भास्कर इंटरव्यू:अगर लड़का करे तो राम लीला और वही लड़की करे तो रास लीला- पूजा चोपड़ा

2 महीने पहलेलेखक: ज्योति शर्मा

एक्ट्रेस पूजा चोपड़ा की फ़िल्म 'बबलू बैचलर' एक गांव की कहानी है। जिसमें एक लड़के के परिवार वाले उसकी शादी करवाने लिए परेशान है। इस फिल्म में पूजा ने जो किरदार निभाया है वह आज की लड़की की सोच को दर्शाता है। पूजा की सोच अपने निभाए गए किरदार से काफी मिलती-जुलती है। इस फ़िल्म के बारे में एक्ट्रेस पूजा ने दैनिक भास्कर के साथ खास बातचीत की। साथ ही उन्होंने अपने करियर के स्ट्रगल उतार चढ़ाव और अपनी आने वाली फिल्म के बारे में भी बात की...।

सवाल- फिल्म बबलू बैचलर में अवंतिका का किरदार और असल जिंदगी में पूजा कितनी मिलती जुलती हैं?
पूजा-
अवंतिका का जो मैंने किरदार निभाया है। उसमें और मुझमें यह सिमिलैरिटी है कि हम दोनों ही इंडिपेंडेंट और एम्बिशियस हैं। जब अवंतिका पहली बार बबलू से मिलती है। तो वो उसे बहुत पसंद आता है। लेकिन जब वो कहता है की मेरा कोई एम्बिशन नहीं है। पापा के पास बहुत पैसे हैं, तो ये बात अवंतिका को खटकती है। इस वजह से वो बबलू को मना कर देती है। जब कोई भी लड़का, लड़की से कहता है की देख लेंगे। आगे क्या होना है। हमारे घर में पैसों की कमी नहीं है। जो ऐसे लोग होते हैं जिनका कोई एम्बिशन नहीं होता है। ऐसे लोग रियल लाइफ में मुझे बिल्कुल पसंद नहीं आते। हमारी सोच ही नहीं मिल पाती। इस सोच के कारण से अवंतिका और पूजा एक दूसरे से मिलती जुलती है।

सवाल- आज भी लड़कियों के लड़कों से रिश्ते को लेकर सवाल उठाया जाता है लेकिन लड़कों पर कोई उंगली नहीं उठाता इस बारे में क्या सोचती हैं ?
पूजा-
ये हम सभी जानते है, कि हम पैट्रियार्कल सोसाइटी में रहते हैं। अगर लड़का करे तो रामलीला और लड़की करे तो रासलीला। ये सोच शहरों में थोड़ी बदली है। फिल्म मैं जब अवंतिका बबलू को बताती है। जिसके चार पांच बॉयफ्रेंड रहते हैं। जो बबलू एक्सेप्ट नहीं कर पाता है। इस सीन के पीछे अवंतिका का जो उद्देश्य होता है। वह यह होता है कि दोनों एक दसरे से कुछ भी छुपाए नहीं, और सच्चे रहें। जो बबलू को बाद में समझ में आता है। तो मुझे ऐसा लगता है कि अब समय आ गया है। जब लड़कों को समझना चाहिए कि अगर वह किसी लड़की के साथ रिश्ते में हैं, और वह गलत नहीं है। अगर कोई लड़की किसी लड़के के साथ रिश्ते में है, तो वह भी गलत नहीं है।

सवाल- मिस इंडिया के बाद फिल्में कर रही हैं लेकिन कितना और किस तरह का स्ट्रगल करना पड़ रहा है?
पूजा-
स्ट्रगल तो हर कोई कर रहा है। हमें लगता है जो एक्टर-डायरेक्टर टॉप पर हैं उन्हें कोई स्ट्रगल नहीं है। तो ऐसा नहीं है। उनके भी स्ट्रगल है, लेकिन वो अलग है। अपनी बात करूं तो मिस इंडिया जीतने के बाद एक प्लेटफॉर्म मिला, और जब मैंने कमांडो फिल्म की उसके बाद तो मुझे एक अलग ही पहचान मिल गई। हर कोई मुझे सिमरन सरबजीत के नाम से जानने लगा। मेरी पहली फ़िल्म ने ही इतना ज्यादा फेम दे दिया। जिसकी बाद मैं बहुत ही सोच समझ कर फिल्मों को चूज करती हूं। निजी लाइफ में भी मैं बहुत चूजी हूं। इसलिए मैं काम बहुत कम समय करती हूं। मग़र जिसकी स्क्रिप्ट मुझे पसंद आती है, मैं सिर्फ वही फिल्में करती हूं।

