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खास बातचीत:डायरेक्टर हरीश व्यास बोले-बाप और बेटे की कहानी पर आधारित होगी 'हरिओम', 20 दिन भोपाल में और 10 दिन बनारस में की जाएगी फिल्म की शूटिंग

मुंबईएक महीने पहलेलेखक: उमेश कुमार उपाध्याय
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'हम भी अकेले तुम भी अकेले' फेम डायरेक्टर हरीश व्यास फिल्म 'हरिओम' लेकर आ रहे हैं। जिसकी कहानी बाप और बेटे पर बुनी गई है। 'हरिओम' में अनु कपूर ऐसे बाप बने हैं, जो ज्योतिषी भी हैं। फिल्म में वे भजन गाते भी सुनाई देंगे। बेटे की भूमिका अंशुमन झा निभाएंगे। अगले महीने में फ्लोर पर जाने के लिए तैयार 'हरिओम' की शूटिंग भोपाल और बनारस में होगी। हरीश व्यास ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में फिल्म से जुड़ी कई बातें शेयर की हैं।

बाप-बेटे की कहानी है फिल्म 'हरिओम'
'हरिओम' बाप-बेटे की कहानी है। कई बार जरूरी नहीं है कि हमारे बड़े ही सही हों, वे गलत भी हो सकते हैं। बेटे की पढ़ाई और शादी करवाकर अपनी पीठ थपथपाते रहें कि हमने बहुत अच्छा किया। लेकिन कई बार वैसा होता नहीं है। इस बात का अहसास जब पिता को नहीं होता है, तब उसे बेटा रियलाइजेशन करवाता है कि आपने जो काम किए हैं, वे सारे हमेशा सही नहीं थे। इसमें भी ऐसा फील होता है कि दो लोगों में से एक मरने वाला है। फिर तो कहानी बड़ी इमोशनल और इंटरेस्टिंग हो जाती है।

बाप के किरदार के लिए अनु कपूर से बात हुई है
इस फिल्म में बाप का किरदार निभाने के लिए अनु कपूर से बात हुई, तब कहानी सुनने के बाद उन्होंने दो पेज पढ़ने के लिए मंगवाए। कहानी भेजी, तब उन्हें इतनी पसंद आई कि मुझे मिलने के लिए बुलाया। उनसे मिला, तब डिटेल में बात हुई। उन्होंने कहा कि चलो इसे करते हैं। दरअसल, फिल्म में अनु कपूर जॉब से रिटायर हो चुके हैं। वे कहते हैं कि नौकरी से रिटायर हुआ हूं, पर जिम्मेदारियों से रिटायर नहीं हुआ हूं। आज भी सुबह उठकर योग-अभ्यास करके घर का सारा काम करता हूं। उन्हें सफाई बेहद पसंद है। झाडू लेकर घर की साफ-सफाई करने लग जाते हैं। तरीके से सामान न रखने पर छोटों पर गुस्सा भी हो जाते हैं। उनका गुस्सा घर पर भारी पड़ जाता है। साथ में भजन भी करते हैं। ज्योतिषी हैं, सो समय निकालकर लोगों की कुंडली भी देखते हैं। बेटे के साथ ज्यादा बनती नहीं है, क्योंकि वह कुछ गलत देखता है, तब मुंह पर बोल देता है। एक सिचुएशन ऐसी आती है, जब बाप-बेटे को बनारस जाना पड़ता है। वहां कैसे बाप-बेटे खुलकर सामने आते हैं, यहां से कहानी दिलचस्प मोड़ लेती है।

बेटे के रोल के लिए अंशुमन झा को किया फाइनल
बेटे के किरदार के लिए दो-तीन लोगों से लंबे समय से बात चल रही थी। एक तो अंशुमन झा के नाम पर विचार चल रहा था। उनके साथ हाल ही में 'हम भी अकेले और तुम भी अकेले' में काम कर चुका हूं। अंशुमन के अलावा अनु कपूर ने भी विक्रांत मैसी और 'पंचायत' सीरीज फेम जीतेंद्र का नाम सुझाया था। उनसे भी बातें चल रही थीं। इस तरह हमारे पास तीन नाम थे। अब तीनो में से बोर्ड पर अंशुमन झा आए हैं। एक बार एक्टर चुन लिया गया है, तब उसके मुताबिक हीरोइन के नाम पर विचार कर रहे हैं।

