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भूषण कुमार से खास बातचीत:'तान्हाजी' समेत तीन फिल्मों को नेशनल अवॉर्ड मिलने से प्रोड्यूसर खुश, बोले- मेरी पूरी टीम को बधाई

मुंबई2 महीने पहलेलेखक: उमेश कुमार उपाध्याय
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पहली बार प्रोड्यूसर भूषण कुमार की एक-दो नहीं, बल्कि तीन फिल्मों 'तुलसीदास जूनियर', 'तान्हाजी: द अनसंग वॉरियर' और 'साइना' को नेशनल अवॉर्ड मिला है। दो को बेस्ट फिल्म का और एक को बेस्ट म्यूजिक के लिए नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया है। इससे भूषण कुमार बड़े उत्साहित हैं। उन्होंने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अपनी खुशी जाहिर की है।

आपकी तीन फिल्मों को नेशनल अवॉर्ड मिला, इस खुशी को किन शब्दों में बयां करेंगे?
बहुत खुशी है, क्योंकि पहली बार नेशनल अवॉर्ड मिल रहा है। हमें बाकी अवॉर्ड तो मिल जाते हैं, पर नेशनल अवॉर्ड मिले, यह प्रोड्यूसर की चाहत होती है। दो फिल्मों को बेस्ट फिल्म अवॉर्ड और एक फिल्म को बेस्ट म्यूजिक का अवॉर्ड मिला है। पहली बार और एक साथ तीन फिल्मों को अवॉर्ड मिलना बड़ी बात है। ढेर सारी खुशी है।

मेरे फिल्म के डायरेक्टर, मेरे ज्वाइंट प्रोड्यूसर और एक्टर अजय देवगन को फोन पर मुबारकवाद दे दी है। अब प्रतिष्ठित अखबार दैनिक भास्कर के जरिए मुबारकबाद देना चाहूंगा। उन्हें 'तान्हाजी' के लिए बेस्ट एक्टर का भी अवॉर्ड मिला है। फिल्म का अवॉर्ड भी हम दोनों को साथ में मिला है। उन्होंने फिल्म में अपने साथ मुझे प्रोड्यूसर लिया, बहुत खुशी है। यही खुशी मेरी पूरी टीम को है, जो दिन-रात मेहनत करते हैं। फिल्म सिर्फ प्रोड्यूसर के पैसा, समय लगाने से नहीं बनती, फिल्म तो सबके साथ और सहयोग से बनती है।

खुद कितना क्रेडिट लेंगे और फिल्म से जुड़े लोगों को कितना क्रेडिट देंगे?
मेन क्रेडिट तो पूरी टीम को दूंगा। जैसा बताया कि प्रोड्यूसर, कास्ट एंड क्रू, स्पॉटबॉय आदि सबका योगदान होता है। हमारी फिल्म 'तान्हाजी: द अनसंग वॉरियर' थी। यह रियल कहानी और किरदार के ऊपर बहुत ट्रू बनाई गई थी। उसमें कुछ फिक्शन नहीं किया गया था। जहां तक 'तुलसीदास जूनियर' की बात है, वह एक दिल वाली फिल्म थी। वह भी अच्छी कहानी थी। इसमें डायरेक्टर, संजय दत्त और छोटे बच्चे ने जो काम किया, वह बहुत काबिल-ए-तारीफ है। प्रोड्यूसर सिर्फ क्रिएटिवली, मार्केटिंग में इन्वॉल्व होता है, पैसे लगाता है। डायरेक्टर और प्रोड्यूसर पूरी टीम के बिना नहीं बना सकता, इसलिए श्रेय सबको जाता है।

