खास बातचीत:पंकज त्रिपाठी बोले-'OMG-2' समेत छह फिल्में करनी हैं, अपने कमिटमेंट्स पूरा करके अब थोड़ा स्लोडाउन हो जाऊंगा

मुंबई8 महीने पहलेलेखक: उमेश कुमार उपाध्याय
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पंकज त्रिपाठी इन दिनों धर्मनगरी उज्जैन में फिल्म 'ओह माय गॉड-2' (OMG-2) की शूटिंग कर रहे हैं। इसके अलावा 'मिर्जापुर-3' से लेकर '83 दि फिल्म', 'बंटी और बबली', 'बच्चन पांडे' आदि छह प्रोजेक्ट्स हैं, जिसके कमिटमेंट्स उन्हें पूरे करने हैं। फिल्मों को लेकर वे एक बार अपनी गति को धीमा करना चाह रहे हैं। अब OMG-2 की शूटिंग से लेकर वेब सीरीज 'आश्रम-2' के सेट पर हुई आराजकता आदि के बारे में पंकज ने दैनिक भास्कर को बताया। पढ़िए बातचीत के प्रमुख अंश-

अमिताभ बच्चन से मुलाकात कैसी रही, कैमरे के पीछे की रोचक बातें क्या रहीं?
बहुत बढ़िया और शानदार मुलाकात रही। कैमरे के पीछे भी दो कलाकारों वाली मीटिंग थी। उन्होंने मेरे काम की प्रशंसा की, तब मैं अरे सर! अरे सर! कर रहा था। इतने बड़े कलाकार के सामने विनम्र होकर हाथ जोड़े खड़े थे, उन्हें सुन रहे थे और मुस्कुरा रहे थे। बाकी स्नेहपूर्ण मुलाकात रही। मेरे पिताजी अमिताभ बच्चन के बारे में पूछते रहते हैं। अब घर जाऊंगा, तब बाबूजी को बताऊंगा कि बच्चन साहब से मुलाकात हुई थी।

हाल ही में 'बंटी और बबली' का ट्रेलर लांच हुआ, इसमें आपकी तुलना अमिताभ बच्चन के साथ की जा रही है, जो पहले पार्ट में थे, क्या कहेंगे?
नहीं, मेरी तुलना उनसे नहीं हो सकती है। वे अद्भुत और सीनियर कलाकार हैं। उनकी अपनी एक कमाल की फिल्मोग्राफी है। उनका बहुत ही व्यापक व्यक्तित्व है। यह मरे लिए सौभाग्य की बात है कि उनकी फ्रेंचाइजी फिल्म 'बंटी और बबली' से जुड़ा हूं। बाकी फिल्म देखने के बाद बच्चन साहब के साथ एक छोटा-सा कनेक्शन देखने को मिलेगा।

इन दिनों OMG-2 की शूटिंग कर रहे हैं, कितने दिनों का शूटिंग शेड्यूल बाकी रह गया है? उज्जैन में शूटिंग कर रहे हैं, किस तरह से एक्सप्लोर करेंगे?
अभी 15 दिन और बचे हुए हैं। महाकाल की नगरी में शूटिंग चल रही है। इस वक्त उज्जैन (म.प्र.) में ही हूं। बहुत शानदार शहर है। घूम रहा हूं। शिप्रा नदी के इस पार से लेकर उस पास तक घूमने गया। बहुत अध्यात्मिक और सांस्कृतिक नगरी है। इन जगहों पर घूम रहा हूं और देख रहा हूं।

OMG-2 के बाद किस प्रोजेक्ट पर काम शुरू करेंगे?
श्रीजित मुखर्जी की एक फिल्म है। उसकी शूटिंग के लिए बंगाल के जंगलों में जाएंगे। उसके बाद 'क्रिमनल जस्टिस' का शूट शुरू हो जाएगा।

सालाना आपके औसतन 6-7 प्रोजेक्ट आते हैं, क्या कभी इनकी शूटिंग की कंटिन्यूटी को लेकर कोई चुनौती-भरा वक्त रहा?
हां, ऐसा बहुत होता है। यही कारण है कि मैं बहुत सारा लुक चेंज नहीं कर पाता हूं। आप मुझे पिछली फिल्मों में देखेंगे, तब ऑलमोस्ट सभी फिल्मों में एक ही लुक है, क्योंकि एक सप्ताह बाद दूसरे सेट पर चला जाता हूं। इंटर्म्स ऑफ लुक्स में परेशानी होती है। मैं बहुत तेजी से काम कर रहा था। अब भी जो काम कर रहा हूं, वह पिछले साल कोविड के टाइम के कमिटमेंट हैं। अभी कोई नया प्रोजेक्ट नहीं लिया है। नया प्रोजेक्ट नहीं ले रहा हूं, जब तक पिछला बैकलॉक निकल न जाए या फिर आधी जर्नी तक न पहुंच जाए। अभी मुझे छह फिल्में करनी है। इन्हें पूरा करने के बाद अपनी गति को धीमा करूंगा। सिर्फ लुक के लिए नहीं, बल्कि क्रिएटिव प्रीपेशन के लिए भी वक्त मिले। बतौर अभिनेता आप तीसों दिन अभिनय नहीं कर सकते। मेरे लिए तो थोड़ा मुश्किल है। इसलिए अपने कमिटमेंट पूरा करके थोड़ा स्लोडाउन होऊंगा।

