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प्रतीक के दिल पर मां का नाम:प्रतीक बब्बर ने गुदवाया मां के नाम का टैटू, 31 साल की उम्र में उन्हें जन्म देने के कुछ दिनों बाद ही हो गया था स्मिता पाटिल का निधन

2 महीने पहले
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बॉलीवुड एक्टर प्रतीक बब्बर अपने नए टैटू की वजह से चर्चा में हैं। उन्होंने अपने दिल के पास मां स्मिता पाटिल का नाम गुदवाया है। प्रतीक ने इस टैटू की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की है। गौरतलब है कि प्रतीक को जन्म देने के कुछ दिनों बाद ही स्मिता का देहांत हो गया था। तब वह केवल 31 साल की थीं।

एक इंटरव्यू में प्रतीक ने अपनी मां के बारे में कई सारी बातें शेयर की थीं। उन्होंने कहा था, 'मेरी मां एक गिफ्टेड महिला थीं। मिसाल के तौर पर कहा जाता है कि सचिन तेंदुलकर का जन्म क्रिकेट का भगवान बनने के लिए हुआ था। ठीक वैसे ही मेरी मां का जन्म ही अभिनेत्री बनने के लिए हुआ था। उनका इतनी जल्दी चले जाना इंडियन सिनेमा के लिए बहुत बड़ा लॉस रहा।'

घूमने के लिए चुराई थी नाना की जीप

प्रतीक ने कहा था-"मां के बारे में तो किस्से कहानियां ही सुनी हैं। फिल्में और उनके इंटरव्यूज की क्लिपिंग देखकर उनके बारे में एक इमेज बना पाया हूं। उनकी हर चीज सीखने लायक है। उनकी हर बात इमोशनल थी। मैं शायद जाहिर न कर पाऊं। ऐसा नहीं है कि सारी चीजें दु:खी करती हैं। उनके बारे में ढेर सारे ऐसे पहलू हैं, जो काफी खुशी देते हैं। दिल और चेहरे में मुस्कुराहट लाते हैं। उनके क्लोज और चाहने वालों से सुना है कि मां बड़ी मस्तीखोर, जिंदादिल और आजाद ख्यालों वाली थीं। एक बार तो नाना के घर से जीप चुराकर घूमने चली गईं थीं।"

'लड़की होता तो उनकी फिल्म करता'

बकौल प्रतीक- वे बड़ी एडवेंचेरस भी थीं। वह सब सुन बड़ा अच्छा महसूस होता रहा है। उनके बारे में हर लफ्ज मेरे लिए बड़ा कीमती है। वैसे तो मुझे उनकी सारी फिल्में पसंद हैं, पर \'शक्ति\', 'नमक हलाल' मुझे खासी पसंद हैं। मैं उन्हें परफॉर्मर की तरह जज नहीं कर सकता। मेरा पूरा वजूद तो उन्हीं की देन है। अब उनसे मेरी आंखें मिलती हैं या शक्ल का कौन सा हिस्सा मिलता है, वह तो सामने वाले ही बता सकते हैं। उनका बेटा हूं तो मैं जरा सिमिलर तो लगूंगा ही।

काश यह हो पाता कि मैं लड़की बनकर पैदा होता तो मां की किसी फिल्म के रीमेक में उनका किरदार प्ले करता। बहुत बार लगता है कि काश मां की गोद में सिर रख अपने जज्बात शेयर कर पाता। जब नाना-नानी गुजरे थे तब काफी अकेलापन महसूस हुआ था। उनकी मास्टरपीस 'अर्थ' की रीमेक की बात मैंने सुनी थी। मुझे वह ऑफर भी हुई थी।

'जरूरी नहीं उनके जाने का गम ही करें'

हर साल 17 अक्टूबर को स्मिता पाटिल का जन्मदिन कैसे मनता है। इस बारे में प्रतीक ने कहा था- मां के बर्थडे वाले दिन ऐसा नहीं है कि हम सब गमजदा ही हों। ओवरऑल बड़ा ही पॉजिटिव और स्पेशल दिन होता है यह। हम सब परिवार के लोग इकट्ठा होते हैं। सेलिब्रेशन तो नहीं करते, बस डिनर कर लेते हैं।

17 अक्टूबर 1955 को पुणे में जन्मी स्मिता 13 दिसंबर 1986 को महज 31 साल की उम्र में चाइल्डबर्थ कॉम्प्लिकेशंस के चलते दुनिया छोड़ गई थीं। उनका निधन मुंबई में हुआ था। वह राज बब्बर की दूसरी पत्नी थीं। उनकी मौत के बाद राज बब्बर अपनी पहली पत्नी नादिरा के पास वापस लौट गए थे और प्रतीक की परवरिश उनके नाना-नानी यानी स्मिता के माता-पिता ने की थी।

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