प्रधान जी का बर्थडे:रघुबीर यादव बोले-फेल हुआ तो शर्म के मारे घर से भाग गया, कभी ढाई रुपए में नाटक कंपनी में काम करता था

4 महीने पहलेलेखक: अंशिका शुक्ला

एक्टर रघुबीर यादव आज अपना 72वां बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे हैं। इस खास मौके पर रघुबीर ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की और कई मजेदार किस्से सुनाए। रघुबीर बॉलीवुड में अपने देसी किरदारों के लिए जाने जाते हैं। उन्हें बचपन से ही गाने का शौक था और वो बॉलीवुड में सिंगर बनना चाहते थे। मां-बाप की सहमति न मिलने पर वो 15 साल की उम्र में घर से भाग गए थे।

सवालः 72 बसंत के बाद अब जिंदगी को कैसे देखते हैं?

जवाबः मुझे ऐसा लगता है कि अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है। लगता है कि जिंदगी सीखने के लिए बहुत छोटी है। मैं थोड़ी और लंबी जिंदगी जीना चाहता हूं ताकि थोड़ा और सीख लूं। थिएटर के जमाने से मैंने कभी भी वक्त को ऐसे नहीं लिया है कि बर्बाद किया जाए। 72 तो सिर्फ नंबर है, मेरा बस एक ऐम है सीखना और यह हमेशा बरकरार रहेगा। गूगल पर लिखा है कि यह मेरा 65वां बर्थडे है, लेकिन असल में मैं आज 72 साल का हो गया हूं।

सवालः जबलपुर से मुंबई तक के सफर के यादगार लम्हे कौन से हैं?

जवाबः मैंने तो कभी सोचा ही नहीं था कि मैं कभी मुंबई पहुंच पाऊंगा। मुझे हमेशा से म्यूजिक बहुत पसंद था। मैं अक्सर गांव में फोक म्यूजिक ही सुनता था और उसी में डूबा रहता था। रात में जगह-जगह कव्वालियां होती थीं और मैं चुपके से उसे सुनने के लिए घर से भाग जाता था। ऐसे में मुझे घर पर मार भी पड़ती थी, लेकिन मार से ज्यादा मजा मुझे कव्वाली सुनने में आता था। फिर मुझे साइंस दिलवा दी गई, लेकिन मैं उसमें फेल हो गया और उसी शर्म के मारे मैं घर से भाग गया और मैंने थिएटर ज्वाइन कर लिया। फिर मैं 6 साल तक वहीं रहा।

सवालः आपका एक दोस्त था जिसे आप प्रोफेशनल भगोड़ा कहते थे?

जवाबः उसे प्रोफेशनल भगोड़ा मैं इसलिए कहता हूं क्योंकि वो अपने घर से महीने में 2 से 3 बार भागता था। फिर जब पैसे खत्म हो जाते थे तब फिर घर वापस आ जाता था। उस समय मैं परेशान था क्योंकि मैं फेल हो गया था। उस दिन मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं? तब तक भगोड़ा आ गया और उसने मुझसे कहा कि भागोगे, तो मैंने कहा कि हां भाग लेंगे। उसने कहा कि चलो मैं भाग रहा हूं आज। फिर हम ललितपुर पहुंचे और वो मुझे वहां से भी छोड़ कर भाग गया, क्योंकि उसकी भागने की आदत थी। उसके बाद मैंने वहीं ढाई रुपए में नाटक कंपनी में काम करना शुरू कर दिया।

सवालः सुना था कि जब आप पहली बार दिल्ली गए थे..तब आप वहां जा कर डर गए थे? ऐसा क्यों?

जवाबः मैं वहां जा कर घबरा इसलिए गया था क्योंकि मैं दिल्ली पहली बार गया था। उस समय मुझे इंग्लिश भी नहीं आती थी। डर इस चीज से भी लगा क्योंकि NSD में 150 में से 20 या 25 बच्चों का सिलेक्शन होना था। किसी ने थिएटर में पीएचडी किया था तो किसी के पास बड़ी-बड़ी किताबें थीं पर मेरे पास ऐसा कुछ भी नहीं था। उस समय मुझे लग रहा था कि इसमें मुझे कैसे एडमिशन मिलेगा। यहां तो सब पढ़े-लिखे लोग हैं। इस वजह से भी मैं वहां डर गया था।

सवालः पंचायत का पूरा एक्सपीरियंस कैसा रहा?

जवाबः पंचायत की शूटिंग के समय का एक्सपीरियंस तो बहुत अच्छा था। सभी लोग लग के एक साथ काम कर रहे थे। मुझे लगता है कि असली हिंदुस्तान गांव में ही बसता है और जब मुझे इसमें काम करने का मौका मिला तो मैंने इसमें खूब मजे लिए..हर पल वहां मजेदार ही था।

सवालः पंचायत के प्रधान जी के बाद अब रघुबीर जी कौन से नए अवतार में दिखेंगे? अगले प्रोजेक्ट्स कौन से हैं?

जवाबः हाल ही में मैंने कौशिक गांगुली, जो कोलकाता के डायरेक्टर हैं, उनके साथ एक फिल्म की है 'मनोहर पांडे'। एक फिल्म और है जो जल्द रिलीज होने वाली है 'टीटू अंबानी'। तो बस यही है..ज्यादा काम मैं नहीं करता हूं क्योंकि थोड़ा-थोड़ा काम करने में ही मजा आता है।

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