पिता सुन नहीं पाते थे, मां को दिखता नहीं था:3.8 फीट के बरकत अब कर्नाटक के कॉमेडी खिलाड़ी, कभी ऑर्केस्ट्रा में करते थे काम

4 महीने पहलेलेखक: उमेश कुमार उपाध्याय

आज हम बात करेंगे एक ऐसे कलाकार की जिसका कद महज 3.8 फीट है, मगर जिंदगी में मुश्किलें बड़ी-बड़ी झेलीं। नाम है बरकत अली। जब 5-6 साल के थे तो गांव से सर्कस वाले चुपचाप इन्हें उठा ले गए। घरवाले काफी झगड़े के बाद इन्हें छुड़ा पाए। बचपन में मुंह से खून आने की बीमारी थी और जुबान दो हिस्सों में कटी हुई थी। पिता सुन नहीं पाते थे और मां को रात को दिखना बंद हो जाता था। ऑर्केस्ट्रा में 50 रु. रोज में काम किया। लोग चिढ़ाते थे कि बौना है तेरी शादी नहीं होगी, लेकिन बरकत ने शादी की वो भी लव मैरिज, एक सामान्य कद की लड़की से। किस्मत थोड़ी पलटी तो फिल्मों में काम मिला, एक फिल्म के 3 लाख तक मिलने लगे। भारत ही नहीं, लंदन में भी इनके नाम के चर्चे हुए।

पढ़िए, फिल्म कलाकार बरकत अली की कहानी उन्हीं की जुबानी...

पिता सुन नहीं सकते थे, मां को रात में नहीं दिखता था

मेरा जन्म कर्नाटक के गांव चित्रादुर्गा में 7 मई 1984 को हुआ। बचपन से ही स्ट्रगल शुरू हो गया। पिता सुन नहीं पाते थे, मां को रात में दिखाई नहीं देता था। चौथी क्लास में पहुंचे तो मां को दिन में भी दिखना बंद हो गया। पिता कुली थे। तंगहाली का आलम था। पिता को शराब की लत थी तो वो घर भी कम ही आते थे। घर में मां हमारा ख्याल रखती थी, लेकिन उसे रात में दिखना बंद हो जाता था तो हम 5 भाई और 1 बहन उनका ख्याल रखते थे।

मुंह से खून आता था, जुबान दो हिस्सों में थी

बचपन में जब मेरी मां मुझे गोद में ऊपर उठाती थी, तो उसके पूरे कपड़े खून से सन जाते थे। मेरे मुंह से खून आता था, लेकिन मैं रोता ही नहीं था। मां डर जाती थी कि खून कहां से आ रहा है। मेरी जुबान के दो सिरे थे। जब मां गोद से उतारती थी, तो मैं मछली जैसे लहराते हुए पूरी जमीन में घूमता था। घर के पास से गुजरने वाले सब गाड़ी रोककर मुझे देखने आते थे। उस वक्त मैं बहुत छोटा था। सब बहुत हैरानी से देखते थे कि ये बच्चा ऐसा कैसे कर सकता है। मां मुझे देखकर परेशान रहती थी तो उसने दादा पहाड़ जाकर मन्नत मांगी, जिससे मैं ठीक हो सका। कुछ समय बाद मेरे मुंह से खून आना बंद हो गया और मेरी जुबान भी ठीक हो गई।

सर्कस वालों ने किडनैप कर लिया, घरवालों ने छुड़वाया

बचपन में एक बार सर्कस वाले मुझे उठाकर ले गए थे। प्रभास सर्कस यहां बहुत फेमस था। वो लोग हमारे गांव आए थे, जहां वो टेंट लगाकर रहते थे। उन लोगों ने मुझे देखा था। पहले तो उन्होंने मेरे मां-बाप से मुझे ले जाने का पूछा, लेकिन जब उन्होंने भेजने से मना किया तो एक दिन वो मुझे जीप में किडनैप करके ले गए। वो लोग मुझे खिलाते-पिलाते थे। मैं वहां भी खुश था। गांव के ही किसी बच्चे ने देखा था कि वो लोग मुझे ले जा रहे हैं। उन बच्चों ने मेरे घर में बताया। मेरे मां-बाप बहुत परेशान हुए। बहुत ढूंढने के बाद मैं मिला। उस समय मैं सिर्फ 5-6 साल का था। जब मेरे घर वाले सर्कस वाले पहुंचे तो बहुत हंगामा हुआ। वो लोग तब भी यही कहते रहे कि इस बच्चे को हमें दे दो, लेकिन घरवालों ने ये कहते हुए इनकार कर दिया कि ये हमारा बहुत लाडला बच्चा है।

