साउथ की फिल्म पॉलिटिक्स:बाहुबली के डायरेक्टर राजामौली की फिल्म आरआरआर की कमाई का आंकड़ा आंध्र सरकार फैसले पर टिका

2 महीने पहलेलेखक: हिरेन अंतानी
  • 450 करोड़ के बजट की फिल्म, करीब 900 करोड़ से ज्यादा की डील पा चुके हैं मेकर्स
  • आंध्र के कई इलाकों में आज भी फिल्म टिकट के दाम 20 से 30 रुपए

फिल्म ‘आरआरआर’ और ‘गंगुबाई काठियावाड़ी’ में मुकाबला टल गया है। पहले दोनों फिल्में एक ही दिन रिलीज होनी थी, लेकिन अब दोनों की रिलीज डेट में एक महीने से ज्यादा का अंतर होगा। आरआरआर 7 जनवरी 2022 को रिलीज होगी और गंगुबाई काठियावाड़ी 18 फरवरी 2022 को। लेकिन, आंध्र प्रदेश में आरआरआर के ज्यादा फायदा कमाई होने के आसार नहीं हैं। कारण ये है कि आंध्र प्रदेश सरकार ने फिल्मों के टिकट के दाम पर कंट्रोल किया हुआ है।

आम मल्टीप्लेक्सेस और सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों में मनमाने दाम वसूले जाते हैं, लेकिन आंध्र प्रदेश में आज भी छोटे कस्बों में टिकट के दाम 20-30 रुपए ही है। बड़े शहरों के मल्टीप्लेक्स में भी अधिकतम कीमत 250 रुपए है। ऐसे में आंध्र से ज्यादा कमाई होने में दिक्कत है। फिल्म के तेलुगु वर्जन के राइट्स 165 करोड़ में बेचे गए हैं। मेकर्स अपना प्रॉफिट बना चुके हैं लेकिन वितरकों के लिए यहां कड़ी चुनौती होगी।

साउथ में फिल्में जिंदगी का अहम हिस्सा
पूरी साउथ फिल्म इंडस्ट्री आंध्र सरकार ने इस मामले में बात कर रही है लेकिन जगन सरकार टिकटों के दाम अपने कंट्रोल में रखना चाहती है। क्योंकि, दक्षिण भारत में फिल्में उतनी ही जरूरी मानी जाती हैं, जितना जिंदगी के लिए दूसरी चीजें हैं। यही वजह है कि यह फिल्म आंध्र में ज्यादा मुनाफा कर पाएगी या नहीं यह फैसला राज्य के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी के हाथ में है।

20-30 रुपया भी है टिकट
साउथ इंडिया के फिल्म ट्रेड एनालिस्ट रमेश बाला ने बताया कि साउथ के सारे राज्यों में आंध्र ही ऐसा है जहां सिनेमा टिकट की कीमत सबसे कम है। यहां फिलहाल मल्टीप्लेक्स में सबसे महंगी टिकट भी 250 रुपए है। थिएटर में एसी है या नहीं, बड़ा शहर है या छोटा शहर या फिर ग्राम पंचायत का इलाका है, इसके हिसाब से दर तय है।

यहां कहीं 50 से 100 रुपए और कहीं-कहीं तो 20-30 रुपए भी कीमत है। यह भी जाहिर है कि कम दाम वाले सिनेमा स्क्रीन की संख्या भी ज्यादा है। ऐसे में दाम कम रहे तो ‘आरआरआर’ जैसी बड़े बजट की फिल्म के लिए लागत निकालना मुश्किल होगा।

पवन-जगन की लड़ाई में फंसी फिल्में
टिकट दर की एक सीमा होने के बावजूद बड़ी कमाई के लिए फैन क्लब के जरिए पूरे शो बुक किए जाते हैं। बाद में एक-एक टिकट एक हजार रुपए तक बिकती है। लेकिन, बीते अप्रैल में जब सिने स्टार और जनसेना पार्टी के नेता पवन कल्याण की फिल्म ‘वकील साब’ रिलीज होने वाली थी, तब आंध्र प्रदेश सरकार ने इस तरह के शो पर ही पाबंदी लगा दी।

इसके बाद टिकट के दाम भी कम कर दिए।अब तो सारी सिनेमा की टिकट बुक करने के लिए राज्य सरकार का ही बुकिंग पोर्टल शुरू करने पर भी सोचा जा रहा है। पवन कल्याण हंमेशा यह आरोप लगाते रहे हैं कि उनके साथ राजनीतिक दुश्मनी के चलते जगन मोहन पूरी तेलुगु सिनेमा का गला घोंट रहे हैं।

कोई सरकार से लड़ना नहीं चाहता
हालांकि, तेलुगु फिल्म के मेकर्स और डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन इस राजनीतिक लड़ाई में सरकार से भिड़ना नहीं चाहते। एसोसिएशन पवन कल्याण को सपोर्ट करने के बजाए सरकार से बातचीत के जरिये हल निकालने की कोशिश कर रही है। जैसे ‘आरआरआर ’ के मेकर्स टिकट के दाम बढ़ाने कोर्ट का रास्ता अपनाएंगे ऐसी खबर चली तो तुरंत मेकर्स ने यह स्पष्टीकरण दे दिया कि वे कोर्ट नहीं जाएंगे। सीएम से टिकट के दाम बढ़ाने की अपील करेंगे। साउथ में सिनेमा का कुछ अलग ही क्रेज है। यहां पर रोटी-कपड़ा और मकान जैसे ही सिनेमा भी एक जरूरत की चीज मानी जाती है। इसलिए, सिनेमा टिकट का दाम कम रखने में सरकार का राजनीतिक फायदा है।

450 करोड़ की फिल्म, करीब 900 करोड़ से ज्यादा में राइट्स बिके
यह फिल्म हिंदी और तेलुगु के अलावा तमिल, कन्नड़ और मलयालम में भी रिलीज होगी। ‘बाहुबली’ के डायरेक्टर एस.एस. राजामौली की फिल्म है और आलिया भट्ट और अजय देवगण जैसे स्टार की वजह से हिंदी में भी इस फिल्म का बज बना हुआ है। लेकिन, यह जाहिर है कि रामचरण और जूनियर एनटीआर जैसे स्टार की मौजूदगी से इस फिल्म की कमाई की सब से बड़ी संभावना तेलुगु रिलीज से ही है।

फिल्म के तेलुगु के राइट्स 165 करोड़ रुपये में बेचे गए हैं। इसे हिंदी डिस्ट्रीब्यूशन के राइट्स 140 करोड़ रुपए में बिके हैं। इसके अलावा तमिल, कन्नड, मलयालम और ओवरसीज के साथ-साथ सेटेलाइट्स राइट्स समेत मेकर्स को अभी से 890 करोड से ज्यादा की कमाई हो चुकी है।