पति रसिक के निधन के बाद स्टेज पर लौटीं केतकी:बोलीं- एक एक्ट्रेस के नाते मुझे मेरे इमोशंस छुपाने आते हैं, मैंने वही किया

3 दिन पहलेलेखक: किरण जैन

केतकी दवे अपने पति रसिक दवे के निधन के दो दिन बाद यानी 1 अगस्त को ही स्टेज में परफॉर्मेंस दी। दरअसल, केतकी एक गुजराती प्ले - खेल खेले खेलैया का हिस्सा हैं। रसिक के निधन के दो दिन बाद ही केतकी के इस प्ले का शो होना था। वह बिना झिझक के उस प्ले में शामिल हुई जिसमे ना सिर्फ उन्होंने उम्दा परफॉर्मेंस दिया बल्कि उन्हें वहां मौजूद ऑडियंस ने स्टैंडिंग ओवेशन भी दिया।

मेरा पर्सनल लॉस दूसरों पर भारी कैसे पड़ने दूं- केतकी
उस पल को याद करते हुए केतकी ने दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान कहा, "बतौर एक्टर स्टेज पर मैं तो सिर्फ अपना काम कर रही थी लेकिन ऑडियंस से इस तरह का रिएक्शन, इस तरह का प्यार मिलेगा, ऐसा तो मैंने बिलकुल नहीं सोचा था। रसिक चाहते थे की चाहे कुछ भी हो, मैं इस प्ले को कैंसिल नहीं करूं, मैंने वही किया। इस प्ले में मेरे अलावा कई कलाकार हैं, हम सब एक टीम हैं, भला मेरा पर्सनल लॉस दूसरों पर भारी कैसे पड़ने दूं। एक अभिनेता के नाते, मुझे मेरे इमोशंस छुपाने आते है, मैंने वही किया।"

मैं मंच पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देती हूं- केतकी
वे आगे कहती है, "खेल खेले खेलैया एक कॉमेडी और एंटरटेनिंग प्ले हैं जिसमे मेरा कॉमिक किरदार हैं। मैंने भी अपने गम को कुछ देर भुलाकर, स्टेज पर बहुत ईमानदारी से अपना किरदार निभाया। पहले दिन थिएटर मेरा शिक्षक रहा है और आज भी है। जब मैं मंच पर रहती हूं तो मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देती हूं, कल भी मैंने वही किया। जब ऑडियंस की तरफ से स्टैंडिंग ओवेशन मिला, तो उनका प्यार देखकर भावुक हो गई। रसिक की एक बात ने मुझे हिम्मत दी - चाहे कुछ भी हो जाए शो मस्ट गो ऑन। मैंने भी शो जारी रखा और आगे भी अपना काम इसी तरह से जारी रखूंगी।"

केतकी दूसरी औरतों के लिए प्रोत्साहन बनी- किरण भट्ट
केतकी के परफॉरमेंस के बारे में, प्ले के डायरेक्टर किरण भट्ट (तारक मेहता फेम नट्टू काका) कहते है, "शो शुरू होने से पहले हम सबने केतकी के साहस के लिए तालियां बजाई और उन्होंने सिर्फ एक लाइन कही - हम जोरदार शो करेंगे। केतकी इस प्ले की लीड एक्ट्रेस हैं और जिस तरह का परफॉरमेंस उन्होंने दिया वो वाकई में हैरान कर देने वाला था। जब वे स्टेज पर आई तो वहां मौजूद कोई भी आर्टिस्ट ने किसी भी तरह के दुख की बात नहीं की। नाटक में तो केतकी अच्छा काम करती हैं ही, लेकिन जिस साहस के साथ उन्होंने परफॉर्म किया वो बहुत अच्छा था। दूसरी औरतों के लिए वे प्रोत्साहन बनी। ऑडियंस ने उन्हें सम्मान के साथ स्टैंडिंग ओवेशन दिया।"

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