जयेशभाई जोरदार का भास्कर इंटरव्यू:रणवीर सिंह को पत्नी दीपिका का ओपिनियन बहुत मायने रखता है, पर्सनल लाइफ पर बोले- मुझे बेटी चाहिए

मुंबई13 दिन पहलेलेखक: उमेश कुमार उपाध्याय

रणवीर सिंह की फिल्म जयेशभाई जोरदार 13 मई को रिलीज होने जा रही है। ऐसे में रणवीर ने दैनिक भास्कर से बातचीत की और फिल्म की मेकिंग कैरेक्टर के साथ-साथ उन्होंने अपने करियर पर भी बात की। वहीं रणवीर ने पर्सनल लाइफ पर बात करते हुए कहा कि मैं चाहता हूं कि मुझे बेटी हो। पढ़िए और वीडियो में देखिए बातचीत

जयेशभाई जोरदार में बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन कैसे किया ?
मैं हर किरदार के लिए कोशिश करता हूं कि फिजिकल ट्रांसफॉर्मेशन करूं। मेरे पूरे प्रोसेस में शुरुआत वहीं से होती है। जब तक मेरी बॉडी में बदलाव नहीं आए, मेरी फिजिक में वह कैरेक्टर नहीं आए, तब तक मेरे अंदर वह फील नहीं होता है। जैसे अलाउद्दीन खिलजी का कैरेक्टर जब प्ले कर रहा था, तब पूरा डायट बदल दिया था। उसी तरह जयेशभाई जोरदार के वर्कशाप में कभी लगा ही नहीं कि बमन साहब के कैरेक्टर से मुझे कोई थ्रेट है।

उन्होंने कहा कि बमन सर के सामने तू खड़ा रहता है, तब लगता ही नहीं है कि बमन से तू डर जाएगा कि वे एक थप्पड़ मारेंगे, तब एक्चुअली तुझे कुछ लगेगा। यह तेरे जो मशल्स हैं, उसे घटा दे। फिर मैंने दो सप्ताह ऑफ लेकर सब कुछ घटा दिया। एकदम दुबला-पतला बन गया ताकि वे पिता बने बमन और मेरा बेटा का कैरेक्टर डायनामिक लगे। ऐसा कि जयेश की अपने पिता से फटती है। उस नजरिए से मैंने डायट चेंज किया। पूरे तरीके से वीगेन हो गया। वेट छोड़ दिया। फंक्शनल शुरू किया, स्पोर्ट्स खेलना शुरू किया। उस दौरान मैं फुटबॉल, बैटमिंटन, बॉस्केट बॉल, स्कॉश शुरू किया।

एक्टिंग ही सही पर फादरहुड पर आपकी क्या फीलिंग है ?
यह सीन एक गाने में आता है। मैंने तो कभी एक्सपीरिएंस नहीं किया है, लेकिन बतौर एक्टर अक्सर ऐसा करना पड़ता है कि अपने आपको किसी तरह उस इमोशनल जर्नी से कनेक्ट कर सके। यह तरीका क्या है, यह तो किसी को पता नहीं। यह हर किसी का फिक्स भी नहीं रहता, हर किसी का प्रोसेस भी अलग होता है। अब जैसे कि लुटेरा में मेरे कैरेक्टर को गोली लगती है, पर मुझे तो कभी गोली नहीं लगी।

उसी तरह जयेशभाई जोरदार में करना था, पर मेरी तो अभी-अभी शादी हुई है। मुझे कोई बच्चे नहीं हैं। फिर वह फादरवुड का एक इमोशन एक आर्टिस्ट कैसे कैप्चर कर पाए। मैंने अपनी लाइफ में जब भी फादरहुड का वह एक्सपीरिएंस किया है, तब अपनी मेमोरी में वापस उसे एक्सेस करने जाता था। उन एक्सेस से मेरे पिताजी का मिलता था।

