बातचीत:अपनी हेल्थ प्रॉबलम को लेकर शगुफ्ता अली बोलीं- 80 पर्सेंट कवरअप कर लिया है और सिर्फ 20 पर्सेंट रह गया है

मुंबईएक महीने पहलेलेखक: उमेश कुमार उपाध्याय
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पिछले दिनों शगुफ्ता अली की तबियत को लेकर काफी चर्चा में थीं। अब ताजा खबर यह है कि उनकी तबियत 80 पर्सेंट ठीक हो गई है और सिर्फ 20 पर्सेंट ठीक होना बाकी है। एक्ट्रेस कोविड महामारी के चलते काम न मिल पाने की वजह से आर्थिक तंगी से भी जूझ रहीं थी तब माधुरी दिक्षित ने उन्हें 5 लाख रुपए की आर्थिक मदद की थी। अब दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान शगुफ्ता अपनी बीमारी और काम को लेकर खुलकर बात की।

सबसे पहले तो अपनी तबियत के बारे में बताइए?
अल्लाह का शुक्र है। आप लोगों की दुआएं हैं। मेरे जितने फ्रेंड्स, वेल विशर और फैंस हैं, उन सबकी दुआएं हैं। पहले से अब काफी स्वस्थ हूं। अब काम शुरू कर दिया है। इंशाल्लाह आगे भी फटाफट काम करूंगी।

आपकी सुमेरू फिल्म आने वाली है। इसकी शूटिंग कब और कहां की हैं?
पहला लॉक डाउन शुरू हुआ था, तब फिल्ममेकर हिमाचल के पहाड़ों में जाकर इसकी शूटिंग शुरू कर दी थी। क्योंकि उस समय हिमाचल में लॉक डाउन नहीं था। पूरी फिल्म में स्नो चाहिए था, इसलिए वहां शूट कर ली। फिल्म का थोड़ा-बहुत पोर्शन बाकी था, उसे हमने देहरादून और सूरत में शूट किया। मैंने हिमाचल में शूटिंग नहीं की, क्योंकि वहां मेरा कैरेक्टर नहीं था। देहरादून और सूरत में शूट किया है।

एक तरफ अस्वस्थ थीं और दूसरी तरफ शूटिंग करना था। कैसे पॉसिबल हुआ?
मैंने देहरादून में जुलाई के आखिर सप्ताह में शूटिंग की। वहां बहुत अच्छे से मैनेज हो गया, क्योंकि बहुत ज्यादा भागदौड़ नहीं थी। लोकेशन अच्छी और कंफर्टेबली थी अविनाश ध्यानी वगैरह ने बहुत ख्याल रखा। कुछ समय पहले सूरत में शूट किया, तब तक तबियत काफी बेहतर थी। इस तरह कुछ ज्यादा मुश्किल का सामना नहीं हुआ। अच्छे से शूट हो गया।

किरदार कैसा है?
इसमें मेरा हीरोइन संस्कृति भट्‌ट की सास समायरा का किरदार है, जो काफी दमदार है। यह नॉर्मल नहीं, बल्कि बहुत रिच सास का रोल है, इसलिए शो ऑफ करने वाली सास है। बहुत अच्छा और प्यारा रोल है। दरअसल, निजी जीवन में समायरा के बिल्कुल अपोजिट हूं, इसलिए इसे करने में और मजा आया।

बहू के रूप में संस्कृति को पाकर कैसा लगा?
संस्कृति के साथ काम करके बहुत मजा आया। उनके साथ देहरादून और सूरत में हमारे बहुत प्यारे सीन शूट हुए। ऐसा एहसास नहीं होता है कि नई एक्टर हैं। संस्कृति और अविनाश, दोनों बहुत मझे हुए कलाकार हैं। नेचरवाइज तो बहुत ही प्यारे हैं। शूटिंग के दौरान कुछ न कुछ मस्ती-मजाक चलता ही रहता था। बहुत सुकून और इत्मिनान के साथ काम हुआ, क्योंकि दोनों अपना काम अच्छे से करना जानते हैं। बड़े काबिल और नेक इंसान हैं। मैं तो दोनों के लिए दुआएं करूंगी कि उन्हें कामयाबी मिले।

