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भास्कर इंटरव्यू:'नो मीन्स नो' के डायरेक्टर विकाश वर्मा ने बताया- 80 फीसदी पोलैंड में शूट हुई फिल्म, माइनस 31 डिग्री में भी करनी पड़ी शूटिंग

3 दिन पहलेलेखक: उमेश कुमार उपाध्याय
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फिल्म 'नो मिन्स नो' पहली इंडो-पोलिश फिल्म होगी, जो एक लड़की की सच्ची घटना पर आधारित है। इस फिल्म को विकाश वर्मा ने डायरेक्ट किया है और जी 7 फिल्म्स पोलैंड ने प्रोड्यूस। इंडिया से फिल्म में गुलशन ग्रोवर, शरद कपूर, ध्रुव वर्मा आदि हैं। नतालिया बेक फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रही हैं। इस फिल्म के पोस्ट प्रोडक्शन पर काम चल रहा है और इसे 5 नवंबर को दुनियाभर के सनेमाघरों में रिलीज करने का प्लान है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत के दौरान, फिल्म के निर्देशक विकाश वर्मा ने बताया कि यह फिल्म 80 फीसदी पोलैंड में शूट हुई है। साथ ही फिल्म को माइनस 31 डिग्री में भी शूट करना पड़ा था।

फिल्म 'नो मिन्स नो' रियल घटना पर आधारित है

फिल्म में इंडिया से गुलशन ग्रोवर के अलावा शरद कपूर, दीपराज राणा, मिलिंद जोशी, नाजिया हुसैन, ध्रुव वर्मा आदि कलाकार होंगे। जिस लड़की पर यह कहानी आाधारित है, उस कैरेक्टर को पोलैंड की नतालिया बेक निभा रही हैं। इनके अलावा कैट क्रिस्टियन, एना एडोर, जर्सी हैंजलिक, ऐना गुजिक, स्लीविया चेक, पॉवेल चेक आदि पोलैंड के कलाकार हैं। यह इंडिया और पोलैंड की कहानी है, जो सच्ची घटना पर आधारित है। इसमें टीन एज लव स्टोरी है, जिसमें इंडियन लड़के को पोलैंड की लड़की से प्यार हो जाता है। फिर इसमें एक औरत की ताकत क्या होती है, वह दिखाया गया है। हां, जिनकी कहानी है, उन लोगों ने खुद इसे बनाने के लिए काफी सपोर्ट किया है। यहां तक कि पोलैंड की सरकार ने भी इस फिल्म को बनाने में भरपूर सपोर्ट किया है।

स्क्रिप्ट की डिमांड थी, इसलिए -31 डिग्री में शूट करना पड़ा

इंडो-पोलिश फिल्म 'नो मिन्स नो' की शूटिंग 80 फीसदी पोलैंड और 20 फीसदी इंडिया में हुई है। इसे पोलैंड स्थित बिस्को बियाला में -31 डिग्री तापमान में शूट किया गया है। कई बार बर्फबारी और तूफान के चलते वहां पर हेलिकॉप्टर भी लैंड नहीं कर पाता था, इसलिए शूटिंग कैंसिल करनी पड़ती थी। वहां पर एक दिन में सिर्फ चार घंटे ही शूट करने को मिलता था। वहां पर शूटिंग करने के बारे में जानकर कई स्टार और क्रू मेंबर कांप उठते थे कि कैसे करेंगे। शूटिंग के समय लोगों को खड़े-खड़े जॉगिंग करना पड़ता था वरना तो वो जाम हो जाते थे। ठंड के चलते कैमरे की बैट्री भी सिर्फ एक घंटे चलती थी। फिर उसे चार्ज करने के लिए लिफ्ट से जनरेटर मंगवाना पड़ता था।

एक बार तो ठंड के मारे सब लोग रोने लगे थे। उनसे रहा नहीं जा रहा था, फिर शूटिंग के दौरान ही लीक से हटकर दवाई के नाम पर हमने सबको ब्रांडी पिला दी। सोचा कि जान है तो जहान है। गुलशन ग्रोवर ने भी ब्रांडी पी। फिर उन्होंने ऐसा साहस दिखाया कि वह काबिल-ए-तारीफ था। बड़ी तकलीफ और जान जोखिम वाली जगह थी वो, लेकिन स्क्रिप्ट की डिमांड थी, तो वहां शूट करना पड़ा। वहां पर कुल 6 महीने रुकना पड़ा, जबकि सिर्फ 90 दिन ही शूटिंग हुई। साथ ही मुंबई में तीन जगहों पर मात्र 18 दिनों में शूट कंप्लीट कर लिया गया।

ये बड़े बजट की फिल्म है

जिस बजट में इंडियन फिल्में बनती हैं, उससे कई ज्यादा बिग बजट की यह फिल्म है। इस फिल्म की सिर्फ शूटिंग का वैल्यूएशन यानी प्रोडक्शन कास्ट ही 100 करोड़ रुपए के ऊपर का है। इसके बाद प्रिंट पब्लिसिटी, जो डिले हुआ उसका इंटरेस्ट आदि खर्च अलग है। इस फिल्म को वहां की जी 7 फिल्म्स पोलैंड ने बनाया है। इसे दुनिया भर में रिलीज करने का प्लान है। इसका ट्रेलर सुपर हिट रहा और इसे करोड़ों लोगों ने देखा।

सेट पर रोने लगे थे कास्ट और क्रू

पोलैंड की एक्ट्रेस नतालिया ने नेचुरल एक्टिंग की है। फिल्म के अंदर एक कोर्ट का सीन है, जिसमें उन्हें अपना डायलॉग बोलना है। यह सीन इतना नेचुरल बन पड़ा है कि जब हीरोइन अपने डायलॉग बोल रही थी, तब सेट पर मौजूद तकरीबन ढाई सौ से ज्यादा कास्ट और क्रू सिसकियां मारकर रोने लग गए। यकीन मानिए, सीन कट होने के बाद भी नतालिया रोते हुए दीवार से सिर मार रही थी, क्योंकि अपने कैरेक्टर से निकल ही नहीं पा रही थी।

फिर असिस्टेंट और उसकी मां आदि ने उसे पकड़कर कंबल वगैरह ओढ़ाकर बैठाया। फिर सेट पर डॉक्टर को बुलाया गया। इस तरह गुलशन ग्रोवर भी अपने कैरेक्टर में ऐसे घुस गए कि एक कोर्ट सीन में लड़के को थप्पड़ मारना था। उन्होंने ऐसा थप्पड़ मारा कि वह फ्लोर पर जा गिरा। फिर तो सेट पर सन्नाटा छा गया। गुलशन को जब इस बात का अहसास हुआ, तब काफी देर तर उससे माफी मांगते रहे। गुलशन का काम काबिल-ए-तारीफ है।