पहली बार अवॉर्ड मिल रहा है, लेकिन उम्मीदें तो पहले भी रही होंगी?
मेरी सोच थोड़ा अलग रहती है। मेरे पापा ने सिखाया है कि काम करते रहो, फल की चिंता मत करो। अगर अच्छा काम करोगे, तब फल अपने आप मिलेगा। मैं वही चीज सोचता हूं। कल इसकी घोषणा होने वाली थी, लोग आस लगाकर बैठे रहे होंगे। लेकिन मुझे तो पता ही नहीं था। मुझे तो न्यूज वालों से पता चला, जब उनका फोन आया कि मुबारक हो, आपकी फिल्म को नेशनल अवॉर्ड मिला है।

डायरेक्टर ओम राऊत मेरे साथ बैठे थे, सो उनको भी उसी टाइम न्यूज मिली। लिटरली ऐसी कोई उम्मीद लगाकर बैठता नहीं हूं। उसमें ज्यादा खुशी होती है, जब कोई उम्मीद न लगाई हो और आपको मिल जाए। आई थिंक उसकी खुशी डबल होती है।

अजय देवगन को जब फोन करके बधाई दी, तब उनका क्या रिएक्शन था?
वे बहुत खुश थे। मैंने अजय देवगन प्रोड्यूसर और एक्टर की बधाई दी, तब उन्होंने वापस मुझे भी बधाई दी, क्योंकि हम दोनों प्रोड्यूसर हैं। हम साथ में आगे भी तीन-चार फिल्में साथ में कर रहे हैं। वे उसी की शूटिंग हैदराबाद में कर रहे हैं, जो हमारी फिल्म साथ में है। वे भी बड़े खुश थे।

वे कौन-सी तीन-चार फिल्में हैं, जो अजय देवगन के साथ कर रहे हैं?
एक फिल्म 'दृश्यम' है। इसकी शूटिंग हो गई है। 'थैंक गॉड' भी कंप्लीट हो गई है। इसे दीपावली पर रिलीज कर रहे हैं। एक साउथ की 'कैथी' फिल्म का रीमेक 'भोला' है। यह एक्शन फिल्म है। फिल्म में बड़े पैमाने पर एक्शन है। इस तरह और की भी प्लानिंग चल रही है।

लोगों को 'तुलसीदास जूनियर' को नेशनल अवॉर्ड मिलना सरप्राइजिंग लगा, आपको क्या लगता है?
देखिए, मुझे एकदम सरप्राइजिंग नहीं लगा, क्योंकि इस पिक्चर को स्पेशल फिल्म समझकर किया था। यह बहुत स्पेशल फिल्म है। फिल्म में एक बच्चे को लेकर बड़े एक्टर के साथ बनाना था। फिल्म में संजू (संजय दत्त) सर का भी बहुत लिमिटेड था। उसके बावजूद फिल्म को बहुत प्यार मिला। उसने बॉक्स ऑफिस और कहीं कमाई वैसी नहीं की, लेकिन पिक्चर की तारीफ बहुत ज्यादा हुई। आई थिंक, बच्चे ने इतना अच्छा काम किया है, जिसे नेशनल अवॉर्ड की ज्यूरी ने बहुत सराहा।

इस तरह की फिल्म को अवॉर्ड मिलना कोई चौंकाने वाली बात नहीं है। देखिए, नेशनल अवॉर्ड यह देखकर नहीं देते हैं कि पिक्चर ने बिजनेस कितना किया है। वे पिक्चर का दिल देखते हैं और 'तुलसीदास जूनियर' का दिल बहुत बड़ा था, इसलिए उसे अवॉर्ड दिया गया। इस तरह 'तान्हाजी' डिजबिंग फिल्म है। उसका बहुत बड़ा कांसेप्ट है। इसमें अजय देवगन हों या सैफ अली खान, सबने बहुत बढ़िया एक्टिंग की है। शायद यही चीज देखकर उन्होंने निर्णय लिया होगा।

