बर्थडे स्पेशल:धर्मेंद्र के जन्मदिन पर पोते करण देओल बोले- मैं दादा जी की फिल्म 'चुपके-चुपके' की रीमेक में काम करना चाहूंगा

2 महीने पहलेलेखक: उमेश कुमार उपाध्याय
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बॉलीवुड इंडस्ट्री के एवरग्रीन स्टार धर्मेंद्र का आज बर्थडे है। जन्मदिन के खास मौके पर उनके पोते करण देओल से हमारी बातचीत हुई, जो आजकल अपनी फिल्म 'वेल्ले' के प्रमोशन में बिजी हैं। दैनिक भास्कर से हुई खास बातचीत के दौरान करण ने अपने दादा धर्मेंद्र के जन्मदिन पर बताया कि दादा जी इन दिनों दिल्ली में रणवीर सिंह के साथ धर्मा प्रोडक्शन की फिल्म की शूटिंग में बिजी हैं, पर वो शूटिंग खत्म करके लौट आए हैं और अपने जन्मदिन के मौके पर फैमिली के साथ घर पर ही हैं। आइए जानते हैं धर्मेंद्र के बारे में करण ने और क्या कहा-

Q.दादा धर्मेंद्र के जन्मदिन की कुछ यादगार बात बताइए?
A.हमारे घर पर जब किसी का जन्मदिन होता है, तब हम सबसे पहले सुबह उठ कर पूजा करते हैं। पूजा और हवन हर किसी के जन्मदिन पर होता है। अभी कुछ दिनों पहले मेरा जन्मदिन था, तब भी सुबह की शुरुआत पूजा से ही हुई थी। यह फिक्स है, बाइचांस हम घर से बाहर हों, तब भी घर पर हमारे लिए पूजा-हवन होता है। उस दिन की दिनचर्या कुछ इस तरह से होती है कि सुबह पूजा-हवन के बाद हम हलवा, वड़ा-पाव, समोसा, कुलचा के साथ बटर-चिकन आदि खाते हैं। दादा जी को खाने का बहुत शौक है। हमारी इसपर जमकर बातचीत होती है। दिन का जो काम होता है, उसे कर के हम शाम को फैमिली के साथ केक कटिंग करते हैं। यह दिन बहुत ही सिंपल होता है। आम लोगों की तरह हम भी इसे ऐसे ही मनाते हैं, कुछ अलग नहीं करते हैं।

Q.जन्मदिन पर दादा जी क्या खास करते हैं?
A.दादा जी अपने बर्थडे के दिन, अपने फैन्स से मिलते हैं। हमारे घर के गेट पर लाइन लगी होती है, पर तब भी वो हर किसी से मिलते हैं। सुबह से शाम तक वो किसी भी एक व्यक्ति को छोड़ते नहीं हैं। हर एक के साथ फोटो क्लिक करवाते हैं। वो अपने फैन्स को जो प्यार देते हैं, वह प्रशंसनीय है। हमारे लिए उनका प्यार ही बहुत मायने रखता है।

Q.वे इस समय कहां है? जब वो आपके साथ होते हैं, तब क्या बातें होती हैं?
A.दादा जी दिल्ली में रणवीर सिंह के साथ धर्मा प्रोडक्शन की फिल्म की शूटिंग कर रहे हैं। जब भी दादा जी से मुलाकात होती है, तब वे कहते हैं कि मेरे साथ घुल-मिल जाओ, तुम इतना चुपचाप क्यों रहते हो? मेरे सामने शरमाओ मत। लेकिन वो मेरे बड़े पापा हैं। मैं उन्हें बचपन से बड़े पापा ही बुलाता आया हूं, इसलिए मेरे अंदर उनके लिए वो रिस्पेक्ट हमेशा रहेगी। यही वजह है कि बतौर फ्रेंड उनके साथ घुलना-मिलना मेरे लिए थोड़ा मुश्किल होता है। जब मैं छोटा था, तब वो मुझे हॉल्स देते थे। मैंने बचपन में उनके साथ रेसलिंग भी किया है। हम बेड पर कुश्ती करते थे। मेरी दादा जी के साथ अच्छी मेमोरीज हैं।