आपको क्या चाहिए? बेटा या बेटी?
मुझे क्या चाहिए! इस पर बात करेंगे, इससे पहले बता दूं कि अभी एक मोहतरमा मुझे धन्यवाद देते हुए बयां कर रही थीं कि आप ऐसी फिल्म कर रहे हैं, जो मेरे साथ भी हुआ है। मैं जब पैदा पुई थी, तब मेरी दादी मुझसे मिलने, गले लगाने के लिए मना कर दिया था। वह तो मुझे देखना भी नहीं चाहती थीं। मेरे पिताजी को उनके पास जाकर भीख मांगनी पड़ी कि प्लीज ऐसा मत करो। इतने जड़, इतने कठोर मत बनो। यह बात मेरे दिल को छू गई।

इसलिए मेरे दिल के बड़े करीब है यह कैरेक्टर, यह दुनिया और यह कहानी। पर्सनली मैं बोलूं तो मुझे लड़की ही चाहिए। मुझे लगता है कि लड़का मेरी तरह होगा, बदमाश होगा, सताएगा। सब मेरे साथ यार-दोस्त, मेरे बेस्ट फ्रेंड, मेरी फैमिली…सब कहते हैं कि आपको लड़की होनी चाहिए। फिर तो ऐसे फिदा हो जाएंगे कि आपको कुछ दिखेगा ही नहीं। ऐसा मैं चाहता हूं।

डेब्यू से अब तक अपनी एक्टिंग में क्या बदलाव देखा?
मैंने जब जयेशभाई जोरदार देखी, तब मुझे लगा कि यार दस सालों में लड़का तो कुछ तो सीख गया है। पहले मैं बहुत रॉ हुआ करता था, तब एक एक्सप्लोर मूड में था कि खुद की क्रिएटिविटी, खुद की कैपिविलिटी, स्किल्स सबके साथ एक्सपैरिमैंट करने की कोशिश रहा था, कि ऐसा ट्राई करते हैं, वैसा ट्राई करते हैं। अभी मैं एफिसिएंट एक्टर हो गया हूं। आप स्किल एक्वायर करते हैं, वह स्किल्स है क्या। वह आपकी एक्टिंग में इस्तेमाल करने वाले औजार हैं।

मैंने फिल्म की शूटिंग खत्म की, तब तक एक गैप आ गया था। परफॉर्म करने के काफी अर्से बाद मैंने जयेशभाई जोरदार फिल्म देखी, तब तक वह ऑव्जर्ब किया। नए नजरिए से देख रहा था, तब लगा कि यह एकदम नया है। मैं अक्सर अपने आपको नंबर नहीं देता हूं, लेकिन यह देखकर मुझे खुशी हुई। मुझे लगा कि इतना कुछ करने के बाद कुछ नया पर्जेंट कर सकता हूं।

दीपिका और आपका एक दूसरे की फिल्मों पर क्या रिएक्शन होता है?
मुझे तो उनका ओपिनियन बहुत मैटर करता है। वो बहुत ओनेस्टली बताती हैं। मेरी लाइफ में जो सर्कल है, वह स्मॉल सर्कल है। मेरे पैरेंट्स, मेरी फैमिली, मेरे फ्रेंड्स, मेरी टीम स्मॉल सर्कल है। लेकिन मैं उस सर्कल में हर शख्स पर बहुत विश्वास करता हूं।

वह हमारी रिलेशनशिप, फ्रेंड्स फैमिली अब दीपिका के साथ भी ऐसी है कि जो अच्छा लगा, वह बता देंगी कि अच्छा है, जो बुरा लगा, उसे भी बेझिक बता देंगी। ऐसा मेरे लिए एक एडवांटेज है कि वह एक बेहतरीन अभिनेत्री हैं और सिनेमा में उनका तर्जुबा इतना अच्छा है कि वे मुझे बता पाएं कि अच्छा-बुरा एडवाइज दे सकें, गाइडेंस दे सकें। वह मेरे लिए बहुत अच्छी बात है।

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