मूवी रिव्यू:एक्शन और मनोरंजन से भरपूर है अक्षय कुमार-कटरीना की सूर्यवंशी, अजय-रणवीर के कैमियो ने भी लगाए चार चांद

मुंबई3 महीने पहलेलेखक: अमित कर्ण
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  • अवधि- 145 मिनट
  • स्टार- चार स्टार

बतौर डायरेक्टर रोहित शेट्टी की पहली फिल्म ‘जमीन’ थी। वह प्लेन हाईजैक करने वाले पाक आतंकियों के नापाक मंसूबों को नाकाम करने वाली कहानी थी। ये साल 2003 में आई थी। उसके बाद से रोहित शेट्टी ने कॉमेडी फिल्मों को अलग जगह, जमीन और रुतबा मुहैया कराया। अब जमीन के 18 साल बाद वो ‘सूर्यवंशी’ लेकर आए हैं। इसने एक बार फिर उनकी वापसी उसी जोन में की है, जिससे उन्होंने 18 साल पहले अपने डायरेक्शन का आगाज किया था। कहना गलत नहीं होगा कि उनके इस फिल्म के 'वंश’ के 'सूर्य’ ने उनका सितारा अस्त नहीं होने दिया है।

खिलाड़ी कुमार की एक्शन में वापसी

इस फिल्म ने अक्षय कुमार की भी वापसी बतौर एक्शन स्टार उस अक्षय कुमार की ओर किया है, जिनके फिल्मी सफर का आगाज स्टंट और एक्शन स्टार के तौर पर हुआ था। वो भी मगर हाल के बरसों में अपनी कॉमेडी से अपने चाहने वालों को एंटरटेन करते रहे हैं।

सह-कलाकारों का मिला भरपूर सहयोग

यहां कटरीना कैफ, गुलशन ग्रोवर, अभिमन्यु सिंह, निकेतन धीर, सिकंदर खेर, जैकी श्रॉफ, कुमुद मिश्रा, जावेद जाफरी, राजेंद्र गुप्ता, विवान भतेना और अन्य साथी कलाकारों ने अक्षय को भरपूर कॉम्प्लिमेंट किया है। रही सही कसर अजय देवगन और रणवीर सिंह ने अपने एक्सटेंडेड कैमियो से पूरी की है। रोहित शेट्टी ने स्टार पावर का बेहद सधा हुआ इस्तेमाल किया है। वो ऐसा इसलिए कर पाए हैं, क्योंकि उन्हें अपने राइटरों संचित बेंद्रे, विधि घोडगांवकर, युनूस सजावल का साथ मिला है।

कैसी है फिल्म की कहानी?

फिल्म में 1993 से आतंकी हमला झेल रहे मुंबई और मुंबईकरों की कहानी है। कश्मीर से आर्टिकल 370 हटने के बाद एक बार फिर शहर को दहलाने के खतरनाक इरादे लिए लश्कर के सरगना और उनके स्लिपर सेल फिर से एक्टिव होते हैं। उसके लिए वो 600 किलो आरडीएक्स फिर से इस्तेमाल में लाते हैं, जो वो 27 साल पहले यूज नहीं कर सके थे। यहां रोहित के राइटर आम इंसान से आतंकी बने बिलाल अहमद (कुमुद मिश्रा), उमर हाफिज (जैकी श्रॉफ), रियाज (अभिमन्यु सिंह), रजाक, मुख्तार (निकेतन धीर) और उनके साथियों के पक्ष को भी रखते हैं। वह रिपीटिटिव है। हालांकि उनके तर्कों का माकूल जवाब ढूंढ नहीं पाते।

बहरहाल, आतंकियों के अपने खतरनाक इरादों को अंजाम देने के लिए जो उनकी मॉडस ऑपरेंडी है, उसमें क्रिएटिव टीम अंदर तक जाती है। स्क्रीनप्ले को किरदारों के सफर केंद्रित रखा गया है। खुद एटीएस अफसर वीर सूर्यवंशी (अक्षय कुमार), उसकी पत्नी रिया (कटरीना कैफ), बेटे आर्यन के जरिए फर्ज और परिवार के बीच के सवाल को भी कुरेदने की कोशिश करती है। यह भी फिल्म को अलग सबप्लॉट देता है। यहां बतौर रिया, कटरीना स्क्रीन पर अपने स्टैंड पर फर्म नजर आती है। लश्कर जैसे आतंकी संगठन गोलियों के बजाय बॉम्बिंग के जरिए क्या असर पैदा करते हैं, वहां भी मेकर्स पहुंचे हैं। फंडिंग करने वाले कादर उस्मानी(गुलशन ग्रोवर) जैसे किरदार भी पेश किए गए हैं।

सारे किरदार लार्जर दैन लाइफ रहते हुए भी लाउड नहीं हुए हैं। मेन लीड किरदारों के एक्शन और ह्यूमर कंधे से कंधे मिलाकर चलते रहते हैं। इससे फिल्म मोनोटोनस नहीं होती। वीर सूयर्वंशी खतरनाक मिशन को अंजाम देता रहता है। साथ ही उसकी नाम भूलने की आदत है। वह नाम बिगाड़ बात करता रहता है। वह फिल्म में कॉमेडी जेनरेट करता रहता है। फिल्म में जावेद जाफरी भी अपने किरदार में रमे नजर आते हैं।

रणवीर-अजय के कैमियो से लगे चार चांद

इस फिल्म ने सिनेमाघरों में रिलीज के लिए 20 महीनों की बाट जोही है। वह इंतजार वर्थ साबित नजर आती है। ढेर सारे किरदारों से लैस इस फिल्म की एडीटिंग सधी हुई है। कहीं भी डल मोमेंट नहीं हैं। एक आउट एन आउट कमशिर्यल फिल्म में मेन लीड की एंट्री से लेकर उनकी हाजिरजवाबी और जरूरत पड़ने पर उनके प्रवचन का तालमेल सधा हुआ है। वह चाहे वीर सूयवंशी का बैंकॉक में जॉन को चॉपर से पकड़ना हो या क्लाइमैक्स में सिंबा और सिंघम की एंट्री। बतौर सिंबा रणवीर सिंह ने भी अपनी कॉमेडी से अक्षय कुमार को बराबर टक्कर दी है।

मुंबई के क्राउडेड मार्केट में गणपित की मूर्ति को बम धमाके से बचाने को मुस्लिमों का साथ आना भी फिल्म का हाईपॉइंट है। सारे सीन बिग स्क्रीन एक्सपीरिएंस वाले हैं। डीओपी जोमोन टी जॉन की सिनेमैटोग्राफी ने फिल्म को विजुअली ऊंचाइयां प्रदान की हैं। मेकर्स ने अपना काम किया है। अब जिम्मेदारी दर्शकों की है कि वो इसे सिनेमाघरों में कैसा रेस्पॉन्स देते हैं।

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