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भास्कर इंटरव्यू:'परमाणु' के डायरेक्टर अभिषेक शर्मा बोले-  लॉकडाउन में हमने कई थिएटर्स खो दिए, थिएटर मालिकों को सपोर्ट करना जरूरी

3 महीने पहलेलेखक: अंकिता तिवारी

'तेरे बिन लादेन' (2010), 'द शौकीन्स' (2014), 'परमाणु : द स्टोरी ऑफ पोखरण' (2018) और 'सूरज पे मंगल भारी' (2020) जैसी फिल्मों के डायरेक्टर अभिषेक शर्मा ने हाल ही में कोरोना काल से जुड़ा गाना 'व्हेन इट ऑल ओवर' प्रोड्यूस किया है। लॉकडाउन के बाद सिनेमाघरों में पहली फिल्म 'सूरज पे मंगल भारी' लाने वाले शर्मा ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में कई किस्से साझा किए। पेश हैं बातचीत के अंश:-

Q. कोरोना काल में इस गाने के पीछे के कॉन्सेप्ट के बारे में कुछ बताइए?
A. मैंने कुछ समय पहले एक इंडियन-अमेरिकन सिंगर का गाना सुना था , जो मुझे वह पसंद आया। इसीलिए मैंने इस तरह के गाने को प्रोड्यूस करने का सोचा। हम सभी कोरोना के बाद नॉर्मल जिंदगी में लौटने की राह तक रहे हैं। यह गाना भी कुछ ट्विस्ट के साथ इसी थीम पर आधारित है। इस गाने को मैं डायरेक्ट नहीं कर पाया, क्योंकि उस वक्त मैं अपनी फिल्म टसूरज पर मंगल भारीट को लेकर व्यस्त था। इस गाने में हमने बहुत टेक्निकल चीजों पर ध्यान दिया है। इसे बनाते वक्त माइकल जैक्सन का सॉन्ग ' लीव मी अलोन' मेरे ध्यान में था, जहां पर स्लो मोशन एनीमेशन का यूज किया गया है।

Q. पिछला साल सभी ने अपने-अपने ढंग से जिया है। आपने लॉकडाउन के खाली समय का सदुपयोग कैसे किया?
A. मेरे लिए लॉकडाउन का समय बहुत प्रोडक्टिव रहा है। जहां एक तरफ मैंने 'सूरज पर मंगल भारी' का पोस्ट प्रोडक्शन पूरा किया। वहीं दूसरी ओर मैंने कुछ स्क्रिप्स भी लिखी हैं।

Q. 'सूरज पे मंगल भारी' को बड़ी स्क्रीन पर रिलीज करने का फैसला हिम्मत भरा था। लेकिन क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि अगर ये फिल्म ओटीटी पर रिलीज होती तो ज्यादा देखी और सराही जा सकती थी?
A. मैं हमेशा से यही चाहता था कि 'सूरज पर मंगल भारी' थिएटर्स में रिलीज हो। हां यह हिम्मत भरा कदम था। लेकिन मुझे लगता है कि हर फिल्म बाद में ओटीटी प्लेटफार्म पर आ ही जाती है। लेकिन मेरा मानना है कि फिल्मों की पहली जगह सिनेमाघर हैं। उसे पहले सिनेमाघरों में रिलीज करना चाहिए, उसके बाद भले आप चाहें तो ओटीटी प्लेटफॉर्म पर देखें। मेरी फिल्म 'परमाणु: द स्टोरी ऑफ पोखरण' भी ओटीटी पर है, जिसे लोग आज भी देखते हैं और सराहना करते हैं।

परमाणु : द स्टोरी ऑफ पोखरण की टीम के साथ अभिषेक शर्मा (बीच में)।
परमाणु : द स्टोरी ऑफ पोखरण की टीम के साथ अभिषेक शर्मा (बीच में)।

दूसरा कारण यह भी था कि उस समय लॉकडाउन की वजह से सभी थिएटर बंद थे। हम सैकड़ों सिनेमाघरों को खो चुके थे तो यह बहुत जरूरी था कि हम थिएटर ऑनर्स को भी सपोर्ट करें। लोगों का सिनेमाघरों में जाने का ग्राफ धीरे-धीरे बढ़ रहा है। अभी साउथ में 'मास्टर' रिलीज हुई, जो हाउसफुल साबित हुई। मुझे यकीन है कि 'सूर्यवंशी', '83' जैसी बड़ी फिल्में दर्शकों को थिएटर तक जरूर खींच लाएंगी।

