जामताड़ा के डायरेक्टर सौमेंद्र पाधी से बातचीत:इंजीनियरिंग छोड़ कर डायरेक्टर बने, 10 महीने तक परिवार से छुपा कर रखी थी ये बात

6 दिन पहलेलेखक: अरुणिमा शुक्ला

पिछले दिनों नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई सीरीज जामताड़ा ने खूब धूम मचाया था। अब इस सीरीज का दूसरा सीजन भी नेटफ्लिक्स पर आज रिलीज होने वाला है। इस सीरीज को डायरेक्ट किया है नेशनल अवॉर्ड विनिंग फिल्म बुधिया सिंह के निर्देशक सौमेंद्र पाधी ने। सौमेंद्र घर से चले तो इस उम्मीद से कि वो एक बेहतर इंजीनियर बनेंगे, लेकिन बीच में ही उन्होंने सपनों की नगरी मुंबई का रुख कर लिया और बन गए फिल्म निर्देशक। दैनिक भास्कर ने सौमेंद्र से उनके इस उतार-चढ़ाव भरे सफर के बारे में बातचीत की। पेश हैं प्रमुख अंश-

इंजीनियर से फिल्ममेकर कैसे बने?

इंजीनियरिंग करते समय ही पता चल गया था कि मुझे इंजीनियरिंग नहीं करना है। घरवालों से ये बात बताने के लिए कभी हिम्मत नहीं हुई कि फिल्म बनाना चाहता हूं क्योंकि उस समय मेरे जानने वालों में से कोई भी इस इंडस्ट्री में नहीं था। मेरे सभी दोस्त भी इंजीनियर ही थे इसलिए कभी भी हिम्मत नहीं हुई। इसके बाद मैं करियर बनाने के लिए हैदराबाद चला गया। वहां पर मैं FTII के स्टूडेंट से मिलता था या जो लोग इस फिल्म मेकिंग के फील्ड में थे। इसके बाद ही मैंने मुंबई आने का फैसला किया और मुंबई चला गया। वहां पर मैंने बतौर असिस्टेंट एंड कास्टिंग डायरेक्टर एक ऐड कंपनी कोड रेड जॉइन की। वहां पर मुझे बहुत ही अच्छे गजराव राव जी जैसे कोलैबोरेटर्स मिले। गजराव राव बहुत अच्छे फिल्म मेकर और एक्टर हैं। वहीं पर मैं शॉर्ट फिल्म बनाता था और गजराव ने ही मुझे पहला मौका भी दिया, जिनके साथ मिलकर मैंने फिल्म बुधिया सिंह की। मैंने जो कुछ भी सीखा है वो सब मैंने हिट और ट्रायल करके ही सीखा है।

फिल्म मेकिंग में आने पर फैमिली का रिएक्शन कैसा था?

सच कहूं तो मेरी फैमिली को इन सब चीजों के बारे में कुछ भी पता नहीं था। उन्हें नहीं पता था कि मैं हैदराबाद के बाद मुंबई आ गया हूं। करीब 9-10 महीने बाद फैमिली को मेरी कंपनी की ओर से हाईकोर्ट के 2 लेटर गए थे। इसके बाद वो पैनिक हुए। जब पता चला कि मैं मुंबई में हूं, तो करीब एक साल तक हमारे बीच बात ही नहीं हुई थी। मैं भी श्योर नहीं था कि मुझे लाइफ में क्या चाहिए क्योंकि फिल्म मेकिंग में लीनियर पाथ होता नहीं है। मुझे बहुत टाइम लगा, इन सारी चीजों को फीगर आउट करने में कि मुझे लाइफ में आगे क्या करना है। इसके बाद जब मैंने शॉर्ट फिल्म बनानी शुरू की तब मुझे सारी चीजें क्लियर हो गईं कि मुझे लाइफ में आगे क्या करना है। जब तक मुझे डेब्यू फिल्म के लिए नेशनल अवाॅर्ड नहीं मिला था तब तक मेरी फैमिली को नहीं लगा था कि मैं कुछ करता भी हूं। उस दौरान मेरी शादी भी हो गई, तो घरवाले कहते थे कि तुम MBA कर लो, लंदन जा कर कहीं भी कर लो, हम सब मैनेज कर लेंगे, पर अब मेरे इस काम से सब खुश हैं।

नेशनल अवॉर्ड मिलने का एक्सपीरियंस कैसा था?