मेरी पर्सनैलिटी ऐसी है कि घरवाले सब मुझे बहुत प्यार करते थे। मैं कहीं भी जाता, तो लोग कभी मुझे साइकिल में बैठाकर छोड़ते तो कभी बाइक में। कोई बुलाता था तो कभी एक रुपया देता कभी दो रुपया दे देता था। मैंने कन्नड़ मीडियम से पढ़ाई की है। स्कूल में मैंने डांस सीखा, फिर जहां भी फंक्शन होता था, मैं जाकर करता था। उसी समय मैंने सोचा कि कुछ करना है, कुछ हासिल करना है। लोग कहते थे ये टिंगा सा आदमी क्या कर सकता है। मैं पढ़ाई में बहुत मेहनत करता था और स्कूल में फर्स्ट आता था। मैं गाने, गेम, लिखाई, डांस हर एक्टिविटी में हिस्सा लेता था। मेरी मां मुझे रोज बैठाकर समझाती कि बेटा तुझे कुछ करना चाहिए। तू छोटा है दुनिया से पीछे रह जाएगा। मेरे पिता शराबी थे, उन्होंने कभी मुझे टाइम नहीं दिया, वो ज्यादातर घर से बाहर ही रहते थे। हम बहुत गरीब थे। बारिश में घर में पानी भर जाता था।

बचपन में ठान लिया था कुछ अलग करना है

जब मैं छठी क्लास में था, तब मैंने ठान लिया कि कुछ करना है। तब एक ऑर्केस्ट्रा वाला हमारे घर आया। उसने मेरी मां से कहा कि आप अपने बेटे को हमारे प्रोग्राम में भेजिए, हम उसे अच्छे से हाईलाइट करेंगे। हम उसे कुछ बनाएंगे। मां ने उनसे कहा, हमारा बेटा नाच-गाना नहीं करेगा, वो पढ़ने वाला बच्चा है, उसे इन सब से डिस्ट्रैक्ट मत करो। मां ने उसे भगा दिया। मैं बार-बार उस ऑर्केस्ट्रा वाले के घर जाता और उससे कहता कि मां से बात करो, मैं आऊंगा। मां बार-बार इनकार कर देती थी। एक बार मैं अपनी मां के पास गया और कहा, मुझे कुछ हासिल करना है। मैंने भाइयों से पैसे मांगे, उन्होंने भी इनकार कर दिया। फिर मैंने खुद वो ऑर्केस्ट्रा जॉइन कर लिया। मुझे रोज के 50 रुपए मिल जाया करते थे।

मैं स्टेज पर डांस करता था और देखने वाले मुझे 100, 200, 500 रुपए टिप दिया करते थे। मैं वो पैसे ले जाकर घर में देता था तो घरवाले खुश हो जाते थे। देखते-ही-देखते मुझे और पैसे मिलने लगे। मेरे पास कपड़े तक नहीं थे। मैं पैसे कमाता और उनसे कपड़े और किताबें खरीदता।

जब लंदन में हुई टैलेंट की तारीफ

बेंगलुरु में एक रवींद्र कला क्षेत्र में मैं 2003 में स्टेट लेवल डांस कॉम्पिटिशन में फर्स्ट आया। उसमें मुझे एक शील्ड और 5 हजार रुपए ईनाम मिले। मैंने अमिताभ के गाने गंगा किनारे वाला पर डांस किया था। मेरी तरह ही एक मेरा बौना दोस्त स्पोर्ट्स में था। मैंने उससे कहा मुझे भी स्पोर्ट्स में जाना है। तब 2009 में पूरे गिड्डे (बौने) लोगों को जमा करके वर्ल्ड डांस गेम्स नदर्न आइलैंड कॉम्पिटिशन होना था। गिड्डे लोगों का सिलेक्शन चल रहा था। उन्हें फुटबॉल से लेकर रनिंग के लोग भी चाहिए थे। मेरा सिलेक्शन रनिंग में हुआ। कर्नाटक में मेरा सिलेक्शन हुआ और टूर्नामेंट लंदन में हुआ। मैंने वहां 3 सिल्वर मेडल जीते। लंदन के अखबारों में मेरे नाम के साथ बड़ी तस्वीर छपी। भारत में भी मैंने कई गोल्ड मेडल जीते।

