एक्ट्रेस का संघर्ष:बेटी के जन्म के समय नीना गुप्ता के पास नहीं थे सर्जरी से डिलीवरी कराने के पैसे, 61 साल की एक्ट्रेस ने ऑटोबायोग्राफी में किया खुलासा

5 महीने पहले
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नीना गुप्ता अपनी शानदार अदाकारी के लिए जानी जाती हैं और आज वे लग्जरी लाइफ जी रही हैं। लेकिन एक वक्त था, जब डिलीवरी के लिए उनके पास सर्जरी कराने के पैसे नहीं थे। 61 साल की एक्ट्रेस ने इस बात का खुलासा अपनी ऑटोबायोग्राफी 'सच कहूं तो' में किया है। नीना की बेटी मसाबा ने सोशल मीडिया पर ऑटोबायोग्राफी के कुछ अंश शेयर किए हैं, जिनमे उनके जन्म के समय का यह इमोशनल किस्सा भी शामिल है।

नीना गुप्ता के खाते में सिर्फ 3 हजार रुपए थे
नीना ने किताब में लिखा है कि मसाबा के जन्म के समय वे सिर्फ नॉर्मल डिलीवरी का खर्च उठा सकती थीं। क्योंकि इसके लिए सिर्फ 2000 रुपए चाहिए थे, जो कि उनके बैंक खाते में थे। जबकि उस वक्त सी-सेक्शन सर्जरी का खर्च लगभग 10 हजार रुपए आता था। एक्ट्रेस के मुताबिक, डिलीवरी के कुछ दिन पहले ही 9000 रुपए का टैक्स रिम्बर्समेंट आया था। इससे उनके खाते में 12 हजार रुपए हो गए और उन्होंने सी-सेक्शन डिलीवरी कराई।

नीना ने बुक में लिखा है, "अच्छा हुआ कि पैसे आ गए। क्योंकि मेरे डॉक्टर ने मुझे बताया था कि मेरी सी-सेक्शन डिलीवरी ही करानी पड़ेगी। मेरे पिता, जो बेटी के जन्म के समय मदद के लिए साथ आए, गुस्से में थे। उनके मुताबिक, हमसे ज्यादा पैसे ऐंठने के लिए यह डॉक्टर्स की चाल थी।"

नीना और विवियन रिचर्ड की बेटी हैं मसाबा
मसाबा नीना गुप्ता और वेस्ट इंडीज के पूर्व क्रिकेटर विवियन रिचर्ड की बेटी हैं। 80 के दशक में दोनों रिलेशनशिप में रहे थे। हालांकि, उन्होंने शादी नहीं की थी। बावजूद इसके नीना ने मसाबा को जन्म देने और सिंगल पैरेंट बनकर उनकी परवरिश करने का फैसला लिया था। एक बातचीत में उन्होंने कहा था, "अगर मुझे अपनी गलती सुधारने का एक मौका मिलता तो मैं बगैर शादी के मां नहीं बनती। हर बच्चे को दोनों पैरेंट्स की जरूरत होती है। मैं मसाबा के प्रति ईमानदार थी। इस वजह से हमारे रिश्ते पर असर नहीं पड़ा। लेकिन मैं जानती हूं कि उसने काफी कुछ सहा है।"

नीना को उनके पिता का बराबर साथ मिला
करीब एक साल पहले 'इंडियन आइडल' में पहुंचीं नीना गुप्ता ने खुलासा किया था कि उनकी बेटी की परवरिश में उनके पिता का बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने इमोशनल होते हुए कहा था, "पापा मुझे मदद करने के लिए खासतौर पर मुंबई शिफ्ट हो गए थे। मैं बयां नहीं कर सकती कि उनकी कितनी शुक्रगुजार हूं। मेरी जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर में वे मेरी बैकबोन थे।"

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