यादों में दिलीप कुमार:धर्मेंद्र ने शेयर किया एक इमोशनल वीडियो, बोले- मैं रोज सुबह उठ कर आइने से पूछता था कि क्या मैं दिलीप कुमार बन सकता हूं?

3 महीने पहले
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एक्टर धर्मेंद्र ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो क्लिप साझा की, जिसमें उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने से पहले अपनी युवावस्था को याद किया और बताया कि वो दिवंगत दिग्गज एक्टर दिलीप कुमार को कैसे देखते हैं। वीडियो में, धर्मेंद्र को यह कहते हुए सुना जा सकता है, "नौकरी करता, साइकिल पर आता जाता, फिल्मी पोस्टर्स में अपनी झलक देखता, रातों को जागता, अनहोंने ख्वाब देखता, सुबह उठ कर आइने से पूछता 'मैं दिलीप कुमार बन सकता हूं क्या?'।"

धर्मेंद्र ने दिलीप कुमार को दी श्रद्धांजलि

धर्मेंद्र ने अपने पोस्ट के कैप्शन में लिखा, "दोस्तों, दिलीप साहब की रुखसती पर...मेरे...आप के रूंदे रूंदे जज्बात ये..उस अजीम फंकार...उस नेक रूह इंसान को...एक श्रद्धांजलि है। वो चले गए..उन की यादें ना जा पाएंगी।

धर्मेंद्र के पोस्ट पर फैन्स ने भी किया कमेंट

फैन्स ने कमेंट सेक्शन में अपना रिएक्शन देते हुए लिखा, 'दिलीप साहब की कमी हमेशा खलेगी। दूसरे फैन ने लिखा, "नमस्ते धरम जी। आपके द्वारा यह बहुत भावपूर्ण श्रद्धांजलि है। यह आपके प्यार और बॉन्ड को दिखाता है। आगे आपके स्वस्थ जीवन की कामना करता हूं!" वहीं तीसरे फैन ने लिखा, "सो लवली...वह दुनिया भर में लाखों लोगों के प्रेरणास्रोत थे...लव यू धरम पाजी।"

धर्मेंद्र ने शेयर की थी दिलीप कुमार के पार्थिव शरीर के साथ फोटो

दिलीप कुमार की मृत्यु के बाद, धर्मेंद्र ने सायरा से मुलाकात के बारे में कुछ बातें अपने सोशल मीडिया पर शेयर की थीं। धर्मेंद्र ने एक फोटो शेयर की थी जिसमें वह दिलीप कुमार के पार्थिव शरीर के पास बैठकर रोते दिख रहे थे। उन्होंने फोटो के कैप्शन में लिखा था, "सायरा ने जब कहा, धरम देखो साहब ने पलक झपकी है' दोस्तों ये सुनकर जान निकल गई मेरी, मालिक मेरे प्यारे भाई को जन्नत नसीब करे, मुझे दिखावा नहीं आता, लेकिन मैं अपने जज्बात पर काबू नहीं रख पाता। अपना समझकर कह जाता हूं।"

दो फिल्मों में साथ काम कर चुके हैं दिलीप साहब और धर्मेंद्र

दिलीप साहब और धर्मेंद्र ने दो फिल्मों में साथ काम किया, जो फिल्म 'परी' और 'अनोखा मिलन' है। दिलीप कुमार का जन्म 11 दिसंबर, 1922 को ब्रिटिश इंडिया के पेशावर (अब पाकिस्तान में) में हुआ था। दिलीप साहब के पिता लाला गुलाम सरवर खान और माता आयशा बेगम ने अपने बेटे का नाम यूसुफ खान रखा था। 1944 में फिल्म 'ज्वार भाटा' रिलीज हुई थी। इस फिल्म के जरिए इंडियन सिनेमा की पहली स्टार एक्ट्रेस देविका रानी ने यूसुफ खान को दिलीप कुमार के नाम से पेश किया था।

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