सच कहूं तो नेशनल अवॉर्ड घर वालों के लिए था। उनको इससे ये यकीन हो गया कि लड़का कुछ कर रहा है। रिपोर्टर भी घर पहुंच गए थे। फिर घरवालों को लगा कि मैं कुछ अच्छा ही कर रहा हूं जिसके लिए ये अवाॅर्ड मिला है। मेरे इस सफर में मेरे भाई, भाभी और मेरी वाइफ ने मुझे बहुत सपोर्ट किया। मेरी वाइफ मेरे साथ एक दोस्त के जैसी है और कॉलेज के दिनों से ही हम साथ में हैं। मेरी वाइफ ही है, जो मेरे साथ इस जर्नी में हर समय साथ खड़ी थी। उसने कभी भी मेरे काम को लेकर शक नहीं किया और न ही कभी कोई सवाल पूछा। उसके ही सपोर्ट सिस्टम से मुझे हिम्मत मिली और मैं जो चाहता था वो मैं कर पाया।

पहली फिल्म से लेकर अभी तक का सफर कैसा रहा?

मुझे जामताड़ा सीजन 1 के जैसे ही जामताड़ा सीजन 2 के लिए भी कम्प्लीट ट्रस्ट और आटोनॉमी मिली है। सीरीज के जो प्रोड्यूसर्स हैं, उन्हें मुझ पर पूरा भरोसा है और उन्होंने मुझे इस चीज की पूरी छूट दी कि मुझे जो करना है, मैं वो कर सकता हूं। मैं Vicom और Netflix को भी थैंक्यू बोलना चाहूंगा क्योंकि उन्होंने भी मुझे फ्री हैंड दिया। भले ही पहले सीजन में हमारे पास रिसोर्सेस की कमी थी, पर न्यू स्टार कास्ट करने की पूरी छूट थी। इसी वजह से हमने FTII, NSD या जो लोग लोकल थिएटर्स से जुड़े थे, उन्हीं को इस सीरीज के लिए कास्ट किया था। इनमें से कुछ लोग ऐसे भी थे, जिन्होंने कैमरा शायद कभी फेस ही नहीं किया था। ये लोगों का भरोसा ही है जो नई चीजों को ट्राई करने का हौसला देता है जो जल्दी मिलता नहीं है। इस सीरीज के कास्ट भी नए थे और मैं भी नया ही था, इसलिए काम करने की भूख ज्यादा थी।

पहले सीजन से जामताड़ा 2 की स्टोरी कितनी अलग है?

सीजन 2 बहुत ज्यादा डीप रूटेड इन रियलिटी है। सीजन 1 में कहानी में थोड़ा फिक्शन भी था, पर सीजन 2 पूरी तरह से समाज की सच्चाई पर बेस्ड है। इस सीजन में ऐसी रियलिटी है जो आपको शाॅक कर सकती है। इस सीजन में ऐसी सच्चाइयां हैं जो लोगों को बहुत ही ज्यादा सरप्राइज कर सकती है।

कितना चैलेंजिंग रहा शूट?

इस सीजन का शूट काफी चैलेंजिंग था क्योंकि कोरोना भी था और शूटिंग भी बीच में रोकनी पड़ी थी। वापस सभी चीजों को रिक्रिएट करना पड़ा था। ये बहुत बड़ा शो था और शेड्यूल भी बहुत हेक्टिक था। पर इसकी टीम बहुत सपोर्टिव रही और प्लेटफॉर्म भी हमारी प्रॉब्लम को समझ गए थे। आप तभी अच्छे हैं, जब आपकी टीम अच्छी हो। तो मेरी टीम ने मेरा बहुत सपोर्ट किया था।

मुंबई का सफर कैसा रहा?

मेरा लक बहुत अच्छा है कि मैं बहुत संपन्न परिवार में जन्मा हुआ हूं। उस समय मुझे ये स्ट्रेस नहीं था कि मुझे पैसे भेजने हैं घर पर। मेरे सामने ये चैलेंज था कि मुझे अपने आप का भरण-पोषण करना था और इंडिपेंडेंट बनना था, क्योंकि मुझे उस समय पता नहीं था कि मुझे क्या और कैसे करना है। मेरे पास कोई भी मुझे गाइड करने वाला भी नहीं था, इसलिए मेरा चैलेंज मुझसे ही था। मुझे कोई बताने वाला नहीं था कि मुझे आगे क्या करना है। मैं शॉर्ट फिल्में बनाते गया और ऐसे ही करके मैंने ये काम सीखा। मैं बहुत लकी हूं कि मुझे सही समय पर सही लोग मिलते चले गए।

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