भास्कर इंटरव्यू:रोहित शेट्‌टी ने जब वसूली का कॉमेडी कैरेक्टर सुनाया था तब मैं डर गया था: मुकेश तिवारी

एक महीने पहलेलेखक: शशांक मणि पाण्डेय

बॉलीवुड एक्टर मुकेश तिवारी जिन्हें हम गोलमाल सीरीज के 'वसूली भाई' के नाम से पहचानते हैं। मुकेश ने दैनिक भास्कर से इस खास बातचीत में उन्होंने एक्टिंग टेक्निक और अपने कैरेक्टर प्रिप्रेशन जुड़े कुछ खास किस्से शेयर किए। पढ़िए बातचीत का खास अंश:

फिल्मों में पहले की एक्टिंग और अब की एक्टिंग टेक्निक में किस तरह का बदलाव आया है?
मूलत: अभिनय तो अभिनय ही है। एक जमाना था जब इंफेसिस वाली एक्टिंग हुआ करती थी। जिसमें ऑडियंस को जता-जता कर एक्टिंग की जाती थी, एक्टर को भ्रम रहता था कि शायद ऑडियंस को समझ नही आया। लेकिन वर्तमान में हम ऑडियंस के और पास आ गए हैं। टीवी और वेब के माध्यम से तो अब इंफेसिस्ज्म वाली एक्टिंग खत्म हो गई है।

अब एक नए किस्म का रिएलिज्म पैदा हुआ है। पहले बहुत ज्यादा मैनरिज्म में काम होता था, एक शैली पे काम होता था। वक्त के साथ-साथ वो शैली समाप्त हो गई। पहले एक्टर एक इमेज में कैद हो जाता था, लेकिन अब ऑडियंस ने उसे खत्म कर दिया है। अभी बहुत ही सहज और बिना जताने वाली एक्टिंग का समय चल रहा है। मुझे लगता है ये बेहद शानदार समय है।

जघीरा, बच्चा यादव और वसूली कौन सा जॉनर आपको पसंद है?
अभिनेता के लिए सबसे अच्छी चीज होती है कि उसको वैरायटी ऑफ रोल मिलें। मैं लकी हूं कि अलग-अलग डायरेक्टर्स ने प्रोड्यूसर्स ने मेरे ऊपर विश्वास किया। जघीरा का अपना चैलेंज था मेरी पहली फिल्म थी। वो दौर विलेन का दौर था और शायद फिल्म के बाद विलेन का दौर समाप्त हो गया हिंदी सिनेमा से।

गंगाजल के बच्चा यादव के लिए अलग प्रकार के चैलेंज थे। वो इक्सट्रोवर्ट इंट्रोवर्ट और बीच में फसा हुआ आदमी है, तो वो द्वंद निकालने में बहुत मजा आया था। वसूली की बात है तो उसे जनता ने बनाया है। तीनों जॉनर अलग-अलग हैं। चुनौतियां अपनी-अपनी हैं।3

रोहित शेट्‌टी की फिल्मों मे आप दिखते हैं क्या कारण हैं? उनकी फिल्में या उनका काम?
रोहित शेट्‌टी जी की मैं पहली 'जमीन' फिल्म से साथ हूं, वो एक्शन फिल्म थी। रोहित जी का एक स्वभाव है कि वो अपनी टीम बना कर रखते हैं। अकेला मैं ही नही हूं, बहुत से एक्टर्स हैं जो उनकी फिल्मों में दिखेगें। उनका एक सिद्दांत है, उनके यहां वन-वे है। आप अंदर तो आ सकते हो उनकी सहमति से और बाहर जाना आपकी सहमति से होता है। क्योंकि वो कभी नहीं कहते कि मेरी टीम छोड़कर चले जाओ। यही उनकी खासियत है। अभी हाल ही में उनकी अपकमिंग फिल्म 'सर्कस' में भी उनके साथ काम किया है।

ओटीटी पर कई एक्टर्स नज़र आ रहे हैं, आपके क्या प्लान हैं?
इसको स्वीकार करना पडे़गा जैसे पहले रंगमंच था फिर टीवी और सिनेमा का बोल-बाला हुआ और अब OTT का है। कोरोना काल में तो OTT ने ही सबको खुश रखा है उनको व्यस्त रखा है। ये नया मंच है, नई शैली है और तरीका है अपनी बातचीत रखने का। कंटेंट बहुत अच्छा है, नया टैलेंट अच्छा आ रहा है। इसको हमें सहर्ष स्वीकार करना चाहिए। इसमें कोई भय नहीं होना चाहिए कि सिनेमा खत्म हो जाएगा या उसकी ऑडियंस से नहीं रहेगी।

वसूली भाई ने आपको एक अलग पहचान दिलाई है, उस कैरेक्टर की तैयारी कैसी की थी आपने कोई किस्सा?
जब मुझसे रोहित जी ने कहा कि मैं आपसे कॉमेडी करवाऊंगा तो मैं डर गया था। क्योंकि तब तक ये था मन में कि मैंने हमेशा गंभीर रोल किए हैं। एक एक्टर को अपने आपको तोड़ना थोड़ा मुश्किल होता है और खासकर स्वीकार करना। जबतक आप लोगों को रुलाते हैं गंभीर काम करते हैं तबतक वो आपको संजीदगी से लेते हैं। लेकिन कॉमेडी करने के बाद वो संजीदगी खत्म हो जाती है। वो भी एक डर रहता है।

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