'तुलसीदास जूनियर' में राजीव कपूर भी हैं, आज वे इस खुशी के मौके पर हमारे बीच नहीं हैं, उन्हें कितना मिस कर रहे हैं?
बेशक, बहुत मिस कर रहे हैं। काफी समय बाद उनकी यह कमबैक फिल्म थी। अनफॉर्च्युनिटली, वे फिजिकली हमारे साथ नहीं हैं। अब अवॉर्ड मिल रहा है, तब उनकी बहुत याद आई। वे होते, तब देखकर बहुत खुश होते कि उनकी कमबैक फिल्म के लिए नेशनल अवॉर्ड मिल रहा है। आई थिंक, जहां होंगे, यह देखकर खुश हो रहे होंगे। उनकी पूरी फैमिली इस चीज को बहुत एंज्वाय कर रही होगी।

राजीव कपूर के साथ का कोई रोचक बात बताएंगे?
उनसे एक-दो शूटिंग के दौरान ही मिला था। उनके साथ मेरा ज्यादा संपर्क नहीं था। लेकिन वे बहुत कमाल के एक्टर थे। अपनी कमबैक फिल्म में उन्होंने दिल से एक्टिंग की थी, जिसकी तारीफ सब लोगों ने की थी। उनके साथ बहुत अच्छी मेमोरीज हैं। जब उनसे मिला था, तब कमबैक को लेकर बड़े खुश थे। ज्वाइंट प्रोड्यूसर आशुतोष गोवारिकर से मेरी बात होती रहती थी, तब वे बताते थे कि राजीव जी, जब शूटिंग पर आते थे, तब बहुत खुश हो उठते थे।

रास्ते में ही कइयों को फोन करके राजीव जी बताते थे कि आज शूटिंग पर जा रहा हूं, मुझे डिस्टर्ब मत करना। मुझे पता चला कि फिल्म बनकर तैयार हो गई थी। उसके बाद भी उन्होंने एक सीन के लिए दोबारा डबिंग करके उसे वापस रखवाया। इस तरह फिल्म को उन्होंने अपना काफी इनपुट दिया था। बेस्ट फिल्म को अवॉर्ड मिलना, मतलब सारे लोगों को अवॉर्ड मिलना होता है। आज वे होते, तब अलग ही खुशी की बात होती।

इस समय जिस तरह से हिंदी सिनेमा का दौर चल रहा है, बॉक्स ऑफिस पर अच्छा रिजल्ट नहीं मिल रहा है, इस पर क्या कहेंगे?
अभी हमारी फिल्म 'भूल भुलैया-2' आई, उसने अच्छा बिजनेस किया। उसके बाद फिल्मों की काफी चीजें ऊपर-नीचे चल रही हैं। अब धीरे-धीरे वही फीगर आउट होगा कि किस तरह का सिनेमा लोग देखना चाहते हैं। पहले एवरेज सिनेमा होता था, तब भी चल जाता था। अब लोगों को जो देखना है, हम सब प्रोड्यूसर को वही फीगर आउट करना पड़ेगा। वही बनाना पड़ेगा और लिमिटेड बनाना पड़ेगा।

लोगों को कुछ चीजें ओटीटी पर देखनी है, उसे ओटीटी पर ही देखेंगे। वे लोग थिएटर में जाकर पैसा खर्चा नहीं करेंगे। यह एक सोच है, जो हमारे दिमाग में आ रही है और अब पूरी इंडस्ट्री को इस चीज पर सोच लगानी पड़ेगी। जितने फिल्में लोग रिलीज करके देखेंगे, उनको धीरे-धीरे मालूम चलेगा कि कौन-सी फिल्म किस जगह के लिए बनानी चाहिए। इसमें थोड़ा वक्त लगेगा। अभी फीगर आउट कर रहे हैं कि कौन-सी फिल्म बड़े पर्दे और कौन-सी छोटे पर्दे के लिए बनाई जाए। इन्हीं चीजों कश्मकश चल रही है। लेकिन अभी 'आदिपुरुष' जैसी जो फिल्में बनी हैं, वे तो आएंगी।

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