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दादामुनि की बर्थ एनिवर्सरी:अशोक कुमार को वकील बनाना चाहते थे पिता, एग्जाम में फेल होने के बाद पिता के डर से आए मुंबई और बन गए हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के पहले सुपरस्टार

11 दिन पहले
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हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के पहले सुपरस्टार अशोक कुमार का जन्म 13 अक्टूबर 1911 में हुआ था। अशोक चार भाई बहनों, सती देवी, कल्याण (अनूप कुमार, स्क्रीन नेम), आभास (किशोर कुमार, स्क्रीन कुमार) में सबसे बड़े थे। अशोक के पिता कुंजीलाल गांगुली एक वकील थे, जबकि उनकी मां एक गृहिणी थीं। अशोक ने अनजाने में एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा था, जहां उनके टैलेंट ने उन्हें भारतीय सिनेमा का पहला सुपरस्टार तक बना दिया था। आज उनकी बर्थ एनिवर्सरी के खास मौके पर आइए जानते हैं उनसे जुड़ी कुछ खास बातें-

फेल होकर पिता से छिपने मुंबई आए थे अशोक कुमार

भागलपुर में जन्मे अशोक कुमार के पिता कुंजीलाल उन्हें अपनी ही तरह एक वकील बनाना चाहते थे। इस पर अशोक को भी कोई एतराज नहीं था। वकालत करने के लिए कुंजीलाल ने अशोक के एडमिशन के लिए आवेदन दिया था, हालांकि जब एग्जाम हुए तो अशोक फेल हो गए। पिता के डर से अशोक अगले एग्जाम तक छिपने के लिए अपनी बहन सती देवी के घर, मुंबई चले गए। सती देवी के पति शशाधर मुखर्जी बॉम्बे टॉकीज में एक बड़े पद में थे। अशोक ने खर्च चलाने के लिए शशाधर से उनकी बॉम्बे टॉकीज में नौकरी लगवाने की गुजारिश की जिसके बाद उन्हें बॉम्बे टॉकीज के लैबोरेटरी असिस्टेंट के पद पर नौकरी मिल गई।

ये बात 1930 के शुरुआत की थी जब अशोक को सैलेरी के रू में तीन महीने के 75 रुपए मिले करते थे। उस समय के मुताबिक ये बहुत ज्यादा थे। समय बीतते हुए अशोक का अपने पद पर मन लग गया और वो पिता को वकालत ना करने के लिए मनाने में लग गए, हालांकि ये आसान नहीं था।

एक दिन अचानक ही मिल गया अभिनेता बनने का ऑफर

1936 की फिल्म जीवन नैया की शूटिंग लगभग पूरी हो चुकी थी, जिसमें देविका रानी और नज्म-उल-हसन लीड रोल में थे। शूटिंग के दौरान दोनों लीड के बीच अनबन हो गई। देविका रानी बॉम्बे टॉकीज के मालिक हिमांशु राय की पत्नी थीं, ऐसे में हिमांशु ने नज्म-उल-हसन को तुरंत फिल्म से निकाल दिया। हिमांशु ने ऑर्डर दिया कि अशोक उनकी जगह लेंगे। फिल्म के डायरेक्टर फ्रांज ऑस्टन का मानना था कि अशोक का लुक हीरो का नहीं हैं, लेकिन उनकी बात बॉम्बे टॉकीज के मालिक के आगे कट गई और अशोक फिल्म के हीरो बन गए।

पहली फिल्म से पहले अशोक अपने जन्म के समय मिले नाम कुमुदलाल गांगुली से पहचाने जाते थे, लेकिन फिल्म के दौरान उन्हें स्क्रीन नेम अशोक कुमार दिया गया।

हीरो बनते ही टूट गई शादी

उस समय फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा होना शर्मिंदगी की बात समझी जाती थी। अशोक कुमार ने एक बार कहा था कि उस जमाने में कॉल गर्ल हीरोइन बना करती थीं और दलाल हीरो बन जाया करते थे। जैसे ही अशोक 1943 की फिल्म किस्मत के बाद रातों-रात स्टार बने तो उनके घर में हड़कप मच गया। उस समय अशोक की शादी तय हो चुकी थी, लेकिन जैसे ही घरवालों को खबर हुई की वो हीरो बन गए हैं तो तुरंत शादी टूट गई। अशोक की मां खूब रोईं और पिता नौकरी के कागज लेकर नागपुर पहुंच गए। पिता ने अशोक से एक्टिंग छोड़ने की खूब जिद की लेकिन बॉम्बे टॉकीज के मालिक हिमांशु राय ने अकेले में बात कर उन्हें आखिरकार राजी कर लिया।

1 करोड़ कमाई करने वाली पहली हिंदी फिल्म थी किस्मत

साल 1943 में रिलीज हुई फिल्म किस्मत में अशोक कुमार एंटी-हीरो रोल में थे। फिल्म ने 1 करोड़ का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन किया था, जो हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की इतनी कमाई करने वाली पहली फिल्म थी। फिल्म से अशोक कुमार को ऐसा स्टारडम मिला कि वो जहां भी जाया करते थे, वहां से भीड़ हटाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ता था। इसके बाद अशोक ने बतौर एक्टर और बतौर प्रोड्यूसर कई बड़ी फिल्में इंडस्ट्री को दीं।

जन्मदिन के दिन हुआ भाई किशोर कुमार निधन

अशोक कुमार के छोटे भाई किशोर इंडस्ट्री के सबसे बेहतरीन सिंगर बनकर उभरे थे। दोनों के बीच खूब प्यार था। किशोर कुमार का निधन दुर्भाग्य से बड़े भाई अशोक के जन्मदिन के दिन, 13 अक्टूबर 1987 में हुआ था। छोटे भाई के निधन से अशोक को ऐसा सदमा लगा कि उन्होंने हमेशा के लिए अपना जन्मदिन मनाना छोड़ दिया।

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