इसके अलावा और कौन-सी टीवी सीरियल, वेब सीरीज और फिल्में कर रही हैं?
अभी तक मैंने कहीं सीरियल के लिए बात नहीं की है। हां, दो फिल्मों की बात चल रही है। ये दोनों बड़े बैनर की फिल्में हैं। एक बार कंफर्म हो जाए, तभी उसके बारे में बता सकती हूं। लेकिन दोनों में मेरे डिफरेंट रोल हैं।

अच्छा, स्वास्थ्य को लेकर बात की जाए, तब कितना पर्सेंट कवर कर लिया है और कितना बाकी है?
मांशाल्लाह 80 पर्सेंट कवरअप कर लिया है और सिर्फ 20 पर्सेंट रह गया है। अगर काम करती हूं, तब वह भी महसूस नहीं होता है कि तबियत की प्रॉब्लम है। लेकिन जब बैठ जाती हूं कि काम नहीं है या छुट्‌टी चल रही है, तब महसूस होता है कि तबियत खराब है। सबसे अच्छी बात यह रही कि डॉक्टर्स मेरी कजिन के पहचान वाले निकले। फैमिली के डॉक्टर हैं, इसलिए लकली बहुत अच्छे से काम हुआ।

दवा का कोर्स कब तक चलेगा?
जाहिर-सी बात है कि दवाओं का पूरा कोर्स तीन-चार महीने करना ही पड़ेगा। दवाएं तो चलती रहेंगी, उसका कोई प्रॉब्लम नहीं है। दवाएं कंज्यूम करते रहना पड़ेगा। लोगों की दुआएं रहीं, तब जल्दी कवर हो जाएगा।

अच्छा, मदद के लिए गुहार लगाई थीं, सो काफी लोग सामने आए!
जी हां। अल्लाह का शुक्र है कि काफी लोग मदद किए। जिनको मैं नहीं जानती थी, वे लोग भी मदद के लिए आगे आए। हरेक का नाम नहीं ले पाऊंगी, क्योंकि वह मुश्किल हो जाएगा। कई लोगों ने तो यह भी कहा है कि मेरा नाम मत लीजिए। वे नहीं चाहते कि पब्लिक में उनका नाम आए। सबको मेरा हाथ जोड़कर तह-ए-दिल से शुक्रिया है।

मुश्किलों से भी एक सीख मिलती है। इस मुश्किल घड़ी से क्या सीख ली?
मैंने यह सीख ली कि जिनसे उम्मीद करते हैं, वे उम्मीद पर खरे नहीं उतरते। हम जिनके बारे में सोचते हैं कि ये लोग हमारे मुश्किल घड़ी में जरूर खड़े होंगे, वे खड़े नहीं हुए। इसका मुझे अफसोस नहीं है, लेकिन एक सीख मिल गई, वही मेरे लिए काफी है। मैं सबसे यही दरख्वास्त करूंगी कि अगर आप तकलीफ में हैं, तब अपने आप तक मत रखिए। अपनी तकलीफ के बारे में लोगों से बोलिए। मैं साढ़े चार, पांच साल खामोश रही। मेरे ख्याल से मैंने गलत किया। अगर मैं पहले बोल देती, तब शायद यह सब चीजें मेरे साथ न होती। अगर तकलीफ शेयर नहीं करेंगे, तब वह बढ़ जाती हैं। ऐसा करने से मेरे ख्याल से जिंदगी थोड़ी आसान हो जाती है।

क्या चार-पांच साल से आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी, दोनों तकलीफें थीं?
जी हां, धीरे-धीरे दोनों तकलीफे थीं। एक तरफ फाइनेंशियल क्राइसेस भी चल रहा था, जिसे धीरे-धीरे यह सोचते हुए आगे बढ़ती चली गई कि शायद आगे ठीक हो जाएगा। काम की वजह से परेशानी होनी लगी, तब स्ट्रेस लेने लगी। उससे तबियत खराब होने लगी। इस तरह दोनों चीजें आगे-पीछे ऐसी चल रहीं थी, जैसे दोनों एक-दूसरे का साथ दे रही हो। कहीं न कहीं समझ नहीं आ रहा था कि किस चीज को पहले ठीक करूं। समझ ही नहीं पा रही थी कि सेहत को देखूं या काम ढूंढ़कर उसे करूं। बहुत कंफ्यूजन स्टेज में थी। लेकिन कहीं न कहीं ऊपरवाला है, जो संभाल ही लेता है। मेरे मालिक का करोड़ों एहसान कि उसने बहुत अच्छे से मुझे संभाला। खुशनसीब हूं कि ऊपरवाले ने साथ दिया।

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