स्पोर्ट्स में मेडल जीतते हुए मुझे फिल्मों की लिंक मिली। हमारे गांव के ऑर्केस्ट्रा में एक आदमी एक टिंगे आदमी की तलाश में था। उसने कहा- तुझे करना है तो जाकर बात कर ले वहां तुझे 200 रुपए रोज के मिलेंगे। मैंने कहा मुझे पैसे से मतलब नहीं है, लेकिन एक्टिंग करना है। मेरी पहली फिल्म कन्नड़ की KA99B333 थी। इसका टाइटल ऑटो के नंबर प्लेट पर था। वहीं काम करते-करते मुझे दूसरी फिल्म अभिमानी मिली। ऐसे ही फिल्मों का सिलसिला आगे बढ़ता गया।

बचपन में लोग कहते थे बौना है तेरी शादी नहीं होगी

बचपन में मेरे साथ खेलने वाले मुझे चिढ़ाते थे कि ये बौना है इसकी शादी नहीं हो सकती। मैं सबको मारता था। मैं छोटा था, लेकिन मैं किसी से डरता नहीं था। मुझे मेरे बड़े भाई का भी सपोर्ट था। मैं उन लोगों से कहता था कि जो मैं करके दिखाता हूं वो तू करके दिखा। मैं डांस करूंगा क्या तू मेरे जैसे करके दिखा सकता है। वहीं स्कूल के टीचर मुझे बहुत पसंद करते थे। कोई मुझे मारता नहीं था।

घर पर भी सब कहते थे, तू बच्चा है तेरी शादी नहीं होगी। मैं अपनी मां से कहता था, मेरी शादी करवा दो, मैं ऑर्केस्ट्रा में जाता हूं, वहां लड़कियां मुझे खूब पसंद करती हैं। मेरे घरवाले कहते थे, तू बच्चा है, जिससे शादी करेगा, उसकी जिंदगी बर्बाद कर देगा। मैं कहता था आप करवा दो, वर्ना मैं बाहर कहीं शादी करके घर बसा लूंगा।

पत्नी और दो बेटियों के साथ बरकत अली।
पत्नी और दो बेटियों के साथ बरकत अली।

सामान्य कद की लड़की से की लव मैरिज

एक जमाने में मैं बहुत पैसे कमाता था, बहुत फेमस था। मेरे मामू की बेटी, बचपन से ही मजाक किया करती थी कि मैं तुमसे ही शादी करूंगी। देखते ही देखते वो सीरियसली मुझे पसंद करने लगी। फिर हमने घरवालों को मनाया और शादी कर ली। शादी में ऑर्केस्ट्रा बुलाया था, मैंने डांस भी किया। शादी के एक साल बाद बच्चा भी हुआ। अब दो बेटियां हैं, दोनों सामान्य कद की हैं, कोई शारीरिक दिक्कत नहीं है।

कोरोना काल में घिर गया तंगहाली में

कोरोना काल में सबसे ज्यादा तकलीफें हुईं। काम मिलना बंद हो गया, शोज भी नहीं होते। पैसा खत्म हो गया। खाने तक के लिए पैसे नहीं थे। जैसे-तैसे हमने दिन गुजारे। अब भी मैं ऑर्केस्ट्रा में काम करता हूं। अब भी मुझे पैसों की जरूरत होती है, तो यहां के लोग मुझे बुला लेते हैं। मैं भी एक-दो प्रोग्राम करने के बाद अपनी वाइफ और बच्चों के साथ घर में समय बिताता हूं। मैं ज्यादा रिस्क नहीं लेता।

बरकत अली जो कभी खाने के भी मोहताज थे, आज उनके पास खुद का घर, कार, बाइक और हर जरूरत का सामान है।

हिंदी फिल्मों में काम करने का सपना रखते हैं बरकत अली

कन्नड़ फिल्मों में पहचान बनाने के बाद अब बरकत हिंदी फिल्मों में काम करने की इच्छा रखते हैं। वो चाहते हैं कि हिंदी फिल्मों में काम मिले, जिससे उन्हें पूरे देश के लोग जान सकें।

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