ऋषिकेश मुखर्जी की बर्थ एनिवर्सरी:ऋषि दा से जुड़े दिलचस्प किस्से, जब 'आनंद' में राजेश खन्ना को कर लिया था साइन तो धर्मेंद्र ने नशे में फोन लगाकर रात भर किया था ऋषिकेश मुखर्जी की नाक में दम

2 महीने पहले
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फिल्म सत्यकाम की शूटिंग के दौरान डेविड अब्राहम, धर्मेंद्र और ऋषिकेश मुखर्जी। - Dainik Bhaskar
फिल्म सत्यकाम की शूटिंग के दौरान डेविड अब्राहम, धर्मेंद्र और ऋषिकेश मुखर्जी।

ऋषिकेश मुखर्जी जिनकी फिल्में हल्के-फुल्के अंदाज में लोगों का मनोरंजन कर देती थीं। वे आम जिंदगी से ही अपनी फिल्मों के लिए कहानियां उठाते थे। निर्देशन क्षेत्र में आने से पहले मुखर्जी प्रिंसिपल भी रह चुके थे। इसलिए क्या बोलना है, कैसे बोलना है और क्या नहीं कहना है? ये बातें भली-भांति जानते थे। कई बार वो धर्मेंद्र, अमिताभ बच्चन, राजेश खन्ना जैसे स्टार्स को किसी स्कूली बच्चे की तरह समझाते तो कभी सुना भी देते थे। 30 सिंतबर को बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर जानते हैं ऋषि दा की जिंदगी के किस्से...

फिल्म 'नमक हराम' (1973) के सेट पर ऋषिकेश मुखर्जी राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन के साथ।
फिल्म 'नमक हराम' (1973) के सेट पर ऋषिकेश मुखर्जी राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन के साथ।

कोई लेट आता तो हो जाती थी शूटिंग कैंसिल

उनकी फिल्म की शूटिंग से जुड़ा एक मशहूर किस्सा है। एक बार एक बड़ा स्टार उनकी फिल्म के सेट पर 9 बजे की शिफ्ट होने के बावजूद करीब 12:30 बजे पहुंचा। चूंकि ऋषि दा को सेट पर लेट आने वाले लोग पसंद नहीं थे इसलिए जब वो स्टार आया तो वे उस समय तो कुछ नहीं बोले। जब स्टार ने मेकअप करवा लिया और शॉट देने के लिए तैयार हो गया तब अचानक ऋषि दा ने कहा कि आज शूटिंग नहीं होगी। उनका मूड कब बदल जाए, कोई नहीं जानता था। उनसे जुड़ा एक और किस्सा यह है कि एक बार अमोल पालेकर उनके साथ शूटिंग कर रहे थे। उन्होंने कोई शॉट दिया जो काफी अच्छा था पर अमोल को लगा कि वे इसे दोबारा और बेहतर कर सकते हैं। मुखर्जी के मना करने पर भी जब अमोल अड़े रहे तो मुखर्जी ने दोबारा शॉट तो लिया, लेकिन फाइनल फिल्म में उन्होंने पहले वाला शॉट ही रखा।

किशोर कुमार के गार्ड ने गेट पर रोका तो गुस्सा हो गए थे

फिल्म ‘आनंद’ में ऋषिकेश दा पहले किशोर कुमार को कास्ट करने वाले थे पर उन्हीं दिनों किशोर कुमार का एक बंगाली प्रोड्यूसर से विवाद हो गया और उन्होंने गार्ड को निर्देश दिए कि कोई बंगाली मुझसे मिलने आए तो उसे भगा देना। एक दिन ऋषिकेश दा उनके घर पहुंचे लेकिन गार्ड ने उन्हें जाने नहीं दिया। इसके बाद ऋषिकेश मुखर्जी ने किशोर कुमार के साथ फिल्म बनाने का इरादा ही छोड़ दिया।

