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भास्कर इंटरव्यू:श्रेया घोषाल ने की पुराने गानों के रीमिक्स, रीक्रिएटेड वर्जन बनाए जाने की मुखालफत, बोलीं- ऐसा करके पुराने गाने को बिगाड़ देते हैं

19 दिन पहलेलेखक: अंकिता तिवारी

श्रेया घोषाल का नया सिंगल 'अंगना मोरे' हाल ही में रिलीज हुआ है। श्रेया ने इस गाने के बोल लिखे हैं और इसे कंपोज भी उन्होंने ही किया है। जबकि गाने के प्रोड्यूसर उनके भाई सौम्यदीप घोषाल हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में श्रेया ने गाने, अपने भाई के कोलैबोरेशन और पर्सनल लाइफ के बारे में बताया। उन्होंने फिल्मों में पुराने गानों के रीमिक्स और रीक्रिएटेड वर्जन की मुखालफत की। श्रेया ने कहा कि ऐसे करके कुछ नया नहीं किया जाता, बल्कि पुराने गाने को बिगाड़ दिया जाता है। उनसे हुई बातचीत के अंश:-

Q. आपके नए गाने 'अंगना मोरे' के बारे में कुछ बताइए? गाने को बनाने के पीछे की कहानी क्या है?
A.
लॉकडाउन में एक तरफ जहां सभी बोर हो रहे थे, वहीं मुझे अंदर से आवाज आई कि एक क्लासिकल बंदिश का गाना बनाना चाहिए। मैंने अपने भाई सौम्यदीप को कॉल किया और कहा कि मैं गाना कंपोज करने, लिखने और गाने को तैयार हूं। आप सिर्फ कॉन्सेप्ट्लाइज करिए। इसी तरह वीडियो कॉल पर यह गाना बन गया। गाने के पिक्चराइजेशन में ग्राफिक्स और आर्टवर्क का इस्तेमाल किया गया है, जो इसे यूनिक बनाता है। इस गाने की कोरियोग्राफी शक्ति मोहन ने की है। मैं और सौम्यदीप भी इस गाने में फीचर कर रहे हैं।

Q. भाई सौम्यदीप के साथ कोलैबोरेशन कितना सुखद था? क्या आप दोनों में आम भाई- बहनों जैसी नोकझोंक होती है?
A.
मुझे लगता है जब मैं और सौम्यदीप साथ काम करते हैं तो हम बहुत ही मस्ती, मजाक करते हैं। कई बार किसी जोक को लेकर घंटों हंसते रहते हैं। लेकिन उस मजाक मस्ती में जो काम आता है, वह निखर के आता है। सौम्यदीप मुझसे 7 साल छोटा है तो मैं कभी- कभी कोशिश करती हूं कि उसे थोड़ा डांट दूं। लेकिन सच कहूं तो मैं उससे डरती हूं, क्योंकि वह एक टास्कमास्टर है। अपने काम को परफेक्शन के साथ करता है।

Q. अपने गानों में तो आप एक्टिंग करती नजर आती हैं। लेकिन क्या कभी फिल्म में या ओटीटी प्लेटफार्म पर एक्टिंग करने की कोई इच्छा है ?
A.
सच कहूं तो यह बहुत सालों से मेरे साथ चल रहा है। मुझे कई फिल्मों के ऑफर आए हैं। बहुत बड़े-बड़े प्रोडक्शन हाउस से भी फिल्में ऑफर हुई हैं। लेकिन मुझे लगता है कि मेरे अंदर एक्टिंग का कीड़ा नहीं है। मैं एक्टिंग के लिए कैमरा फेस करने से घबराती हूं। मुझे लगता है कि म्यूजिक वीडियो भी तो एक तरह से किसी कहानी को कहते हैं। इसलिए उनका हिस्सा बने रहना मुझे पसंद है। लेकिन आगे भविष्य में भी फिल्मों में काम करने की कोई इच्छा नहीं है।

Q. बीते साल लॉकडाउन का इस्तेमाल किस तरह किया?
A.
सच कहूं तो मैंने इस लॉकडाउन में अपने परिवार को समय दिया। इसके अलावा गार्डनिंग और कुकिंग बहुत शौक से की। लेकिन अहम बात यह है कि काफी समय से म्यूजिक को लेकर जो डिसिप्लिन होता है वह थोड़ा हट सा गया था। मैं रियाज नहीं कर पा रही थी। बहुत सारे गानों की रिकॉर्डिंग होती थी। इवेंट्स और शो होते थे, जिस वजह से रियाज को समय नहीं दे पा रही थी। लेकिनलॉकडाउन में मैंने हर रोज एक घंटा रियाज किया। भले ही अब फिर से दुनिया नॉर्मल हो रही है और शो, म्यूजिक एल्बम पर काम शुरू हो गया है। फिर भी मैं रियाज को हर रोज समय देती हूं।

Q. आप छोटी उम्र से ही गाना गा रही हैं। अपने जीवन की सबसे यादगार शाबाशी के बारे में बताएं?
A.
मैं खुद को बहुत खुशनसीब मानती हूं कि मुझे छोटी उम्र में ही बड़े-बड़े दिग्गजों का आशीर्वाद मिला। उनके सामने गाने का मौका मिला है। गिरिजा देवी, विलाद खान साहब, अनिल बिस्वास जी, जाकिर हुसैन साहब इन सब दिग्गजों से वाहवाही मिलना, उनके हाथ से पुरस्कार मिलना मेरे लिए बहुत खास है। मुंबई आने के बाद मैने आनंद जी कल्याण जी से 2 साल म्यूजिक की ट्रेनिंग ली थी। मुझे आज भी याद है उनका बच्चों के लिए एक लिटिल वंडर्स नाम का कॉन्सर्ट होता था, जिसमें मुझे बहुत कम बुलाया जाता था।

