भास्कर एक्सक्लूसिव:सोनू सूद बोले, IT के छापे के वक्त मेरे पास हेल्प के लिए 53 हजार बिना पढ़े मेल, 8 हजार मैसेज थे; मदद का सिलसिला जारी रहेगा

मुंबई2 महीने पहलेलेखक: अमित कर्ण

कोरोना काल में जरूरतमंदों की मदद कर 'मसीहा' बने सोनू सूद के घर हाल ही में इनकम टैक्‍स के अधिकारी पहुंचे थे। विभाग इसे सर्वे बता रहा है, जबकि सोनू सूद के करीबी इसे रेड करार दे रहे हैं। अब फाइनली सोनू सूद खुद ऑन रिकॉर्ड सामने आकर इस मसले पर अपना पक्ष रख रहे हैं। दैनिक भास्‍कर के सवालों का भी सोनू सूद ने जवाब दिया है। पेश है सोनू सूद से हुई बातचीत के प्रमुख अंश...

सवाल: इस कार्रवाई ने आप को कितना मजबूत किया है या आप का भरोसा हिला है?
जवाब: इस कार्रवाई से कुछ नहीं बदला है। आज भी लोग नीचे खड़े हैं। कल भी खड़े थे और कल भी खड़े रहेंगे। मेरा काम लोगों की मदद करना है और मैं करता रहूंगा। उन लोगों ने अपनी कार्रवाई की है। मैं अपना काम करता रहूंगा, क्‍योंकि यह काम थमने के लिए शुरू नहीं हुआ था। अभी तो शुरुआत है। सफर लंबा है और लोगों की दुआओं से सब अच्‍छा ही होगा।

सवाल: अब और कितनी मजबूती से आप लोगों की मदद करते रहेंगे ?
जवाब: मुझे लोगों का बहुत सपोर्ट मिला है। जो काम हमने शुरू किया है, हमें यह और मोटिवेट करता है। इस कार्रवाई के बाद मुझ पर लोगों का विश्‍वास और मजबूत हुआ है। लोगों ने कहा है, 'हम आपके साथ हैं।' मैं मजबूती से काम करता रहूंगा। मुझे लगता है लोगों का विश्‍वास और बढ़ा है।

सवाल: फाउंडेशन में किस तरह के बदलाव आएंगे ?
जवाब: फाउंडेशन बहुत कमाल का काम कर रहा है। कई सौ लोग जिनकी सर्जरी होना बाकी है, उनको देख रहे हैं। बहुत सारे स्‍टूडेंट्स को पढ़ाना है, उनको देख रहे हैं। इस लिहाज से फाउंडेशन पहले भी अच्‍छा काम कर रहा था, आगे भी करता रहेगा। कोई भी इंसान ठान ले कि उसे लोगों की जिंदगी बदलनी है तो फर्क नहीं पड़ता। आप बस दिल लगाकर काम करें, क्‍योंकि यह मकसद और मंजिल दोनों बहुत बड़े हैं। मदद करने का जो प्‍लान है, वह बहुत बड़ा है। छोटी चीजों से फर्क नहीं पड़ना चाहिए। यह मेरा सोचना है।

सवाल: अब भी हर दिन मदद के लिए कितने लोगों की रिक्‍वेस्‍ट लगातार आ रही है ?
जवाब: मेरे पास करीब 53 हजार बिना पढ़े हुए ईमेल थे, जब 'वो' आए थे। 8 हजार बिना पढ़े हुए मैसेजेस थे। तरकीबन डेढ़ से दो लाख लोग हमें हर चार से पांच दिन में अप्रोच करते हैं। सभी को फिजिकली मदद पहुंचाना पॉसिबल नहीं है, लेकिन हमारी ज्‍यादा से ज्‍यादा कोशिश है कि टीम बढ़ाते रहें, ताकि लोगों की मदद करते रहें। आइडिया यही है कि जो विश्‍वास और जिम्‍मेदारी लोगों ने हमारे कंधों पर दी है, उस पर पूरी तरह से खरे उतरें। ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों को मेडिकल, एजुकेशन संबंधी सुविधाएं प्रदान कर सकें।

सवाल: कार्रवाई से आप के परिवार में कितनी हलचल रही, उन्‍होंने इसे कैसे हैंडल किया ?
जवाब: पूरा परिवार और मजबूत हुआ है। उन्‍होंने कहा कि मुश्किलें आती ही हैं परीक्षा की तरह कि आप थमेंगे या रुक जाएंगे। मुझे नहीं लगता कि हम थमने वाले हैं। लोगों के चेहरों पर जो मुस्‍कुराहट लाने की कसम खाई है, वह करते रहेंगे।

सवाल: क्‍या अब आगे मामला कोर्ट में जा रहा है, अपने फैंस को आप क्‍या बताना चाहेंगे ?
जवाब: मदद करने का सफर जारी रहेगा। अभी भी जब मैं खिड़की से बाहर देखता हूं, तो बहुत सारे लोग नीचे खड़े रहते हैं। देश के हर कोने से लोग आते हैं। लोग अपनी साइकिल, कूलर तो कोई मोबाइल बेचकर हमारे पास पहुंचते हैं। मैं कोशिश करूंगा कि उनकी उम्‍मीदों पर हम खरे उतरते रहें।

सवाल: क्‍या यह रूटीन कार्रवाई थी ?
जवाब: इसके मद्देनजर हमने सारे डॉक्‍युमेंट्स जमा कर दिए हैं। जो भी मांगा जाएगा, वह हम भरेंगे और उन्‍हें देते रहेंगे। देश हित के लिए हम सदा खड़े थे और खड़े रहेंगे। मुझे लगता है कि सोच को बड़ा कर दें, तो छोटी मोटी मुश्किलें आप का रास्‍ता नहीं रोक सकतीं।