धर्मेंद्र की वजह से पूरी रात जागे थे ऋषिकेश मुखर्जी

1971 में जब ऋषिकेश दा ‘आनंद’ फिल्म बनाने के बारे में सोच रहे थे तो सबसे पहले उन्होंने इसकी कहानी बेंगलुरु से मुंबई की हवाई यात्रा के दौरान धर्मेंद्र को सुनाई थी। धर्मेंद्र बड़े खुश हुए और उन्होंने कहा कि ये फिल्म तो मैं ही करूंगा। कुछ दिनों बाद अखबार में प्रकाशित हुआ कि फिल्म के हीरो राजेश खन्ना होंगे। फिर क्या था धर्मेन्द्र ने जमकर शराब पी और फिर देर रात ऋषिकेश दा को कॉल किया और कहा कि आप मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकते हैं? ऋषि दा उन्हें शांति से समझाते रहे और कहते रहे कि धरम हम सुबह बात करेंगे, लेकिन धर्मेंद्र थे कि लगातार अपनी बात दोहराए जा रहे थे। ऐसा करते-करते उन्होंने रातभर ऋषिकेश दा को सोने नहीं दिया।

बिमल रॉय की टीम में एडिटर थे ऋषि दा

ऋषिकेश दा 50 के दशक में मुंबई आए, लेकिन वो अकेले नहीं थे बल्कि बिमल रॉय की पूरी टीम उनके साथ थी। जिसमें राइटर नवेंदु घोष और निर्देशक असित सेन भी थे। ऋषिकेश दा बिमल रॉय की टीम में एडिटर का काम करते थे। वह उनके साथ लगभग पांच साल तक न्यू थिएटर्स में काम कर चुके थे। एक बार फुर्सत के पलों में उनकी टीम ने सोचा कि चलो कोई फिल्म देखते हैं। सभी इरोज सिनेमा में अकीरा कुरोसावा की फिल्म ‘राशोमोन’ देखने पहुंचे। जब फिल्म देखकर वापस लौटे तो सभी मौन थे। तब बिमल दा ने पूछा कि कौन है हमारी टीम में जो ऐसी बेहतरीन कहानी लिख सकता है? ऋषि दा बोले, ‘आप मौका तो दीजिए लिखने का।’ बस यहीं से बिमल रॉय प्रोडक्शंस की नींव रख गई और ऋषि दा अपना बेहतरीन काम दिखाने में जुट गए। बतौर डायरेक्टर उनकी पहली फिल्म ‘मुसाफिर’ आई, वहीं दूसरी फिल्म ‘अनाड़ी’ ने पांच फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते।

शतरंज खेलते-खेलते अचानक से दे देते थे शूटिंग के लिए निर्देश

गुलजार के साथ ऋषिकेश दा ने कई फिल्मों में काम किया। फिल्म ‘गुड्डी’ का निर्देशन भी गुलजार खुद करने वाले थे, लेकिन कुछ कारणवश फिल्म के निर्देशन की कमान ऋषि दा को संभालनी पड़ी। जब उन्होंने फिल्म पूरी की और वह परदे पर हिट हुई तो खुद गुलज़ार ने एक इंटरव्यू में कहा था कि ऋषिकेश मुखर्जी का काम बिल्कुल अलग ही स्टाइल में होता है। वे एक्स्ट्रा शॉट्स या फिर एक्स्ट्रा एंगल में विश्वास नहीं करते और एडिटर होने की वजह से वे अपने दिमाग में ही बहुत सारे सीन एडिट कर लेते हैं। शूटिंग सेट पर जब फिल्मांकन का काम हो रहा होता था तो वे शतरंज खेला करते थे और फिर अचानक से उठकर इंस्ट्रक्शन देने लगते थे।

