अपकमिंग फिल्म:इमरान हाशमी ने बेटे की खराब तबियत में पूरी की ‘एजरा’ के रीमेक ‘डिबुक’ की डबिंग

मुंबईएक महीने पहलेलेखक: अमित कर्ण
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  • भूत की आवाज के लिए जानवरों और इंसानी क्राउलिंग को मिक्स कर साउंड इफेक्ट पैदा किया गया
  • ‘स्‍त्री’ के हिट होने के बाद से मेकर्स का रुझान हॉरर फिल्‍मों की ओर, भूमि पेडणेकर और जाह्नवी कपूर की फिल्‍में रिलीज हो चुकी हैं

22 अक्‍टूबर से महाराष्‍ट्र के सिनेमाघर खुल रहें हैं, मगर, ‘चेहरे’ के बाद इमरान हाशमी की एक और फिल्‍म ‘डिबुक’ डायरेक्‍ट ओटीटी पर आ रही है। ‘डिबुक’ मलयाली फिल्‍म ‘एजरा’ की हिंदी रीमेक है। हाल ही में बॉलीवुड ने कई मलयाली फिल्‍मों की रीमेक के राइट्स लिए हैं। उनमें अजय देवगन मोहनलाल स्टारर ‘दृश्‍यम2’ को इस दिसंबर से शूट शुरू करने वाले हैं। बोनी कपूर ने ‘वन’ के राइट्स लिए हैं। उसमें ममूटी थे। ममूटी की ही एक और फिल्‍म ‘पुथिया नियमम’ के राइट्स नीरज पांडे ने लिए हैं।

दोनों फिल्मों के साउंड डिजाइनर मनोज गोस्‍वामी हैं

‘डिबुक’ एक हॉरर फिल्‍म है। इस जॉनर की फिल्‍मों में साउंड सबसे अहम कैरेक्‍टर होता है। इमरान इससे पहले ‘राज’ फ्रेंचाइजी की हॉरर फिल्‍में की हैं। उसके अलावा उनकी ‘एक थी डायन’ भी आई थी। ‘डिबुक’ में इमरान हाशमी ने साउंड डिजाइनर के साथ कई दिलचस्‍प प्रयोग किए हैं। ‘डिबुक’ और ‘एक थी डायन’ दोनों के साउंड डिजाइनर मनोज गोस्‍वामी ही हैं।

फिल्म में साउंड के साथ प्रयोग किए हैं
दैनिक भास्‍कर से बातचीत में मनोज गोस्‍वामी ने कहा, इस फिल्‍म में हॉरर के एलिमेंट के लिए ओटीटी पर कंटेंट देखने वाले दर्शकों के लिहाज से साउंड डिजाइन हुआ है। थिएटरों में रिलीज होने वाली फिल्मों के लिए तो हम वहां जाकर वहां के स्पीकरों पर डायलॉग्स की साउंड क्वॉलिटी चेक करते हैं। वहां ऑडिएंस को डराने के लिए ढेर सारे स्पीकर्स होते हैं। यहां हमने ब्रांडेड फोन से लेकर चाइनीज फोन पर क्वॉलिटी चेक किए।
यहां डराने के लिए लाउड साउंड के बजाय सीन में साइलेंस रखा गया है। सन्नाटे से उपजने वाले डर का यूज हुआ है। पहले की हॉरर फिल्मों में सीन में तेज आवाज यूज होते थे। यहां डर को साउंड या किरदारों के एक्शन से धीरे धीरे बिल्ट अप नहीं किया गया है। सीन में डर की एंट्री अचानक किसी पर हमला या हादसों से करवाई गई है। भूत की आवाज के साथ भी प्रयोग हुए हैं। उनकी आवाजें हाथी की चिंघाड़ या फिर शेर की दहाड़ जैसी न लगे, वह कोशिश यहां हुई है।

इमरान डबिंग के मामले में तेज हैं
डर और असरदार हो, उसके लिए इमरान हाशमी ने इस फिल्म के लिए स्टूडियो में अपने डायलॉग्स डबिंग के जरिए डेलिवर करने का फैसला किया। इस साल जुलाई में सेकेंड वेव ओपन होने पर उन्होंने अपने डायलॉग्स डब किए। वह भी तब, जब उनके बेटे की तबियत खराब थी। मनोज गोस्वामी कहते हैं, डबिंग के मामले में इमरान की रफ्तार तेज है। उन्होंने पूरे फिल्म की डबिंग महज तीन दिनों में पूरी कर दी। वह भी रोजाना महज दो घंटे डबिंग के शेड्यूल में। एक डायलॉग की डबिंग में उन्हें कभी दो से ज्यादा रीटेक नहीं लगते थे।

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