हर मकाम एक संघर्ष-भरा होता है, जिस मुकाम पर हैं, उसका संघर्ष किस तरह से देखते हैं?
इसका संघर्ष भी अलग और चुनौतीपूर्ण है। सही समय पर जितनी कमिटमेंट हैं, उसे डिलीवर कर दें। दूसरी जो कहानियां आती हैं, उन सबको पढ़ना और देखना रहता है। इन दिनों मैं कोई नया काम इसीलिए नहीं ले रहा हूं, क्योंकि ऑलरेडी एक साल के लिए इंगेज हूं। इस मुकाम की अपनी एक लड़ाई है। एक अलग संघर्ष है कि सब कुछ मैनेज हो जाए और कोई नाराज भी न हो। मुझे नए फिल्मेकर फोन करते हैं, पर मना करना पड़ता है। अभी कल की ही बात है। एक महिला थीं, जिन्होंने मैसेज किया था। लेकिन सबको विनम्रतापूर्वक रिप्लाई देता हूं कि एक साल बाद आप मैसेज करें, क्योंकि एक साल समय नहीं है। मैं चाहता हूं कि कोई नया से नया फिल्मेकर भी अप्रोच करे, तब उस तक मेरा रिप्लाई पहुंचे कि अति व्यस्त हूं। अभी नहीं, छह-आठ महीने बाद संपर्क करें या फिर सिनोप्सिस भेज दें। मुझे अच्छा लगेगा, तब कहूंगा कि छह महीने कहानी सुनने बैठेंगे। ऐसा मैं प्रयास करता हूं। लेकिन अभी की चुनौती है कि आदमी एक है और काम दुनियाभर के हैं।

आप थिएटर के एक्टर कैरेक्टर को दिल से अपनाकर निभाते हैं, ऐसे करैक्टर से निकलने का प्रोसेस क्या होता है?
नहीं, ऐसा कुछ नहीं होता है। अति व्यस्त हैं, तब एक की शूटिंग खत्म होने वाली होती है, तब उसके तीन दिन पहले ही दूसरे कैरेक्टर के बारे में दिमाग में बात चलने लगती हैं। इस सेट से उस सेट पर जाऊंगा, तब कैसे करेंगे, क्या करेंगे। रनिंग फिल्म का आखिरी दिन उस कैरेक्टर पर नहीं, अपकमिंग कैरेक्टर पर मेहनत शुरू हो जाती है। उसमें क्या करेंगे, कैसे करेंगे। अब ऐसे काम करने की आदत-सी हो गई है। इसलिए किसी किरदार से निकलना मुश्किल नहीं होता है। हां, सेम टाइम रहता है कि पिछले किरदार की कोई प्रीपेशन या फिर बॉडी लैंग्वेज वगैरह रही हो, उसे निकालने और भूलने के लिए दो-तीन दिन लगते हैं, पर थिएटर की ट्रेनिंग की है, थोड़ा अवेयर रहते हैं, सो कर लेते हैं।

'मिर्जापुर-3' सहित आगामी प्रोजेक्ट और उनमें अपने किरदार, जॉनर आदि के बारे में जितना हो सके बताइए? किसी करैक्टर के लिए कुछ खास तैयारी कर रहे हैं?
OMG के लिए खास तैयारी हुई है और उसकी शूटिंग चल रही है। यह तैयारी कैसे हुई है, यह तो फिल्म आने पर दिखाई देगी। 'मिर्जापुर-3' भी अगले साल शूट होना है। इसके अलावा अपकमिंग फिल्मों में '83 दि फिल्म', 'बंटी और बबली', 'बच्चन पांडे' और एक नई सीरीज की शूटिंग करूंगा। बस, यही सब आने वाले प्रोजेक्ट्स हैं।

भारतीय सिनेमा के ग्रोथ पर क्या कहना चाहेंगे?
अच्छा है, बहुत अच्छा है। स्टोरी लाइन थोड़ी बदली है और फिल्मेकर्स नए आए हैं। नई कहानियां कही जा रही हैं। अभी मौलिकता की तरफ ज्यादा ध्यान है। मौलिक हो और एंटरटेनमेंट सेक्शन की कुछ बात हो। पिछले कुछ सालों से राइटिंग को लेकर बदलाव तो हुए ही हैं। लेखकों को क्रेडिट मिल रहा है और अच्छी कहानियां आ रही हैं। हम लोग हिंदुस्तान के छोटे-छोटे शहर और गांव की कहानियां एक्सप्लोर कर रहे हैं। शायद इसकी वजह यह है कि हमारी ऑडियंस ग्रो हुई है। डिजिटल आने से उनके पास दुनिया भर की फिल्में हैं। चीजें जिस तेज गति से बढ़ रही हैं, वह 20 साल पहले यह संभव नहीं था। आज ऑडियंस दुनियाभर का सिनेमा देख रहा है। इसमें ऑडियंस इन्वॉल्व होने से लेकर हमारे फिल्मेकर और स्टोरी लेखक इन्वॉल्व हुए। यही वजह है कि हमारे जैसे अभिनेता के पास इतना काम है। आज से 10-12 साल पहले महीने में सिर्फ दो दिन शूटिंग करता था और 28 दिन इंतजार करता था।

'आश्रम-2' के सेट पर अराजकता हुई है, उसके बारे में क्या कहेंगे?
देखिए, लोकतंत्र में असहमति का भी स्पेस होता है। कोई भी किसी से असहमत हो सकता है। आप विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं, पर वह मर्यादित तरीके से होना चाहिए कि आप बैठकर अपनी बात कर सकते हैं। उसके लिए हंगामा बरपाने की जरूरत नहीं है। विरोध भी हो तो सम्मान पूर्वक और एक मर्यादित तरीके से हो।

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