सीन सीक्रेट रखकर जब असरानी को पहना दिया सूट-बूट

असरानी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि फिल्म ‘चुपके-चुपके’ की शूटिंग चल रही थी और एक सीन था जिसके बारे में धर्मेंद्र को कुछ भी नहीं बताया गया था, क्योंकि ऋषि दा अपने सीन को एक्टर्स से सीक्रेट ही रखते थे। एक सीन के लिए उन्होंने मुझे सूट पहना दिया। तभी धर्मेंद्र वहां ड्राइवर के कपड़ों में आए और मुझे सूट में देखकर हैरान होते हुए बोले... ‘मैं तेरा ड्राइवर बना हूं क्या? अगला सीन क्या है? तुझे सूट कैसे मिल गया?’ वहीं दूर बैठे ऋषिकेश दा ने कहा, ‘धर्मेंद्र उससे क्या पूछता है? उसे कुछ पता होता तो वह डायरेक्टर नहीं होता।’

करियर में इकलौती बोल्ड फिल्म, जिसे दर्शकों ने नकार दिया

ऋषिकेश दा ने लीक से हटकर ‘सबसे बड़ा सुख’ नाम की एक बोल्ड फिल्म भी बनाई थी। असरानी और उत्पल दत्त जैसे एक्टर्स ने इसमें ऐसा काम किया जो यकीन करने लायक नहीं है। फिल्म समीक्षकों ने तो यहां तक कहा कि ऐसा लगता है ऋषिकेश मुखर्जी 70 के दशक में एक प्रयोग करके देख रहे थे। वह ऐसी फिल्म बनाकर कुछ क्रांतिकारी करने की सोच रहे थे, लेकिन जोनर उन्होंने गलत चुन लिया था। साफ तौर पर फिल्म बी-ग्रेड सिनेमा वाला फील दे रही थी।

‘आनंद’ के लिए राजेश खन्ना ने फीस में से कम किए थे 7 लाख

राजेश खन्ना उन दिनों 8 लाख फीस लेते थे। जब उन्हें पता चला कि कई बड़े एक्टर्स के पास से ये फिल्म छूटी है तो वे उतावले होकर ऋषिकेश दा के पास पहुंचे और उनसे कहा कि मैं फिल्म करने के लिए तैयार हूं। तब ऋषिकेश दा ने उनसे कहा अगर आपको मेरे साथ काम करना है तो मेरी तीन शर्तें माननी होंगी। टाइम पर आना होगा। अधिक डेट्स देनी होंगी और तीसरी शर्त ये कि एक लाख में ही काम करना होगा। राजेश बिना कुछ कहे उनकी सभी शर्तों पर राजी हो गए।

फिल्म आनंद में अमिताभ बच्चन और राजेश खन्ना।
फिल्म आनंद में अमिताभ बच्चन और राजेश खन्ना।

राजेश खन्ना के लिए बदल दिया था फिल्म का क्लाईमैक्स

ऋषिकेश दा फिल्म ‘नमक हराम’ बना रहे थे। वे ये बात जानते थे कि उनकी फिल्म का हीरो एक सुपरस्टार है। इस फिल्म के ओरिजिनल क्लाईमैक्स में अमिताभ बच्चन के किरदार को मरते हुए दिखाया जाना था पर राजेश खन्ना को लगा कि कहीं अमिताभ मरने वाला सीन कर पॉपुलैरिटी न खींच ले जाएं तो उन्होंने ऋषि दा से जिद की कि मरने वाला सीन उनके ऊपर ही फिल्माया जाए। यहां तक कि उन्होंने अपनी ही फोटो पर माला भी चढ़ा दी थी। जब अमिताभ को इसकी भनक लगी तो वे निराश हो गए। हालांकि फिल्म जब रिलीज हुई तो दर्शकों ने राजेश खन्ना से ज्यादा अमिताभ बच्चन के अभिनय को पसंद किया। दर्शकों की प्रतिक्रिया देखकर राजेश खन्ना ने फिर अमिताभ के साथ कभी कोई फिल्म नहीं की।

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