खास बातचीत:गुलशन ग्रोवर ने कहा-किसी की वजह से इसमें नहीं फंसा हूं, मैंने खुद एक बैडमैन का ब्रांड बनाया हुआ है

मुंबई10 दिन पहलेलेखक: उमेश कुमार उपाध्याय

पहली बार गुलशन ग्रोवर ओटीटी प्लेटफॉर्म पर 'योर ऑनर 2' सीरीज से एंट्री कर रहे हैं। इस सीरीज में भी वे खलनायक की भूमिका निभाते हुए ही नजर आएंगे। निगेटिव बैडमैन ब्रांड की इमेज को लेकर गुलशन ग्रोवर संतुष्ट हैं। सीरीज में अपने किरदार, संघर्ष और सफलता आदि पर उन्होंने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। पेश है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश -

'योर ऑनर' के पहले सीजन में नहीं थे, दूसरे सीजन में किस तरह का रोल निभा रहे हैं?
'योर ऑनर-2' में मेरी एंट्री हो रही है। मैंने इससे पहले किसी सीरीज या ओटीटी के लिए काम नहीं किया है। यह मेरी पहली सीरीज है। दूसरे सीजन में मुझे गुरजोत के कैरेक्टर में लाया जा रहा है। जिन्होंने इसका पहला सीजन देखा है, वे जानते हैं कि यह एक पिता के स्ट्रगल की कहानी है, जो अपने बच्चे को हर मुसीबत से बचाना चाहता है। अब गुरजोत पन्नू की एंट्री होने से उसकी मुसीबत, परेशानियां और तकलीफ बढ़ जाएंगी। इससे कहानी और मनोरंजक होगी। अब लोगों के मन में आएगा कि क्या यह बचा पाएगा या नहीं, क्योंकि मुझ जैसे बैडमैन को सीरीज के अंदर इंटरेस्टिंग किरदार में लाया जा रहा है।

बड़ा पर्दा तो बड़ा पर्दा, अब तीसरे पर्दे पर भी खलनायक के रोल में आ रहे हैं?
देखिए न, बड़े पर्दे पर मेरी फिल्म 'सूर्यवंशी' गूंज रही है। लोगों का मेरा कादर उस्मानी का कैरेक्टर बहुत पसंद आ रहा है। फैंस तारीफ कर रहे हैं, फोन करके बधाई दे रहे हैं। यह ऊपर वाले का आशीर्वाद है कि उसी सप्ताह में तीसरे पर्दे पर मेरी एंट्री तय हो गई, जबकि पता नहीं था कि यह सीरीज कब स्ट्रीम होगी।

इस सीरीज और कैरेक्टर की क्या ऐसी खास बात रही, जिससे ओटीटी पर एंट्री करने के लिए तैयार हुए?
ओटीटी के लिए मुझे बहुत ऑफर आ रहे थे, लेकिन कुछ रोल तो कुछ जिस प्लेटफॉर्म पर वह स्ट्रीम होने जा रही थी, वह समझ में नहीं आए, कुछ बनाने वाली कंपनी नहीं समझ में आई तो कुछ को-स्टार्स और डायरेक्टर नहीं समझ में आए, कुछ न कुछ चीजें मेरे मन को नहीं भाई। लेकिन, जब 'योर ऑनर' अप्रोच हुई, तब देखा कि यह लोगों को पहले से बहुत पसंद है। इसे नेशनल अवॉर्ड विनर डायरेक्टर ई. निवास बना रहे हैं, जो मेरे मित्र भी हैं। सबसे बड़ी बात इस सीरीज बनाने वाली कंपनी काफी रिसर्च करके सीरीज बनाती है। इस तरह सारी चीजें मुझे पसंद आई, इसलिए कर लिया।

थोड़ा किरदार के बारे में विस्तारपूर्वक बताइए?
मेरा किरदार गुरजोत पन्नू कनाडा से यहां आया है। इतना बता सकता हूं कि मजबूर बेबस पिता बिशन खोसला को और उससे जुड़े सभी लोग जो बच्चे को बचाना चाहते हैं, उसमें मेरा कैरेक्टर बहुत बड़ी रुकावट बनेगा। गुरजोत किसी भी हाल में यह होने नहीं देगा। उसके लिए बिशन को बहुत तकलीफ देगा।

निगेटिव रोल निभाने की संतुष्टि क्या पाते हैं?
देखिए, रामायण में अगर रावण नहीं होगा, तब कहानी आगे कैसे जाएगी। जब रावण पर विजय प्राप्त होगी, तभी तो मर्यादा पुरुषोत्तम राम सबका भला कर पाएंगे। उसी प्रकार से जब खलनायक की भूमिका करता हूं, तब वह कहानी को आगे बढ़ाता है। उन पॉजिटिव किरदारों के त्याग को हाईलाइट करता है। जब मेरे जैसे निगेटिव किरदार की हार होती है, तभी अच्छाई को सेलिब्रेट करने में मजा आता है। लेकिन अब यह पक्का नहीं है कि योर ऑनर में मेरी हार होगी या नहीं होगी।

