खबरों से कैसे निकली फिल्मों की कहानियां:दो आंखे बारह हाथ से फैशन तक, न्यूजपेपर पढ़कर डायरेक्टर्स को मिली फिल्मों की स्क्रिप्ट

4 दिन पहलेलेखक: प्रियंका जोशी
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बायोग्राफी के अलावा बॉलीवुड फिल्मों का एक साइड और भी है और वो है किसी न्यूज से फिल्म बनाने का आइडिया। आज हम आपको बताने जा रहे हैं उन फिल्मों के बारे में जिनका आइडिया डायरेक्टर को न्यूज पढ़कर आया। इन फिल्मों में अमर अकबर, एंथोनी से लेकर स्पेशल 26 जैसी बेहतरीन फिल्में भी शामिल हैं। आइए जानते हैं ऐसी फिल्मों के बारे में…

दो आंखे बारह हाथ

ब्रिटिश इंडिया में एक राजा ने 'फ्री-जेल' एक्सपेरिमेंट किया था। इस एक्सपेरिमेंट में उन्होंने एक मनोवैज्ञानिक को खतरनाक और खूंखार अपराधियों को खुली जेल में रखकर एक्सपेरिमेंट करने के लिए कहा था। कहा जाता है इस एक्सपेरिमेंट के बाद ही बीसवीं शताब्दी में इस विचार ने सभी को प्रभावित किया और जेल में सजा काट रहे कैदियों से गलत व्यवहार करने के बजाए उन्हें सुधारगृह में रखने की सलाह पूरे विश्व की सरकार को पसंद आई। जिससे सजा काट रहे कैदी अपनी आगे की जिंदगी अच्छे से जी सकें और आगे कोई गलत काम न करें। जिसके बाद ही सजा पा रहे कैदियों को सुधारगृह में रखा जाने लगा। साल 1957 में एक दिन किसी अखबार के लेख में इसपर लिखा एक आर्टिकल डायरेक्टर और राइटर वी. शांताराम को दिखा। बस यहीं से वी. शांताराम को उनकी फिल्म 'दो आंखे बारह हाथ' बनाने का आइडिया आया। उन्होंने इसपर फिल्म लिखी और डायरेक्ट तो की ही साथ ही इस फिल्म में लीड रोल भी उन्होंने ही प्ले किया वहीं फिल्म में फीमेल लीड उनकी पत्नी संध्या थीं। फिर जब ये फिल्म रिलीज हुई तो इसे गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड से नवाजा गया था।

साधु मिरांडा

50 दशक में चेन्नई में दो कार सवार लोगों ने एक बैंक ऑफिसर की हत्या कर दी थी। उस समय चेन्नई को मद्रास के नाम से जाना जाता था। हत्या बैंक ऑफिसर के पास रखी नकदी को लूटने के लिए पूरी प्लानिंग से की गई थी। ये केस मद्रास के सभी लोकल न्यूजपेपर्स द्वारा कवर किया गया और यहीं से प्रोड्यूसर ए. भीमसिंह को फिल्म "साधु मिरांडा" बनाने का आइडिया आया। ये फिल्म 1966 में रिलीज हुई। 1968 में इसी फिल्म को हिंदी में भी बनाया गया जिसका नाम था 'साधु और शैतान'। इस फिल्म में एक्टर महमूद, प्राण और ओम प्रकाश लीड रोल में थे।

अमर अकबर एंथोनी

आपको जानकर हैरानी होगी कि बॉलीवुड के बेहतरीन फिल्मों में से एक अमर, अकबर, एंथोनी को बनाने का आइडिया भी न्यूज पेपर की एक रिपोर्ट से ही आया था। रोज की तरह डायरेक्टर और प्रोड्यूसर मनमोहन देसाई न्यूज पेपर पढ़ रहे थे। जहां उन्हें खबर दिखी कि कोई शराबी अपने तीन बच्चों को एक पार्क में छोड़ गया है। बस यहीं से मनमोहन की फिल्म "अमर, अकबर, एंथोनी" की कहानी का जन्म हुआ। उसी वक्त उन्होंने सोचा कि अगर इस कहानी में तीनों बच्चों को अलग-अलग धर्म के लोग अडोप्ट कर लेते हैं तो बेहतरीन कहानी बन सकती है। बस फिर क्या था 1977 में भारतीय सिनेमा की कल्ट कही जाने वाली फिल्म अमर, अकबर, एंथोनी रिलीज हो गई।

