सरदार उधम सिंह की तैयारी:शूटिंग से पहले 3 महीने अमृतसर में रहे विक्‍की कौशल ताकि जलियांवाला बाग हत्‍याकांड का दर्द महसूस कर सकें

18 दिन पहले
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स्‍टारडम हासिल करने के बावजूद विक्‍की कौशल ने कैरेक्‍टर स्किन में जाने का तरीका नहीं बदला है। ‘मसान’, ‘रमन राघव 2.0’, ‘उरी’ फिल्‍मों की तैयारियों में शूट से पहले उन्‍होंने हफ्तों, महीनों दिए थे। सेम पैटर्न उन्‍होंने ‘सरदार उधम’ के लिए भी रखा। शूट से पहले वो मुंबई से अमृतसर चले गए थे। वहां ढाई से तीन महीने बिताए। जलियांवाला बाग हत्‍याकांड के बारे में गहन‍ रिसर्च की। उस दर्द को एब्‍जॉर्ब किया। फिल्‍म में उनकी तीन चार लुक हैं। 20, 25, 35 और 40 की उम्र को उन्‍होंने प्‍ले किया। तकरीबन 15 से 16 किलो वेट लूज भी किया था।

मेकर्स ने साथ ही फिल्‍म में देशभक्ति के उन्‍मादी नारों से भी दूरी रखी है। मेकर्स ने पहले यह इरफान को नैरेट की थी। उसी वक्‍त जानकारी मिली कि इरफान बीमार हैं, फिर वह प्रोजेक्‍ट रोक दिया गया था। फाइनली जो फिर विक्‍की कौशल के साथ शुरू हुआ।

म्‍यूजिक से किरदार का सुर पकड़ा
फिल्‍म के डायरेक्‍टर शूजित सरकार ने खास बातचीत में बताया- विक्‍की इस फिल्‍म के लिए दिल से राजी हुए थे। उन्‍होंने इसे ऑर्डिनरी फिल्‍म की तरह नहीं लिया। उन्होंने स्‍टार की तरह नहीं, बल्‍क‍ि एक एक्‍टर की तरह अप्रोच किया। उधम सिंह की विचारधारा से उन्‍हें इंस्‍पायर करवाया गया। उस जोन की कुछ म्‍यूजिक उन्‍हें दी। उससे उन्‍होंने किरदार का सुर पकड़ा। वो खुद भी शूट से पहले ढाई से तीन महीने पहले अमृतसर में रहे। वहां जलियांवाला बाग हत्‍याकांड पर रिसर्च की। उस दर्द को अपने अंदर उतारा।

उधम सिंह का दुनिया में कोई नहीं, रिसर्च में खासी मशक्‍कत हुई
शूजित ने आगे बताया-हमने इसे मसालेदार देशभक्ति वाली फिल्‍म नहीं बनने दिया है। डायलॉग्‍स में देशभक्ति को लेकर उन्‍माद पैदा करने वाली नारेबाजी नहीं पिरोई है। एक राइटर, डायरेक्‍टर के लिए यह सब करना बड़ा आसान होता है। हम यहां इससे दूर रहे हैं। फ्रीडम फाइटर की जर्नी को बढ़ा-चढ़ाकर पेश नहीं किया है। उधम सिंह का बचपन अनाथालय में बीता था। टीन ऐज में उनके बड़े भाई की भी मौत हो गई थी। उनके परिवार से दुनिया में कोई नहीं है। हमें रिसर्च मै‍टेरियल हत्‍याकांड पर बैठी इन्‍क्‍वॉयरी कमीशन से मिल सकी।

वैसे कहूं तो रिसर्च में 25 से 30 साल गए हैं। वह इसलिए कि स्‍कूल और कॉलेज के दिनों से ही मेरे जहन में थे। फिर हाल के बरसों में हम काफी लोगों से मिले। कैक्‍सटन हॉल में माइकल ओ डायर को जो उन्‍होंने एसिसिनेट किया तो वह पब्लिक प्‍लेटफॉर्म में है। एक डिबेट यह भी है कि उधम सिंह जलियांवाला बाग में मौजूद थे कि नहीं।

विजुअल इफैक्ट्स से बनाया 19वीं सदी का लंदन
फिल्‍म मूल रूप से अमृतसर और रशिया में शूट हुई है। रशिया में फिल्‍म के लिए इंग्‍लैंड रीक्रिएट हुआ है। वहां मेकर्स ने 19वीं सदी के इंग्‍लैंड और इंडिया को क्रिएट किया है। जलियांवाला बाग, कैक्‍स्‍टन हॉल, लंदन की गलियां सब कुछ क्रिएट किया गया। वह इसलिए कि आज की तारीख में तो लंदन में 19वीं सदी का कुछ मिला नहीं। शूजित कहते हैं-हमने यहां भी उलटा तरीका अपनाया है। हमने विजुअल इफैक्‍ट्स पर खासा खर्च किया है, मगर उसे यूं रखा है कि फिल्‍म बहुत चकाचौंध से भरी न लगे।

देशभक्ति पर ‘तेजस’, ‘सैम बहादुर, ‘पिप्‍पा’ आने वाली हैं
देशभक्ति वाली फिल्‍मों का ट्रैक रिकॉर्ड हाल के बरसों में बेहतर रहा है। इसी साल ‘भुज:प्राइड ऑफ इंडिया’ और ‘शेरशाह’ आई और खासी चर्चा में रही। कंगना की ‘तेजस’ पूरी होने की दहलीज पर है। विक्‍की ‘सरदार उधम’ के बाद ‘सैम बहादुर’ करने को हैं, जो फील्‍ड मार्शल सैम मॉनेकशॉ की जिंदगी पर बेस्‍ड है। कार्तिक आर्यन ‘कैप्‍टन इंडिया’ करने वाले हैं। ईशान खट्टर और मृणाल ठाकुर ने तो 1971 इंडो पॉक वॉर पर बेस्‍ड ‘पिप्‍पा’ का एक शेड्यूल पूरा भी कर लिया है। इमरान हाशमी ‘कैप्‍टन नवाब’ बनाने को थे, मगर डिफेंस मिनिस्‍ट्री से उन्‍हें परमिशन नहीं मिली।