आप निगेटिव कैरेक्टर के लिए ही पहचाने जाते हैं, कभी इससे निकलने की कोशिश नहीं की या मौका ही नहीं मिला?
मेरी पॉपुलैरिटी और पहचान निगेटिव कैरेक्टर के लिए है, जिसे मैंने खुद बनाया है। इसके लिए किसी ने मुझे फोर्स नहीं किया। बीच में एक्स्ट्राऑर्डिनरी पॉजिटिव रोल भी करता हूं। मैंने महासंग्राम भंवरी देवी आदि में पॉजिटिव रोल भी किया है। इंडस्ट्री में मैं अकेला खलनायक हूं, जो 10 हीरोइनों के पति का रोल निभाया हूं, जो खलनायक नहीं है। बिपाशा बसु, पद्मिनी कोल्हापुरी, मनीषा कोइराला, महिमा चौधरी, डायना हेडन के पति का रोल और कटरीना कैफ के लव इंटरेस्ट का रोल किया है, ये कैरेक्टर गुंडा, बदमाश नहीं थे। यह सारे नॉर्मल पति या किसी में गुस्से वाला पति था। मुझे इस तरह के पॉजिटिव रोल भी मिलते हैं। मेरी पहचान मेरा बैडमैन का ब्रांड बन गया है और यह बहुत चैलेंजिंग है। इसे करने में मुझे बहुत क्रिएटिव संतुष्टि मिलती है। ऐसा नहीं है कि खलनायक करने के पीछे मेहनत नहीं है। जैसे-जैसे वक्त बदल रहा है, वैसे-वैसे अदायगी, लिखावट और ऑडियंस का टेस्ट बदल रहा है। ऑडियंस के साथ-साथ चलने में बड़ी मेहनत है। मैं किसी की वजह से इसमें नहीं फंसा हूं। मैंने खुद एक बैडमैन का ब्रांड बनाया हुआ है।

आपकी पर्दे की इमेज ऐसी है की आपको देखकर लड़कियां भाग जाती हैं?
ऐसा मेरे साथ एक-दो बार नहीं, बल्कि कई जगहों पर हुआ है। अब इलेक्ट्रॉनिक मीडिया आ गया है, इसलिए वे देखती हैं कि यह भी एक कलाकार हैं। दूसरे कलाकारों की तरह ही प्यार और सम्मान देते हैं। इसलिए धीरे-धीरे भय कम हो रहा है। यह एक तरह से अच्छा भी है और बुरा भी है। पहले स्क्रीन पर देखकर लोग डरते और विश्वास करते थे, लेकिन अब यह डर भी धीरे-धीरे कम होता जा रहा है।

आपका करियर लंबा रहा है, चार दशक की जर्नी को किस रूप में देखते हैं?
सफर तो अब शुरू हुआ है। ऊपर वाले का आशीर्वाद, फैंस का प्यार और मेरी काबिलियत पर प्रोड्यूसर का विश्वास देखिए कि मेरी ऑटोबायोग्राफी का नाम बैडमैन है। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर एंट्री कर रहा हूं, तब वह किरदार बैडमैन का है। वाया कॉम 18 ने मुझे लेकर फिल्म बनाई, जिसका नाम बैडमैन है। आज नेचुरल प्रोडक्ट बनाने वाली एक बहुत बड़ी कंपनी ने मेंस ग्रुमिंग प्रोडक्ट लांच किया, उसका भी नाम बैडमैन है। मुझे तो आनंद आ रहा है। ऐसा लग रहा है कि अच्छी तरह से जर्नी अब शुरू हुई है। इसके लिए उन सभी का आभारी हूं, जिन्होंने यहां तक पहुंचाया।

इस जर्नी में अभी भी आधा दर्जन फिल्में कर रहे हैं? उनके बारे में बताइए?
कमल हासन के साथ एक फिल्म 'इंडियन-2' कर रहा हूं। मेरी इंडो-पॉलिश फिल्म 'नो मिंस नो' आ रही है। मुकेश भट्ट के बेटे विशेष भट्ट के लिए 'कैश' फिल्म कर रहा हूं। इसके अलावा और भी बहुत सारी फिल्में हैं, जिनमें काम कर रहा हूं।

आपके बेटे संजय ग्रोवर किस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं?
मेरा बेटा संजय ग्रोवर हॉलीवुड के स्टूडियो एमजीएम में बतौर फिल्म प्रोड्यूसर और एग्जीक्यूटिव काम कर रहा है। वह अब कुछ अपनी फिल्में प्रोड्यूस करने के प्रयास में हैं। बहुत जल्द उसकी फिल्में आएंगी।

आपका बचपन बड़ा संघर्षमय रहा, इससे प्रेरणा लेनी चाहिए, उन दिनों की कुछ यादें बताएं?
तकलीफ, परेशानी, फाइनेंशियल दिक्कतें, अनसर्टेन घबराहट से गुजरा हूं, लेकिन एक ही बात स्वर्गीय पिता जी ने कहा है कि पढ़ाई-लिखाई और एजुकेशन को अपनी स्ट्रैंथ बनाइए। हार्ड वर्क और ऊपर वाले में आस्था रखिए। सब कुछ अच्छा होगा। उनके बताए रास्ते पर चलते गया और मेरी लाइफ में लगातार सब कुछ अच्छा होते चला गया। यह बिल्कुल सच है कि मैंने निरमा, साबुन और फिनाइल घर-घर जाकर बेचा है। दूसरे लोगों के बनाए हुए प्रोडक्ट भी बेचे हैं। अब ऊपर वाले का आशीर्वाद देखिए कि हमारे नाम से मेरी तस्वीर के साथ बैडमैन नाम से प्रोडक्ट लांच हो गए हैं। इसे मल्टी मिलियन डॉलर कंपनी ने लांच किया है। इसमें मुझे बतौर पार्टनर लिया है। यह ऊपर वाले का आशीर्वाद देखिए कि पहले मैं घर-घर और कोठी-कोठी जाकर सामान बेच रहा था और आज वह सामान बनाने वाली कंपनी में पार्टनर हूं। यह ऊपरवाले का आशीर्वाद ही है।

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