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भास्कर इंटरव्यू:मुझे काम मिलना बंद हो गया था, फिर मैंने काम के लिए लोगों के दरवाजे खटखटाए और आज जहां हूं खुश हूं- बॉबी देओल

3 महीने पहलेलेखक: अंकिता तिवारी
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आज, 27 जनवरी को एक्टर बॉबी देओल का जन्मदिन है। बॉबी के कॅरियर के लिए साल 2020 खास रहा। इस साल उनके 'क्लास ऑफ 83' और 'आश्रम' जैसे प्रोजेक्ट रिलीज हुए, जिन्होंने उनके काम को तारीफें दिलाई। अपने जन्मदिन पर दैनिक भास्कर से खास बातचीत के दौरान बॉबी ने अपनी जिंदगी से जुड़ी हुई कुछ खास बातें शेयर कीं।

  • एक टिप इस इंडस्ट्री में आए हुए सभी न्यूकमर के लिए?

बॉबी- मैं अक्सर ऐसे लोगों से मिलता हूं जो इंडस्ट्री में नए आए हैं, यंग टैलेंट हैं। मैं सिर्फ यही कहना चाहता हूं कि मुश्किलें जरूर आएंगी लेकिन आपको बहुत स्ट्रॉन्ग रहना पड़ेगा। स्ट्रगल हर एक्टर के जीवन का हिस्सा है लेकिन कभी भी स्ट्रगल के सामने घुटने मत टेकिए। अपने काम के प्रति ईमानदार रहें और बस हार्ड वर्क करते रहें। सिर्फ और सिर्फ लक के सहारे मत रहें क्योंकि कड़ी मेहनत ही आप की कुंजी है। मैंने भी अपने कॅरियर में बहुत स्ट्रगल किया है, उतार चढ़ाव देखा है। एक वक्त ऐसा आया था जब मैं अपने कैरियर को गिव अप कर चुका था लेकिन मेरा अनुभव सिर्फ यही सिखाता है कि आप कभी हार मत मानो।

  • सुशांत की मौत के बाद फिल्म इंडस्ट्री में छिड़ी इंसाइडर और आउटसाइडर का डिबेट पर क्या कहेंगे।

बॉबी- "मेरे पिता धर्मेंद्र एक आउटसाइडर थे। वह एक्टिंग करना चाहते थे और घर से भागकर मुंबई आए थे। उन्होंने सालों-साल स्ट्रगल किया ताकि वे अपना एक मुकाम बना सकें। हां, मैं मानता हूं कि अगर कोई बच्चा सेम प्रोफेशन को अपनाना चाहता है तो पहला कदम उसके लिए आसान होता है। पहली फिल्म मिलना मुश्किल नहीं होती लेकिन उसके बाद आप की एक्टिंग, आपकी मेहनत ही आपको आगे लेकर जाती है। चाहे आप कितनी ही पावरफुल फैमिली से ताल्लुक रखते हों, वह आपके कॅरियर को आगे नहीं बढ़ा सकती। जो मौके मिलते हैं उस पर खरा उतरने का काम एक्टर का है।

मुझे भी पहली फिल्म मेरे पिता ने दिलवाई और मुझे लॉन्च किया लेकिन उसके बाद जो फिल्में मुझे मिली हैं वह मेरे दम पर ही मिलीं। मेरी मेहनत से मिली हैं। इसीलिए कड़ी मेहनत ही सफलता की कुंजी है। मैं तो एक इनसाइडर हूं फिर मेरे कॅरियर में इतना खराब समय कैसे आया। जब मुझे फिल्में मिली बंद हो गईं। मैंने गिव अप कर दिया। मुझे काम मिलना बंद हो गया। लेकिन मैं फिर उठ खड़ा हुआ। मैंने लोगों के दरवाजे खटखटाए ताकि मुझे काम मिल सके और आज मैं जहां भी हूं मैं खुश हूं।

  • बॉलीवुड सेलिब्रिटीज को सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रहें हैं। वे सोशल हैरेसमेंट का शिकार हैं आप क्या सोचते हैं।

बॉबी- मैं कभी अपने इंस्टाग्राम पर या बाकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जाकर अपने कमेंट्स नहीं पढ़ता, क्योंकि हर इंसान का अपना ओपिनियन होता है। अपनी सोच होती है। हर इंसान आप से नफरत नहीं करेगा लेकिन हर इंसान आपको प्यार भी नहीं करेगा। मैं इस चीज का शुक्रगुजार हूं कि मुझे लोगों से प्यार ज्यादा मिला है और नफरत कम। लोगों का मुझपर यकीन है यही बात मेरे लिए मायने रखती है। खूबसूरती तो देखने वाले की आंखों में होती है मैं यही मानता हूं।"

  • एक्टिंग से कुछ समय ब्रेक लेने के बाद दोबारा आने का फैसला कैसे लिया? अपने कॅरियर में टर्निंग प्वाइंट किस फिल्म को मानते हैं?

​​​​​​​बॉबी- मैं हमेशा से एक्टिंग का भूखा रहा हूं। मैं अलग किरदारों को करने की कोशिश करता हूं, लेकिन मेरी जिंदगी का टर्निंग प्वाॅइंट है रेस 3। मैं जानता था सलमान खान एक बहुत बड़े स्टार हैं और अगर उनकी फ़िल्म में करूंगा तो इस देश के लोग मुझे जानेंगे, पहचानेंगे मेरे रोल को देखेंगे और यह जानेंगे कि बॉबी देओल नाम का भी कोई एक्टर है। अगर देखा जाए आज की जनरेशन ने मेरा काम काफी समय से देखा नहीं है। उसके बाद मुझे अक्षय कुमार के साथ हाउसफुल फिल्म मिल गई। रेस 3 के बाद से मुझे कई सारे अच्छे रोल ऑफर होने लगे।

  • आप अक्सर इंटीमेट सीन करने से बचते हैं। आश्रम वेब सीरीज में ऐसे सीन देने में कितना असहज महसूस कर रहे थे?

​​बॉबी- मैं अक्सर ऐसे सीन देने से बचता हूं लेकिन क्योंकि यह मेरे किरदार की डिमांड थी इसीलिए मैंने निभाया हालांकि मैं बहुत नर्वस था और अनक​​​​​​​म्फर्टेबल भी था। लेकिन मुझे पता था कि अपने कैरेक्टर के साथ मुझे जस्टिस करना था।

  • बैच ऑफ 83 फिल्म में आप कॉलेज के डीन के रूप में नजर आ रहे हैं जो बहुत स्ट्रिक्ट है लेकिन क्या कभी अपने स्कूल के दिनों में आपने रूल्स तोड़े हैं

​​​​​​​बॉबी- मुझे हमेशा से फुटबॉल खेलने का बहुत शौक था। स्कूल जाने से पहले मैं फुटबॉल खेलने जाया करता जिस वजह से मैं अक्सर लेट हो जाता था। असेंबली में लेट पहुंचता था। बाहर ही स्कूल के सामने विक्रम भट्ट खड़े होते थे जो दरअसल मेरे दोस्त थे पर फिर भी मुझे मेरी डायरी में रिमार्क दे दिया करते थे। इसके अलावा मैं बचपन में काफी मोटा था इस वजह से मुझे अपनी शर्ट टक इन करना पसंद नहीं था लेकिन हमारी सुपरवाइजर हमेशा मुझे इस बात पर डांटा करती थी। मैंने क्लास रूम में कभी कोई शैतानी नहीं की।

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