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खास बातचीत:सिंगर कविता सेठ ने कहा- मैंने आइटम नंबर और मुजरों को न कहा हुआ है, इसी वजह से मेरे पास कम लोग आते हैं

4 महीने पहलेलेखक: अमित कर्ण
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सिंगर कविता सेठ ने इस गुरूवार दाग देहलवी की मशहूर रचना 'लुत्फ वो इश्क में पाए हैं कि जी जानता है' का लाइव वर्जन रिलीज किया है। 'वेक अप सिड', 'गैंगस्‍टर' से लेकर 'बेगम जान' तक, कविता आज भी अपनी ही शर्तों पर गायकी कर रही हैं। वो फिल्‍मों से ज्‍यादा अपने इंडिपेंडेंट म्‍यूजिक के काम से खुश हैं। वेब शो के लिहाज से उनका पिछला काम पिछले साल अक्‍टूबर में आया था। मीरा नायर के वेब शो 'ए सूटेबल बॉय' में उन्‍होंने म्‍यूजिक भी दिया था और गायकी भी की थी।

कविता को 'थप्‍पड़' का एक गाना पसंद आया

कविता फिल्‍मों में हो रहे मौजूदा संगीत के काम से निराश हैं। वो कहती हैं, 'इंडस्‍ट्री में जिस तरह के गाने बन रहे हैं, उनसे मैं निराश हूं। हाल फिलहाल में मुझे तापसी पन्‍नू की फिल्‍म 'थप्‍पड़' का एक गाना पसंद आया था। ऊपर से कोरोना की दूसरी लहर ने सिंगर्स और म्यूजिशियन्स की मानसिक स्‍थ‍िति पर विपरीत प्रभाव डाला है। हम अच्‍छे गाने कंपोज करने में फोकस नहीं कर पा रहे हैं। गाना गाने में लंबी सांस की बड़ी अहमियत होती है। अभी हालात ऐसा है, जो सांसों पर ही किसी का इख्‍त‍ियार नहीं है।'

इंडस्‍ट्री में गंदे गाने भी पैसों के दम पर लाखों लोगों तक पहुंच जाते हैं

कविता आगे कहती हैं, 'बड़े दुख की बात ये भी है कि म्‍यूजिक इंडस्‍ट्री में कैंप भी एग्‍ज‍िस्‍ट करती है। मौजूदा दौर के संगीत की बर्बादी का कारण ही कैंपिंग है। उनके पास तो बेशुमार पैसा है। गंदे गाने भी पैसों के दम पर लाखों लोगों तक पहुंचा देते हैं। इंडिपेंडेंट म्‍यूजिक से ताल्‍लुक रखने वाले वैसा नहीं कर पाते। इसका नतीजा ये होता है कि अच्‍छे गीत संगीत की खबर लोगों तक पहुंच ही नहीं पाती है।'

आज भी लोग मुझसे 'गूंजा सा है कोई इकतारा' सुनाने की फरमाइश करते हैं

कविता बताती हैं, 'बहरहाल, अच्‍छा संगीत खुशबू की तरह होता है। वह लोगों तक पहुंच ही जाता है। बस जरा धीरज रखना पड़ता है। मैं साथ ही म्‍यूजिक माफिया के उन तर्कों से भी इत्‍तेफाक नहीं रखती कि अलका जी, कुमार सानू या मेरे गानों की ही मियाद पूरी हो चुकी है। आज भी सोशल मीडिया पर युवा पीढ़ी मुझे 'गूंजा सा है कोई इकतारा' गाना ही सुनाने की फरमाइश करती है। जब मैंने फिल्म 'कॉकटेल' में गाना गाया 'तुम ही हो बंधु' और वो हिट हुआ, तो मेरे पास काफी ऑफर आ रहे थे। तब अमित त्रिवेदी ने मुझसे कहा था कि भेड़चाल में मत चलना। साल में एका-दो गाने ही लाना लेकिन ऐसे लाना जो लिस्‍नर्स पर गहरी छाप छोड़े। मुझे उनका सजेशन भाया, वरना अरिजीत सिंह तक को स्टीरियोटाइप कर दिया गया है।'

मैंने आयटम नंबर और मुजरों को ना कहा हुआ है: कविता

कविता आगे बताती हैं, 'मैंने आयटम नंबर और मुजरों को न कहा हुआ है। असल में फिल्म 'तेवर' के डायरेक्‍टर अमित शर्मा को मेरा 'इकतारा' गाना बहुत अच्‍छा लगा था। उससे इंस्‍पायर होकर उन्‍होंने साजिद-वाजिद के कहने पर मुझे 'तेवर' का एक आइटम नंबर ऑफर किया था, पर मैंने उसे बड़ी विनम्रता से मना कर दिया था। यह सब भी वजह है, जो मेरे पास लोग कम आते हैं और इसका मुझे गिला नहीं है।'

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