Q.उनके साथ आपकी कोई ऐसी मेमोरी, जिसे लोग अब तक नहीं जानते हों?
A.दादा जी जब भी मेरा काम देखते हैं, तब वो बहुत इमोशनल हो जाते हैं। वो हमेशा मेरे लिए प्रार्थना करते हैं। मुझे जब उनका आशीर्वाद मिलता है, तब मैं भी बहुत इमोशनल हो जाता हूं। हाल ही में जब उन्होंने 'वेल्ले' का ट्रेलर देखा तब वो फोन करके कहने लगे कि रॉकी! इस लाइन में बहुत ऊपर-नीचे होता है, पर तूने बहुत सही किया, इसी तरह करते रहना। मुझे देख, मैं अभी भी सीखता रहता हूं। कभी नेगेटिविटी को अपने ऊपर हावी मत होने देना, क्योंकि आगे बहुत ऊपर-नीचे होने वाला है। जब भी नीचे होना, तब हार मत मानना और कभी गलत जोन में मत जाना। हमेशा पॉजिटिव रहना। मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूं। उनका इतना ही कहना मेरे चेहरे पर मुस्कान ला देता है।

Q.आपके दादा जी ठहरे काम काजी, वो लॉकडाउन में क्या करते थे?
A.लॉकडाउन के दौरान दादा जी और दादी जी फार्म हाउस पर निकल गए थे और मैं मुंबई में ही था। वो वहां फॉर्मिंग करते हुए एन्जॉय कर रहे थे और यहां मैं जेलस हो रहा था, क्योंकि मैं इधर अटका हुआ था और वे फॉर्म पर मजे कर रहे थे। दादाजी सुबह वॉक पर चले जाते थे और फॉर्मिंग भी कर लेते थे। वहां पर उनके साथ दादी जी भी थीं। फार्म हाउस पर खाना बहुत अच्छा बनता है, मुंबई मैं रह कर मैं परेशान हो गया था कि वहां उनको बहुत अच्छा खाना मिल रहा होगा। मक्खन के साथ आलू के पराठे, सरसों का साग, मक्के की रोटी मिलती होगी और यहां मुझे ऐसा कुछ भी नहीं मिल पा रहा है। फॉर्म हाउस पर उनकी लाइफ अलग ही थी।

Q.फॉर्म हाउस के बारे में लोग बताते हैं कि इतना या उतना बड़ा है। आखिर कितना बड़ा है आपका फॉम हाउस?
A.मुझे एकड़ के बारे में पता नहीं है। वह दादा जी की प्रॉपर्टी है, सो उसके बारे में मैं ज्यादा कुछ बोल नहीं सकता, पर वो काफी बड़ी प्रॉपर्टी है।

Q.दादा और पापा की कौन-सी फिल्में हैं, जो आपको सबसे ज्यादा पसंद हैं? उनकी किसी फिल्म की रीमेक बने, तो वह कौन-सी होगी, जिसमें आप काम करना चाहेंगे?
A.पापा की फिल्म 'अर्जुन', 'घायल', 'घातक' और 'दिल्लगी' मुझे बहुत पसंद है, जबकि बॉबी चाचा की फिल्मों की बात करूं तो 'सोल्जर', 'गुप्त' और उनकी पहली 'बरसात' पसंद है। वहीं दादा जी की फिल्म 'फूल और पत्थर', 'प्रतिज्ञा' और 'चुपके-चुपके' पसंद है। मैं पापा की फिल्म 'अर्जुन' की रीमेक में काम करना चाहूंगा, क्योंकि उसका टॉपिक आज के जमाने से भी रिलेटेबल है। दादा जी की फिल्म 'चुपके चुपके', क्योंकि इस में सिचुएशनल कॉमेडी है। साथ ही इस फिल्म में मेरे दादा जी और अमिताभ सर की केमिस्ट्री और रेपो बहुत जबर्दस्त है। फिल्म में दोनों की परफॉर्मेंस बहुत ब्रिलियंट है। इसकी स्टोरी भी बहुत अच्छी है। इस फिल्म को देखते हुए मुझे बहुत मजा आया था।