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यादें ऋषि कपूर की:कपूर्स के फैमेली डॉक्टर ओ.पी. कपूर कहते हैं जब भी मैं ऋषि से खाने-पीने पर कंट्रोल को कहता वो लीवर टेस्ट रिपोर्ट दिखाकर फिर छूट ले लेते थे

मुंबई6 महीने पहलेलेखक: मनीषा भल्ला
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ऋषि कपूर के साथ डॉ. ओ.पी. कपूर। - Dainik Bhaskar
ऋषि कपूर के साथ डॉ. ओ.पी. कपूर।
  • पृथ्वीराज कपूर के जमाने से कपूर परिवार के नजदीकी रहे हैं 96 साल के डॉ. ओ.पी. कपूर

शायद ही कोई ऐसा डॉक्टर होगा जिसे किसी खानदान की चार पीढ़ियों का इलाज किया हो। अगर वो खानदान भी फिल्म उद्योग का सबसे नामचीन कपूर खानदान हो तो क्या कहना। मुंबई के 96 साल के डॉ. ओ. पी. कपूर ने पृथ्वीराज कपूर से लेकर रणबीर कपूर तक पूरे कपूर खानदान का इलाज किया है। वे पूरे कपूर परिवार को बहुत नजदीक से जानते हैं। ऋषि कपूर की पहली बरसी पर जब दैनिक भास्कर ने डॉ. कपूर से बात की तो उनका दर्द छलक पड़ा। उदास सी आवाज में वो कहते हैं कि ये दिन देखने के लिये जिंदा क्यों रह गया।

डॉ. कपूर ने बताया कि पूरी कपूर फैमेली खाने-पीने की शौकीन रही है। ऋषि भी इनसे अलग नहीं थे। मैं उन्हें समझाता रहता था कि कम खाओ, सही खाओ, वजन कम करो, कम पीया करो, लेकिन वह मानते नहीं थे। कभी बहुत जोर से डांट देते तो ऋषि कपूर अपना लिवर टेस्ट करवा लेते और लिवर की रिपोर्ट दिखाकर शराब पीने की छूट ले लेते।

डॉ. कपूर बताते हैं कि कुछ साल पहले ऋषि मेरे पास अपनी लीवर रिपोर्ट्स लेकर आए। वह बहुत डरे हुए थे। कहने लगे कि अंकल यह देखो वो डॉक्टर बोल रहा है कि लीवर खत्म है। मैं उनको थाणे के उस डॉक्टर के यहां ले गया, जिसके पास लीवर टेस्टिंग की एडवांस टेक्नोलॉजी थी। टेस्ट हुए लेकिन ऐसी कोई बात नहीं थी। ऋषि खुश हो गए और उसने मुझे जोर से गले लगा लिया। लेकिन, मैं फिर उससे बोला, ऋषि, कम पिया करो, कम खाओ, फैट कम करो।

ऋषि बड़ों को सम्मान देने में हमेशा आगे रहते थे। एक शाम मैं मुंबई के मशहूर विंल्गटन स्पोर्ट्स क्लब में बैठा था। ऋषि को कोई तकलीफ होती तो शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट वह मुझसे जरूर साझा करते थे। उन्होंने कोई टेस्ट करवाए और मुझे रिपोर्ट दिखाना चाहते थे। मैंने उनसे बोला कि मैं घर आ जाता हूं लेकिन वह बोले कि नहीं अंकल मैं आपके पास आ रहा हूं। वह क्लब आए, साथ में नीतू कपूर भी थीं। वहां मुंबई के सारे अमीर घराने के लोग बैठे थे। ऋषि और नीतू ने आते ही मेरे पांव छूकर मुझे पैरी पौना बोला। यह देखकर क्लब में बैठे मुंबई के रईसों के मुंह खुले रह गए, सब आपस में बात करने लगे कि देखो ऋषि कपूर कितने संस्कारी हैं, अपने डॉक्टर के पांव छूते हैं।

डॉ. कपूर बताते हैं कि ऋषि अपने पिता राज कपूर को हमेशा सर बोलते थे। उन्होंने कभी ऋषि के मुंह से राज कपूर के लिए पापा नहीं सुना। ऋषि में ग्रैटिट्यूड की जैसी भावना थी, वो मैंने किसी में नहीं देखी।

रणधीर, ऋषि और राजीव की बहन रितु को ब्लड कैंसर डिटेक्ट हो चुका था। ऋषि को जब कैंसर डिटेक्ट हुआ तो डॉ. कपूर ने बताया था कि रितु ने न्यूयॉर्क की जिस अस्पताल में इलाज कराया था, वहां दुनिया के बेहतरीन डॉक्टर्स हैं, ऋषि को भी वहां जाना चाहिए। रितु का विल पावर स्ट्रांग था। वह बोलती रहती कि मुझे हर हाल में जीना है। कीमोथेरेपी और सारे इलाज में वो कोई लापरवाही नहीं करती थी। वो कितनी बार वेंटिलेटर पर गईं और वापस आईं, एक बार तो एक महीने तक वेंटिलेटर पर थीं। कैंसर डिटेक्ट होने के बाद ऐसे ही उन्होंने नौ साल तक लंबी लडाई लडी। रितु में बीमारी से लड़ने का जुनून था, जो ऋषि में नहीं था। रितु ने अपनी बीमारी को स्वीकार कर लिया था, पर शायद ऋषि स्वीकार नहीं कर पाए थे।

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