चरस

एक मैग्जीन के आर्टिकल में तिग्मांशु धूलिया को फिल्म चरस का आइडिया मिल गया। इस आर्टिकल में अवैध ड्रग तस्करी के बारे में बताया गया था। विदेशी लोग किस तरह से पहाड़ों में छुपकर ड्रग की तस्करी करते हैं ये भी आर्टिकल में बताया गया था। इस आर्टिकल में कई ऐसे फैक्ट्स थे जो तिग्मांशु को पहले नहीं पता थे बस यहीं से उन्हें फिल्म 'चरस' का आइडिया मिल गया। ये फिल्म 2004 में रिलीज हुई थी।

फैशन

एक बार एक न्यूजपेपर में डायरेक्टर मधुर भंडारकर को एक मॉडल की न्यूज दिखी। काफी सक्सेसफुल करियर के बाद उस मॉडल की एक समय ये हालत हो गई थी कि खाने के लिए उसे भीख तक मांगनी पड़ रही थी। यहीं से उन्हें फिल्म फैशन बनाने का आइडिया मिला। ये फिल्म 2008 में रिलीज हुई थी।

दिल्ली-6

2001 में दिल्ली के चांदनी चौक में मंकी मैन यानी काले बंदर के उत्पात से सब परेशान थे। ये बंदर रात में अचानक आकर हमला करता था। ये बात किसी को पता नहीं चली कि ये बंदर आता कहां से था। काले बंदर की वजह से कुछ लोगों की मौत हो गई थी तो कुछ घायल। ये काला बंदर आखिर दिखता कैसा था ये किसी को नहीं पता। हालांकि पुलिस ने इस बंदर को पकड़ने का दावा भी किया था। लेकिन पुलिस ने कब, कहां और कैसे पकड़ा ये किसी को नहीं पता। ये काला बंदर तो आज भी रहस्य है लेकिन न्यूजपेपर की इस रिपोर्ट से डायरेक्टर ओम प्रकाश मेहरा को उनकी फिल्म 'दिल्ली-6' की कहानी मिल गई। ये फिल्म 2006 में रिलीज हुई थी।

स्पेशल 26

80 के दशक में एक ज्वैलरी शोरुम में कुछ लोगों ने फैक इनकम टैक्स ऑफिसर्स बनकर ज्वैलरी शोरुम में इनकम टैक्स रेड की थी। न्यूजपेपर्स द्वारा इस स्टोरी को कवर किया गया और इसी से डायरेक्टर नीरज पांडे को मिली फिल्म 'स्पेशल-26' की कहानी। इसी घटना पर आधारित ये फिल्म साल 2013 में रिलीज हुई थी। वहीं इसी घटना से इंस्पायर होकर राकेश रोशन ने फिल्म 'खेल' भी बनाई थी जो 1992 में रिलीज हुई थी।

सेक्शन 375

कुछ साल पहले 'मीटू मूवमेंट' चला था जो कई अखबारों और मैग्जीन ने कवर किया था। इस मूवमेंट के चलते कई केस सामने आए थे। इसी पर डायरेक्टर अजय बहल ने बनाई फिल्म 'सेक्शन 375'। ये फिल्म 2019 में रिलीज हुई थी। अनुभव सिन्हा की फिल्म 'आर्टिकल 15' भी इसी तरह की रियल लाइफ घटनाओं पर आधारित थी। ये फिल्म भी 2019 में रिलीज हुई थी।

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