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नदीम-श्रवण की कहानी:90 के दशक में हिट संगीत देकर छा गई थी नदीम-श्रवण की जोड़ी, गुलशन कुमार के मर्डर केस में फंसे नदीम और टूट गई दोनों की जोड़ी

5 महीने पहले
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जाने-माने संगीतकार श्रवण राठौड़ कोरोना संक्रमण के कारण मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती हैं। उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। श्रवण 90 के दशक में बॉलीवुड के जाने-माने संगीतकार थे। उन्होंने संगीतकार नदीम के साथ मिलकर कई फिल्मों में बेहतरीन संगीत देकर पॉपुलैरिटी हासिल की थी। नदीम-श्रवण की जोड़ी 90 के दशक की सबसे चर्चित जोड़ियों में से एक मानी जाती थी।

दोनों की जोड़ी ने पहली बार 1977 में भोजपुरी फिल्म 'दंगल' के लिए म्यूजिक दिया था जिसमें इनका कंपोज किया गाना 'काशी हिले पटना हिले' काफी हिट साबित हुआ था। इसके बाद दोनों ने पहली बार बॉलीवुड फिल्म 'जीना सीख लिया' के लिए संगीत दिया लेकिन दोनों को सक्सेस मिली फिल्म 'आशिकी' में दिए संगीत के कारण जो कि बेहद हिट साबित हुई।

इसी फिल्म के बाद नदीम-श्रवण जोड़ी टी सीरीज के गुलशन कुमार की पसंदीदा जोड़ी बन गई और उन्होंने टी-सीरीज की कई फिल्मों में एक से बढ़कर एक संगीत दिया। दोनों प्यार से गुलशन को पापा कहकर बुलाते थे। लेकिन जिन गुलशन कुमार ने नदीम-श्रवण को बुलंदियों पर पहुंचाया था। उन्हीं की हत्या ने दोनों को बेहद मुश्किल में डाल दिया।

गुलशन कुमार के मर्डर में फंसे नदीम

12 अगस्त 1997 को मुंबई के साउथ अंधेरी इलाके में स्थित जीतेश्वर महादेव मंदिर के बाहर गोली मारकर गुलशन की हत्या कर दी गई थी। अबु सलेम ने सिंगर गुलशन कुमार से हर महीने 5 लाख रुपये देने के लिए कहा था। गुलशन कुमार ने मना करते हुए कहा था कि इतने रुपये देकर वो वैष्णो देवी में भंडारा कराएंगे। इस बात से नाराज सलेम ने शूटर राजा के जरिए गुलशन कुमार का दिन दहाड़े मर्डर करवा दिया था।

आरोप लगा कि इस हत्या की प्लानिंग में नदीम का हाथ है। इस केस में नाम सामने के बाद नदीम इंग्लैंड भाग गए। 2002 में एक भारतीय कोर्ट ने सबूत ना होने की वजह से उनके खिलाफ हत्या में शामिल होने के केस को रद्द कर दिया गया लेकिन उनकी गिरफ्तारी के वारंट को वापस नहीं लिया गया जिसके कारण नदीम आज भी परेशान हैं।

कुछ सालों पहले उन्होंने भारत सरकार से माफी की मांग की थी। उनका कहना था कि वह बेगुनाह हैं और वह नहीं चाहते कि उनके मां-बाप उन्हें निर्दोष देखे बिना ही मर जाएं। नदीम के इस केस में फंसने के बाद ही श्रवण से उनकी जोड़ी टूट गई और फिर 2005 में आई 'दोस्ती : फ्रेंड्स फॉरएवर' के बाद किसी फिल्म में साथ संगीत नहीं दिया।

इन फिल्मों में दिया था संगीत

दोनों ने 'आशिकी', 'साजन', 'दिल है कि मानता नहीं', 'दीवाना', 'सड़क', 'सैनिक', 'दिलवाले', 'राजा हिंदुस्तानी', 'फूल और कांटे' और 'परदेस', 'ये दिल आशिकाना', 'राज', 'कयामत', 'दिल है तुम्हारा', 'बेवफा' और 'बरसात','धड़कन' जैसी कई फिल्मों में संगीत देकर सफलता हासिल की थी।

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