स्ट्रगल है और हमेशा रहेगा। अगर जिंदगी में स्ट्रगल नहीं रहेगा तो लाइफ में मजा भी नहीं आएगा। अगर दूसरों की नजरों से देखो तो मेरी जिंदगी है। मैं बचपन से ही तकलीफों से भरा रहा है। मुझे मेरी मां ने अकेले पाल पोस कर बड़ा किया है। जिसके कारण आज मैं स्ट्रांग हूं। मेरी खुद की सोच है। मैं स्ट्रांग हूं, चाहती हूं कि मुझे अच्छी फिल्में मिले। अच्छा काम करूं। जिस तरह की फिल्में या स्टोरीज मेरे पास आ रही हैं। वैसा काम मैं नहीं करना चाहती हूं। उनमें से कुछ अच्छी कहानियां भी आ रही हैं। उसी तरह की कहानियों पर काम करना चाहूंगी, और उम्मीद है कि आने वाले समय में अच्छी कहानियां, अच्छी फिल्में जरूर मिलेंगी।

सवाल-जब आप अपने स्ट्रगल के दौर में होते हैं लोग आपका साथ छोड़ देते हैं। लेकिन कामयाबी मिलते ही वे वापस आ जाते हैं। क्या आपके साथ भी ऐसा हुआ है?
पूजा-
जी हां, कहना नहीं चाहिए लेकिन कुछ ऐसे रिश्तेदार हैं। हमारे घर में किसी ने मिस इंडिया, मॉडलिंग, एक्टिंग, नहीं की है। जब मैं कॉलेज में थी, तब मैंने मॉडलिंग शुरू की थी। उस कॉम्पिटिशन में स्विम सूट सेरोंग के साथ पहनना होता था। वो फोटोज पेपर्स में आती थी। तो रिश्तेदार कहते थे की कैसी लड़की है! कपडे भी नहीं पहने हैं! जिस पर मेरी मम्मी का एक ही जवाब होता था कि मुझे पता है की मेरी बेटी क्या कर रही है? अगर इस बात से आपको तकलीफ है और आप रिश्ता नहीं रखना चाहते है तो कोई बात नहीं। लेकिन मुझे मेरी बेटी पर पूरा भरोसा है। जैसे ही मैं मिस इंडिया बनी, सब कुछ बदल गया। लेकिन ठीक है लाइफ है बातें होते रहती हैं।

सवाल-अपकमिंग प्रोजेक्ट्स के बारे में बताएं
पूजा-
मैं बहुत ही ज्यादा एक्साइटेड हूं। मेरी आने वाली फिल्म जिसका नाम है- जहां चार यार। फिल्म का हीरो स्क्रिप्ट है। फिल्म की स्क्रिप्ट बहुत तगड़ी है। जब मैंने स्क्रिप्ट सुनी तो इस फिल्म को जल्द से जल्द शूट करना चाह रही थी। जो कास्ट है, उसमें स्वरा भास्कर, शिखा तलसानिया, मेहर विज और मैं हूं। इस फिल्म में लखनऊ की मुस्लिम लड़की का किरदार निभा रही हूं, जो ठेठ गांव की है। इस किरदार के लिए मैंने मेरे बिल्डिंग के सिक्योरिटी गार्ड के परिवार की मदद ली। जब भी मैं उनसे बातें किया करती थी, एक डायरी में उनके बोले हुए शब्दों को नोट डाउन करती थी। जिसके बाद मैंने डायरेक्टर से मीटिंग की और उन्हें यह सारी चीजें बताईं। उन्होंने कहा कि जो लहजा है, वह हम थोड़ा बहुत लेंगे। इसके अलावा जो शब्द हैं, उन सभी शब्दों को हम नहीं ले सकते। क्योंकि जो शब्द हमें नहीं समझ आ रहे हैं वो फिल्म देखने वाले को कैसे समझायेंगे। जिसके बाद उन्होंने मेरे लिए एक ट्यूटर रख दिया और जितनी जरूरत थी उतनी ट्रेनिंग ली।

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