एक दिन मैंने उनसे पूछ लिया कि मुझे इतना कम क्यों बुलाया जाता है तो उन्होंने कहा कि तुम्हारी आवाज का जो तोहफा तुम्हें भगवान से मिला है, उसे मैं बिगाड़ना नहीं चाहता। मैं नहीं चाहता कि तुम हर रोज कॉन्सर्ट करो। बल्कि अपनी आवाज को सही वक्त आने तक सहेज कर रखो। मैंने उनकी सलाह गांठ बांध कर रखी और तब तक शो नहीं किए, जब तक सही वक्त नहीं आया। अपनी आवाज को रियाज करके तराशा और आज भी उनके शब्द मेरे कानों में गूंजते हैं।

Q. म्यूजिक इंडस्ट्री में न्यूकमर्स को क्या सलाह देना चाहेंगी?
A.
मैं जो सलाह देना चाहती हूं, वह नई नहीं है। बस यही है कि हमेशा सीखने की ललक बनी रहे। दौलत और शोहरत के पीछे लालची न हो जाएं। अगर लंबी रेस का घोड़ा बनना है, तो अपनी कला पर फोकस रखें और उसे प्राथमिकता दें। अगर आप निश्चित रूप से रियाज कर रहे हैं, अपनी कला को संवार रहे हैं, उसे समय दे रहे हैं तो आपको मौका मिलना ही है। शायद काम थोड़ा कम मिले, लेकिन जो मौका आपको मिलेगा, वह आपको जिंदगी भर याद रहेगा और लोग भी आपके काम को याद रखेंगे।

Q. पुरानी फिल्मों के मुकाबले आजकल नई फिल्मों में फीमेल सोलो सॉन्ग्स बहुत कम देखने को मिलते हैं। इस बारे में आप क्या कहना चाहेंगी?
A.
यह म्यूजिक इंडस्ट्री के लिए बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं खुद को लकी मानती हूं कि मैंने मेरी पहली फिल्म 'देवदास' में 3-4 सोलो और दो डुएट गाने गाए थे। मैंने उस समय का बेस्ट टाइम देखा है। कम फीमेल सॉन्ग्स का चलन हमारी म्यूजिक इंडस्ट्री में कुछ सालों से ही चालू हुआ है। मुझे लगता है कि आगे बढ़ने के बजाय इस दिशा में हम पीछे होते जा रहे हैं। इसे बदलने की बहुत जरूरत है। यह बहुत बड़ा रीजन है कि मैं इंडिपेंडेंट म्यूजिक कर रही हूं।

संजय लीला भंसाली की फिल्मों में औरतों को महत्वपूर्ण किरदारों में दिखाया जाता है। मेरा यह मानना है कि आज इंडस्ट्री में फीमेल सेंट्रिक फिल्म बहुत कम बन रही हैं। जिस वजह से फीमेल सोलो सॉन्ग्स भी कम निकल रहे हैं। इस प्रथा को बदलने की काफी जरूरत है। मेरा बस यही कहना है कि जब इंडिपेंडेंट म्यूजिक भी बनाया जा सकता है तो फिल्मों में गाने मिलने का इंतजार क्यों करें ।

Q. पिछले 2 दशकों में संगीत पूरी तरह बदल गया है। मेलोडी सॉन्ग्स की जगह रीमिक्स और रीक्रिएटेड गानों ने ली है। इसको आप किस तरह से देखती हैं?
A.
यह पूरी तरह म्यूजिक लेबल की गलती है। चाहें तो कितना अच्छा म्यूजिक बना सकते हैं। लेकिन रीमिक्स और रीक्रिएटेड गाने कमर्शियल म्यूजिक बनाने का सरल तरीका है। 90 के दशक का कोई हिट गाना लेना और उसे रीक्रिएट करना या रीमिक्स करना। पहली बात तो वे गाने इतने पुराने हैं ही नहीं। आज भी जब ओरिजिनल गाने बजते हैं तो लोगों को सुनना पसंद आता है। उस गाने को रीक्रिएट कर नया तो उन्होंने कुछ किया नहीं, लेकिन पुराने गाने को ही थोड़ा बिगाड़ दिया। मैं रीमिक्स और रीक्रिएट गाने के फेवर में कम हूं।

मुझे लगता है ऑडियंस भी इन्हे ज्यादा पसंद नहीं करती। वह भी पक चुकी है और अब समय आ गया है कुछ नया करने का। पिछले साल लॉकडाउन की वजह से फिल्में कम रिलीज हुई। इसलिए इस ट्रेंड में थोड़ी कमी आई है और इंडिपेंडेंट म्यूजिक थोड़ा ज्यादा आगे आया है। ऑडियंस भी बहुत स्मार्ट है। उनको भी गोल्डन एल्बम्स की तलाश रहती है, जिन्हें वे कई सालों तक सुन पाएं। न कि कोई गाना, जो रिलीज होने के 2 हफ्ते के बाद ही भुला दिया जाए।

Q. अपने करियर में टर्निंग प्वाइंट किसे मानती हैं?
A.
मेरे करियर में सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट था मेरी पहली फिल्म 'देवदास', जिस एल्बम के अधिकतर गाने मैंने गाए थे। उस वक्त मेरी उम्र महज 16 साल थी। गानों की वजह से मुझे पहचान मिली और कितने लोगों के साथ काम करने का मौका मिला। उस एल्बम ने मेरी जिंदगी ही बदल दी। अगले साल मुझे म्यूजिक इंडस्ट्री में 20 साल पूरे हो जाएंगे।

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