क्रूज ड्रग्स केस:आर्यन खान को अगले 2 दिन में बेल नहीं मिली तो 15 नवंबर तक जेल में रहना पड़ सकता है

मुंबई7 महीने पहलेलेखक: अमित कर्ण
  • हाईकोर्ट में 15 नवंबर और सुप्रीम कोर्ट में 7 नवंबर तक दिवाली की छुट्टी
  • आर्यन की बेल पर 3 सीनियर वकीलों ने भास्कर को बताए सारे पेंच

आर्यन खान की जमानत अर्जी पर 27 अक्टूबर तक भी हाईकोर्ट में कोई फैसला नहीं हो पाया है। 28 अक्टूबर को कोर्ट में फिर सुनवाई होनी है। उम्मीद है कि 28-29 अक्टूबर तक हाईकोर्ट जमानत पर कोई फैसला सुना देगी। पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने 26 और 27 अक्टूबर को आर्यन के पक्ष में दलीलें रखी हैं। अरबाज मर्चेंट और मुनमुन धमीचा के वकीलों ने भी जिरह की है।

28 अक्टूबर को NCB की तरफ से वकील दलील देंगे। अगर हाईकोर्ट 29 अक्टूबर तक जमानत पर कोई फैसला नहीं देता है तो आर्यन को कम से कम 15 नवंबर तक जेल में ही रहना पड़ सकता है।

आर्यन के मामले में आगे की राह कितनी आसान या मुश्किल है, उस पर दैनिक भास्कर ने कानून के विशेषज्ञों से बातचीत की। सीनियर एडवोकेट उज्जवल निकम, बॉम्बे हाईकोर्ट की एडवोकेट सबीना बेदी सच्चर और सीनियर एडवोकेट आदित्य प्रताप ने सिलसिलेवार ढंग से कोर्ट में आगे बन सकने वाली परिस्थितियों का एनालिसिस किया है।

हाईकोर्ट में फिलहाल ये है स्थिति
20 अक्टूबर को NDPS कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद इसी दिन हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। हाईकोर्ट ने सुनवाई के लिए 26 अक्टूबर की तारीख तय की। उसके बाद 28 को भी इस पर सुनवाई होगी। आर्यन की बेल को लेकर हाईकोर्ट में तीन तरह की कंडीशन बन रही हैं।

कंडीशन 1 - 29 या इससे पहले हाईकोर्ट जमानत याचिका मंजूर कर ले। तब आर्यन 29 से 30 अक्टूबर तक अपने घर जा सकते हैं।

कंडीशन 2 - सुनवाई दो दिन से जारी है। 26 और 27 अक्टूबर को सुनवाई हो चुकी है। अब 28 को भी फिर से सुनवाई होगी। हाईकोर्ट 29 अक्टूबर, शुक्रवार तक खुला है।

30 को शनिवार, 31 को रविवार है और 1 नवंबर से 15 नवंबर तक दिवाली वेकेशंस होंगे। अमूमन शनिवार को कोर्ट में केस की फाइलिंग ही होती है। सुनवाई के चांस कम रहते हैं। हालांकि जज लास्ट मिनट डिसाइड करें तो स्पेशल कोर्ट सुनवाई कर सकता है। इसमें अगर बेल रिजेक्ट होती है, तो आर्यन को जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट में लगानी होगी।

कंडीशन 3 - एक संभावना ये भी है कि NDPS कोर्ट की तरह हाईकोर्ट जमानत पर फैसला 15 नवंबर तक सुरक्षित रख ले। हालांकि इसकी उम्मीद बहुत कम है। इसका एक कारण ये भी है कि दिवाली के बाद जजों के रोस्टर चेंज होंगे, फिर कोई नया जज बेंच पर आए और फिर से उनके सामने सारी दलीलें रखी जाएं, ऐसा संभव नहीं है। हाईकोर्ट ही जमानत मंजूर या खारिज करे, ऐसी उम्मीद ज्यादा है, क्योंकि धारा 21 के तहत नियम है कि जमानत के फैसलों को बहुत दिनों तक नहीं रोका जा सकता। इसमें कोर्ट को फैसला जल्दी सुनाना होता है।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हो सकती है स्थिति?
अब आते हैं सुप्रीम कोर्ट पर। वहां आर्यन का मामला तब जाएगा, जब हाईकोर्ट से आर्यन को राहत न मिले। यहां भी तीन कंडीशन बन सकती हैं।

कंडीशन 1 - सुप्रीम कोर्ट के कैलेंडर को देखें तो वहां 1 से 7 नवंबर तक छुट्टी है। बहरहाल, छुट्टियों में भी आर्यन मामले में सुनवाई के चांस बने सकते हैं, अगर कोर्ट हॉलिडे में सुनवाई करे।
इसके लिए आर्यन के वकीलों को काफी समझदारी से काम लेना होगा और हाईकोर्ट से बेल रिजेक्ट होते ही ऑर्डर की कॉपी हासिल करके सुप्रीम कोर्ट में लगानी होगी। अगर सुप्रीम कोर्ट इस केस को अर्जेंट मैटर मानता है तो स्पेशल कोर्ट में सुनवाई की जा सकती है।

कंडीशन 2 - अगर हाईकोर्ट 28 अक्टूबर को ही आर्यन की बेल रिजेक्ट कर दे तो संभावना बनती है कि उसी दिन या अगले दिन सुप्रीम कोर्ट में अपील लगाई जाए। अगर ऐसा होता है तो 29 को इस केस में सुनवाई का समय मिल सकता है। तब एक संभावना बनती है कि आर्यन को 29 को ही सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल सकती है।

कंडीशन 3 - सुप्रीम कोर्ट इसे अर्जेंट केस कंसिडर नहीं करता है तो 8 नवंबर के पहले इसमें सुनवाई नहीं हो पाएगी। 29 को भी अगर केस सुप्रीम कोर्ट में फाइल हो जाता है तो भी 8 नवंबर को ही सुनवाई हो जाए, इसकी उम्मीद कम है। हो सकता है कि कोर्ट से 9 या 10 नवंबर के बाद की ही डेट मिले।

वॉट्सऐप चैट कितना बड़ा सबूत है?
रहा सवाल आर्यन के खिलाफ वॉट्सऐप चैट्स का तो NCB उसे कोर्ट में बतौर सेकेंडरी एविडेंस यूज कर सकता है, मगर आगे चलकर ट्रायल में NCB को वह प्रूव करना होगा कि उन्होंने उसे एविडेंस के तौर पर क्यों यूज किया? अभी फिलहाल मामला बेल के स्टेज में है। ट्रायल तब होगा, जब NCB चार्जशीट फाइल करेगी।

कुछ मामलों में कोर्ट ने वॉट्सऐप चैट्स को सेकेंडरी एविडेंस माना है, मगर इसे प्राइमरी एविडेंस के तौर पर कम ही कंसिडर किए जाने के चांस रहते हैं, क्योंकि सोशल मीडिया चैट्स में एविडेंशियल वैल्यू इतनी भी नहीं मानी जाती कि सिर्फ उस सबूत के आधार पर ही आरोपी को कसूरवार ठहरा दिया जाए।

कुल मिलाकर, अगर आर्यन खान को 29 अक्टूबर तक हाईकोर्ट से जमानत नहीं मिलती है तो उन्हें 10 से 15 नवंबर तक जेल में रहना पड़ सकता है।