भगवान राम ने अपना नाम मेरे साथ जोड़ दिया। और क्या देगा भगवान? मैं इंसान ही बना रहूं, बहुत है मेरे लिए।"

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