भोपाल और बनारस जाकर घर और मोहल्ले में फिल्माएंगे
इस फिल्म की शूटिंग भोपाल और बनारस में रियल लोकेशन पर की जाएगी, ताकि कहानी रियलिस्टिक लगे। वहां जाकर घर और मोहल्ले में शूट करेंगे, पर लोकेशन सारे रियल ही होंगे। इस फिल्म का शूटिंग शेड्यूल लगभग 30 दिनों का होगा। चूंकि भोपाल के रहने वाले दिखाए गए हैं, इसलिए 20 दिनों की शूटिंग भोपाल में ही होगी। दोनों बनारस जाते हैं, तो वहां करीब 10 दिन का शूट किया जाएगा। अगले महीने तक यह फिल्म फ्लोर पर आ जाएगी।

योगेश गौर के लिखे दो गाने होंगे
कहानी के मुताबिक फिल्म में गाने रखे जाएंगे। इसमें दो गाने आनंद फेम योगेश गौर के होंगे। उनका पिछले साल 29 मई को निधन हो गया था। उन्होंने मेरी फिल्म 'अंग्रेजी में कहते हैं' का गाना लिखा था। उनके लिखे 4-5 गाने अभी भी मेरे पास हैं, उसमें से दो गाने इस फिल्म में यूज करूंगा। यह गाना जीवन के ऊपर होगा। इसमें भजन गाते दिखाए हैं, तो एक भजन टाइप का गाना होगा। इसके अलावा एक-दो गाने और एड किए जाएंगे।

फिल्म में अनु कपूर गाएंगे भजन
दर्शकों के लिए यह आकर्षण का विषय होगा कि इस फिल्म में अनु कपूर खुद ही भजन गाएंगे। चूंकि फिल्म में उनका ज्योतिषी का भी एक रूप देखने को मिलेगा, इसलिए उनके मुंह से भजन सुनकर दर्शकों को रियलिस्टिक लगेगा। इसके लिए जब उन्हें अप्रोच किया, तब खुशी-खुशी तैयार हो गए। उन्हें बड़ी नॉलेज है, इसलिए वे अच्छा करेंगे।

फिल्म में बाप-बेटे का इक्वल रूप देखने को मिलेगा
अगर देखा जाए तो फिल्म की कहानी बाप-बेटे पर इक्वल रूप से बेस्ड होगी। बाप भजन गा रहा है, तब बेटा आज का गाना गाएगा। चूंकि पिता का नाम हरिप्रसाद शर्मा है और बेटे का नाम ओम प्रसाद शर्मा है, इसलिए दोनों का नाम मिलाकर फिल्म का नाम 'हरिओम' रखा है। फिल्म में संदेश यही होगा कि आप बाप हैं, तब इतना रौब मत रखिए कि पारिवारिक माहौल बिगड़ जाए। वहीं बच्चों को बड़ों का कहना मानना चाहिए।

थिएटर खुलने पर निर्भर होगी फिल्म की रिलीज
फिल्म अभी बनाना शुरू करेंगे, तब छह महीने बाद बनकर तैयार होगी। सब कुछ रेडी है। सिर्फ फिल्म का क्लाइमेक्स लिखना रह गया है, जल्द ही वह कंप्लीट हो जाएगा। दो क्लाइमेक्स पर दिमागी उथल-पुथल चल रही है कि किसे रखें बाकी तो वह भी तैयार है। खैर, दो महीने में फिल्म फ्लोर पर जाएगी। उस समय थिएटर की जैसी स्थिति होगी, उस पर फिल्म की रिलीज निर्भर करेगी। अगर फिल्म थिएटर में रिलीज नहीं होगी, तब इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर लेकर जाएंगे।

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