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फिल्मी दुनिया में नया ट्रेंड:घर बैठे 125 ऑडिशन भेजे, बॉम्बे बेगम्स जैसी सीरीज में मिला काम, OTT पर बूम से एक्टिंग में करियर के मौके बढ़े

मुंबई4 महीने पहलेलेखक: मनीषा भल्ला
  • दूरदराज के गांवों से लेकर दुबई तक, दुनियाभर से भेजे जा रहे हैं ऑडिशन

केस- 1

बेंगलुरु की काजल चुग एक्टिंग में करियर जमाना चाहती हैं, लेकिन मुंबई सेट नहीं होना चाहतीं। घर से ही ऑनलाइन ऑडिशन भेजने वालीं काजल आज ‘बॉम्बे बेगम्स’ और ‘फील्स लाइक इश्क’ में किरदार पा चुकी हैं। अब काजल मुंबई आती हैं, अपना शूट खत्म करके बेंगलुरु वापस चली जाती हैं और वहां से और मौके तलाशती हैं।

काजल लॉकडाउन के दौरान हर रोज 5-6 ऑडिशन वीडियो बनाकर कास्टिंग एजेंसियों को भेजती रहती थीं। ऐसे 100 से 125 ऑडिशन भेजने के बाद कहीं आगे जाकर बात बनी और उन्हें नेटफ्लिक्स की सीरीज में काम मिला।

काजल ने बताया कि मैंने बेंगलुरु के क्राइस्ट कॉलेज में ड्रामा का कोर्स किया हुआ है इसलिए 5-6 टेक में ही मेरा ऑडिशन ओके हो जाता है। मैं खुद ही शूट करती हूं और खुद ही एडिट करके लिंक भेजती हूं।

केस -2

यूपी के हमीरपुर से मिहिर आहूजा भी नेटफ्लिक्स की इस सीरीज में नजर आ रहे हैं। मिहिर को यहां तक का सफर तय करने के लिए मुंबई में सेट होकर स्ट्रगल करने की जरूरत नहीं पड़ी। हमीरपुर से ही महीनों तक वे कास्टिंग एजेंसियों को अपने ऑडिशन भेजते रहे। आज उनके पास दो-तीन वेब सीरीज में काम है।

मिहिर आहूजा और काजल चुग, दोनों ही कलाकार हाल ही में नेटफ्लिक्स की सीरीज फील्स लाइक इश्क में एक साथ नजर आए हैं।
मिहिर आहूजा और काजल चुग, दोनों ही कलाकार हाल ही में नेटफ्लिक्स की सीरीज फील्स लाइक इश्क में एक साथ नजर आए हैं।

काजल और मिहिर अकेले नहीं हैं, ऑनलाइन ऑडिशन से काम पाने वाले ऐसे दर्जनों स्टार हैं। जिन्हें काम की तलाश में कास्टिंग एजेंसियों के दरवाजे तक नहीं जाना पड़ा। फिल्मी दुनिया में नई पीढ़ी का संघर्ष बदल चुका है। घर छोड़कर, दोस्तों से टिकट के पैसे उधार लेकर मुंबई आना, महीनों-सालों तक स्टूडियो के चक्कर काटते रहना, वह पीजी में या रूम शेयरिंग में रहना और रातों में सपने देखते हुए भूखे सो जाने वाला संघर्ष अब नहीं रहा।

कैसे आया ये बदलाव
कोविड की वजह से दो चीजें हुईं। एक तो कुछ समय के लिए फिजिकल ऑडिशन तकरीबन बंद ही हो गए। दूसरी तरफ ओटीटी के ग्रोथ की वजह से कंटेंट की मारामारी हो गई, काम बेहिसाब बढ़ गया। लॉकडाउन में ओटीटी ने कई लोगों की किस्मत को अनलॉक कर दिया, घर बैठे ऑडिशन दिए और एक्टर बन गए।

कास्टिंग एजेंसियां बताती हैं कि पहले काम ढूंढने की ज्यादा जरूरत आर्टिस्ट को थी। अब यह दोतरफा मामला हो चुका है। आज कंटेंट की डिमांड बढ़ने से इतने आर्टिस्ट भी चाहिए।

काम बढ़ा और काम चाहने वाले भी
कास्टिंग डायरेक्टर कुणाल एम.शाह ने बताया कि आर्टिस्ट की डिमांड बढ़ी है, पर ऑनलाइन की वजह से ऑडिशन देने वाले भी बढ़े हैं। पहले सबके लिए मुंबई आना संभव नहीं था। अब घर बैठे हर कोई ऑडिशन भेज सकता है। मतलब कि मौके बढ़े हैं तो साथ में कॉम्पिटिशन भी कई गुना बढ़ चुका है।

दुबई और लंदन से भी कास्टिंग
‘रामसेतु’ समेत कई जानी-मानी फिल्मों की कास्टिंग डायरेक्टर श्रुति महाजन बताती हैं कि अभी रामसेतु के लिए ही मैंने मुंबई में बैठकर दुबई से कास्टिंग की। अभी लंदन के कुछ ऑडिशन देख रही हूं। अभी एक वेब सीरीज के लिए कश्मीर से आए ऑडिशन रिव्यू करने के बाद कास्टिंग की थी।

आर्टिस्ट की क्षमता बढ़ी
कास्टिंग डायरेक्टर सोहन ठाकुर बताते हैं कि पहले एक्टर मुंबई तक ट्रैवल से थके हुए होते थे। दूसरे एक्टर को देखकर कॉन्शियस भी हो जाते थे। दिन में मुश्किल से एक दो ऑडिशन दे पाते थे। आज डिजिटली अपनी क्षमता के हिसाब से 10-20 ऑडिशन कोई मुश्किल बात नहीं है।

फिजिकल ऑडिशन के भी अपने फायदे
फिल्म स्त्री और टीवीएफ की सीरीज के लिए कास्टिंग करने वाले शिव चौहान के अनुसार फिजिकल ऑडिशन के भी अपने फायदे हैं। हम रीटेक ले सकते हैं। ऑनलाइन में ठीक से क्यू ना मिलने की वजह से डायलॉग डिलीवरी में गलती हो जाती है। अब इन चीजों के लिए हमारे असिस्टेंट लाइव ऑडिशन करवाते हैं।

ओटीटी के साथ टीवी का भी योगदान
सिने-टीवी आर्टिस्ट एसोसिएशन सिंटा के सचिव अमित बहल ने बताया कि ओटीटी की वजह से एक्टर्स की डिमांड बेशक बढ़ी है, लेकिन इसमें टीवी का भी बड़ा योगदान है। अब सारे टीवी शो ऑन एयर हो चुके हैं तो काम बढ़ने की उम्मीद है।

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