Q. 'तेरे बिन लादेन' से 'सूरज पे मंगल भारी तक', आपकी फिल्मों के सब्जेक्ट्स थोड़े लीक से हटकर होते हैं, इन सब्जेक्ट्स को कैसे चुनते हैं?
A. इससे जुड़ी दो बातें हैं। कई बार मैं खुद ही लेखक और निर्देशक होता हूं और कई बार मुझे किसी और की कहानी पसंद आ जाती है और मै उसे डायरेक्ट करने का मन बनाता हूं। सबसे महत्वपूर्ण चीज है कि कोई ऐसी बात स्क्रिप्ट में जरूर होनी चाहिए, जो आप कहना चाहते हों। ऐसी कोई कहानी, जो आपके मन को छू जाए और आप उसे सारी दुनिया को दिखाना चाहते हों। कई बार पेपर पढ़ते, न्यूज सुनते कोई आईडिया आ जाता है। मुझे पर्सनली फिल्म बनाने का आईडिया न्यूज से ही मिलता है।

Q. 'तेरे बिन लादेन' और इसके सीक्वल के बीच 6 साल का अंतर था। क्या आपको लगता है कि अगर इसका सीक्वल जल्दी आता तो उसे वैसा ही रिस्पॉन्स मिलता, जैसा 'तेरे बिन लादेन' को मिला था?
A. मैं समझता हूं कि वहीं हमसे गड़बड़ हो गई। दरअसल हम फिल्म रिलीज करने में लेट हो गए। उसके डिस्ट्रीब्यूशन में ही हमें इतना समय लग गया कि फिल्म आउटडेटेड हो गई। 2016 में यह फिल्म रिलीज हुई। उस वक्त ओसामा बिन लादेन को मरे हुए 5 साल हो गए थे। मुझे लगता है अगर यह फिल्म एक या दो साल पहले रिलीज होती तो और अच्छा रिस्पॉन्स मिलता।

'तेरे बिन लादेन' 16 जुलाई 2010 को सिनेमाघरों में आई थी, जबकि 'तेरे बिन लादेन : डेड ऑफ अलाइव' 26 फरवरी 2016 को रिलीज हुई थी।
'तेरे बिन लादेन' 16 जुलाई 2010 को सिनेमाघरों में आई थी, जबकि 'तेरे बिन लादेन : डेड ऑफ अलाइव' 26 फरवरी 2016 को रिलीज हुई थी।

Q. आमतौर पर आपकी फिल्मों में कोई सटायर होता है। लेकिन 'परमाणु' इससे बिलकुल अलग थी। क्या आपको लगा कि परमाणु आपके सटायरिकल जोनर से बाहर की फिल्म है, उसे लेकर कभी कोई डाउट रहा?
A. मेरा यही उद्देश्य है कि जैसे नाट्यशास्त्र में नवरस होते हैं, वैसे उन्हीं की तरह अलग-अलग फिल्में बना पाऊं। मै कहानी में यही देखता हूं कि मैं लोगों से क्या कहना चाहता हूं। वह फिल्म कौन से जोनर में बनेगी। कॉमेडी या सीरियस मेरे लिए सेकेंडरी होता है। खुद को किसी इमेज में नहीं बांधना चाहता। मैं एक नरेटर हूं, जो खुद की लिखी कहानियां भी कहता है और दूसरों की लिखी हुई कहानियां भी।

Q. एक ऐसा जोनर जो आप आगे एक्सप्लोर करना चाहेंगे?
A. मैं जॉन इब्राहिम के साथ अपनी अगली फिल्म को लेकर बहुत एक्साइटेड हूं। यह साइंस फिक्शन फिल्म होगी। मैं खुद भी साइंस फिक्शन का बड़ा फैन हूं। मुझे लगता है कि 'मिस्टर इंडिया' के बाद भारत में साइंस फिक्शन पर कोई रोमांचक फिल्म नहीं बनी है। इस फिल्म की स्क्रिप्ट फाइनल हो चुकी है। लॉकडाउन की वजह से जॉन अब्राहम की डेट आगे पुश हो गई। जैसे ही वे अपने पुराने प्रोजेक्ट से फ्री होंगे, हम इस फिल्म की शूटिंग शुरू करेंगे।

Q. अक्षय कुमार के साथ अपने आगामी प्रोजेक्ट 'रामसेतु' के बारे में कुछ बताइए।
A. मेरे लिए यह बहुत बड़ी फिल्म है और इस फिल्म के बारे में मैं फिलहाल ज्यादा नहीं बता सकता। लेकिन इतना जरूर कह सकता हूं कि मेरी कोशिश दर्शकों को रोमांचित और एंटरटेन करने की रहेगी। दिवाली पर इस फिल्म को रिलीज करने की बात है, लेकिन शूटिंग की डेट्स अभी तक फाइनल नहीं हुई है।

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